महाराष्ट्र: ठाकरे का भाजपा को जवाब, हिंदुत्व कोई कंपनी नहीं है जिसे छोड़ दिया जाए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार को हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व कोई कंपनी नहीं है जिसे छोड़ दिया जाए, यह हृदय से आता
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मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व कोई कंपनी नहीं है जिसे उनके (भाजपा के) अनुसार शिवसेना ने इसलिए छोड़ दिया क्योंकि हमने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। हिंदुत्व हृदय से आता है। कुछ लोग यह जानना चाहते हैं कि यह सरकार कब तक चलेगी, यह हम देखेंगे। लेकिन, वर्तमान में हमें गरीबों के लिए काम करना है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को कमजोर समझने की भूल न करें, यह पहले से अधिक मजबूत होकर उभरी है। सत्ता खोने के बाद कुछ लोगों के पेट में दर्द होना शुरू हो गया है, उन्हें अपनी तबीयत का ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि मैं ऐसे लोगों को दवाई तो नहीं दे सकता हूं लेकिन मैं उन्हें राजनीतिक दवाई जरूर दूंगा।
Hindutva is not a company which, as they say, was left by Shiv Sena because we formed govt (with Congress & NCP). Hindutva comes from the heart. Some people want to know till when this govt will last, that we'll see. But at present, we've to work for the poor: Maharashtra CM pic.twitter.com/WaYXJp6NxX
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) June 19, 2021
ठाकरे ने देश के 'सामाजिक अशांति’ की ओर बढ़ने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को यह तय करना चाहिए कि वे ताकत के लिए सत्ता चाहते हैं या आर्थिक मुद्दे सुलझाने के लिए। कोरोना महामारी के बीच अपनी पार्टी के 55वें स्थापना दिवस के मौके पर ठाकरे ने कहा कि देश के सामने अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य के दो प्रमुख मुद्दे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल यह तय करें कि वे सत्ता के लिए राजनीतिक सफलता चाहते हैं या आर्थिक मोर्चे पर उपजी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अशांति इसका वर्णन करने के लिए एक कठोर शब्द होगा, लेकिन देश निश्चित रूप से सामाजिक अशांति की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘यह तय करने का भी समय आ गया है कि क्या हम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक ताकत पाना चाहते हैं (या किसी और चीज के लिए)। अगर हम अपने सामने आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान खोजने के तरीकों पर विचार किए बिना आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में लिप्त रहते हैं, तो हम गंभीर संकट में हैं।’