नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप का सामना कर रहे महाराष्ट्र के डीआईजी मोरे निलंबित
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एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के डीआईजी निशिकांत मोरे को बृहस्पतिवार को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया। यह जानकारी गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दी। मोरे इन दिनों फरार चल रहे हैं। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (मोटर वाहन) मोरे के खिलाफ यह कार्रवाई नवी मुंबई से लगते तालोजा पुलिस में उनके खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराए जाने के दो हफ्ते बाद की गई है।
देशमुख ने बताया कि मोरे को निलंबित करने का निर्णय राज्य के डीजीपी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, छेड़छाड़ की वारदात जून 2019 में 17 वर्षीय पीड़िता के घर में उसकी जन्मदिन पार्टी के दौरान घटी थी। हालांकि आईपीएस अधिकारी के खिलाफ मामला 26 दिसंबर को दर्ज कराया गया। पीड़िता के पिता और आरोपी पुलिस अधिकारी आपस में दोस्त थे।
इस बीच पनवेल की सत्र अदालत ने मोरे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मोरे की याचिका का विरोध करते हुए तालोजा पुलिस ने तर्क दिया कि पीड़िता लापता है और ऐसी परिस्थिति में आरोपी को जमानत देना सही नहीं होगा। इस पर अदालत ने जमानत याचिका रद्द कर दी और साथ ही कोई भी अंतरिम संरक्षण देने से भी इनकार कर दिया।
पहली बार 26 दिसंबर 2019 को सामने आया था मामला
पीड़िता सोमवार रात से अपने मुंबई स्थित घर से लापता है। परिजनों ने उसके लापता होने का मामला दर्ज कराया है। घर से लड़की का एक सुसाइड नोट मिला था जिसमें उसने डीआईजी के दबाव में आत्महत्या करने की बात लिखी थी। नोट में पीड़िता ने लिखा, 'आप सभी के अपमान के लिए मैं माफी मांगती हूं, मुझे मत ढूंढना। मैं अब नहीं मिलूंगी और न इस जिंदगी में रहना चाहती हूं। इसीलिए मेरे बिना जीना सीख लेना।'
बता दें कि पीड़िता और डीआईजी के परिवार के बीच पारिवारिक संबंध थे। इसके अलावा दोनों परिवारों में संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। पुलिस के अनुसार पीड़िता ने पत्र में ट्रेन के नीचे आकर जान देने की बात लिखी है। पत्र में पीड़िता ने डीआईजी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार बताया है। पत्र में लड़की ने छह जनवरी की रात 12 बजे का समय लिखा है।
यह मामला पहली बार 26 दिसंबर 2019 को सामने आया था। पीड़िता ने पॉक्सो कानून के तहत डीआईजी मोरे के खिलाफ मुंबई के तलोजा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर घटना के छह महीने बाद दर्ज कराई गई थी। लड़की का आरोप था कि पांच जून, 2019 को पारिवारिक समारोह में डीआईजी ने उसके चेहरे पर केक लगाने के बाद दुर्व्यवहार किया था।