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Maharashtra: सड़क दुर्घटना में महिला की मौत के मामले में चार साल बाद आया फैसला, अदालत ने सुनाया मुआवजे का आदेश

Sun, 21 Sep 2025 01:28 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 21 Sep 2025 01:28 PM IST
सार

महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 2021 की सड़क दुर्घटना में महिला की मौत के मामले में उसके पति और बेटे को 26.25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि कार चालक लापरवाही से गाड़ी चला रहा था। बीमा कंपनी ने नशे की दलील दी, लेकिन रिपोर्ट में अल्कोहल की मात्रा ना के बराबर पाई गई। पति को 10 लाख और बेटे को 16.25 लाख रुपये मिलेंगे, जिसे उसकी बालिग उम्र तक एफडी में रखा जाएगा।
 

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Maharashtra death of a woman in a road accident case  court ordered compensation after Four years
विशेष न्यायाधिकरण का फैसला। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। एमएसीटी ने महिला के पति और बेटे को 26.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा बीमा कंपनी और कार मालिक को संयुक्त रूप से एक माह के भीतर नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाना होगा। यह मामला सितंबर 2021 में कल्याण-बदलापुर रोड पर हुए हादसे से जुड़ा है।
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मामले के अनुसार, पीड़िता सदफ अब्दुल गफूर मुल्ला अपने पति और बेटे के साथ मोटरसाइकिल पर सफर कर रही थीं। तभी रात 29 सितंबर 2021 को उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में महिला को गंभीर सिर की चोटें आईं और पांच दिन बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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न्यायाधिकरण का निष्कर्ष
न्यायाधीश आर वी मोहिटे ने आदेश में कहा कि कार चालक ने लापरवाही और तेज रफ्तार में वाहन चलाया और हादसे के बाद घटनास्थल से फरार हो गया। अदालत ने माना कि दुर्घटना की जिम्मेदारी कार चालक की लापरवाही से बनी।
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बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस ने अपनी दलील में कहा कि ड्राइवर नशे में था और उसने पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया, इसलिए कंपनी मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन अधिकरण ने यह तर्क खारिज कर दिया।


ड्राइवर पर नशे का आरोप साबित नहीं
अदालत ने पाया कि रासायनिक विश्लेषक की रिपोर्ट में ड्राइवर के खून में केवल 0.055 प्रतिशत अल्कोहल पाया गया, जो कानून के तहत नशे में वाहन चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी मौजूद था। इसलिए बीमा कंपनी के तर्क को अदालत ने निराधार माना।

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पीड़ित परिवार को मुआवजा
अधिकरण ने आदेश दिया कि महिला के पति को 10 लाख रुपये और नाबालिग बेटे को 16.25 लाख रुपये दिए जाएं। बेटे के हिस्से की राशि को उसकी बालिग उम्र तक सावधि जमा (एफडी) में रखा जाएगा। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में बीमा कंपनी और कार मालिक दोनों जिम्मेदार हैं और संयुक्त रूप से भुगतान करेंगे।

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