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महाराष्ट्र : मराठा आरक्षण पर कैबिनेट ने अध्यादेश लाने की दी मंजूरी
Fri, 17 May 2019 05:38 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 17 May 2019 05:38 PM IST
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मराठा आरक्षण
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महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में मराठा छात्रों को आरक्षण देने के लिए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) आरक्षण अधिनियम, 2018 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश के लिए अपनी मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने अध्यादेश लागू होने के बाद प्रभावित होने वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के शुल्क के पुनर्भुगतान को भी अपनी मंजूरी दी। एक मंत्री ने कहा कि सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी निजी कॉलेजों में प्रबंधन कोटा के तहत दाखिला ले सकते हैं।
बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में मराठा समुदाय के लिये 16 फीसदी आरक्षण इस आधार पर नामंजूर कर दिया था कि प्रवेश प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।
कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अध्यादेश का मसौदा राज्यपाल को भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा, "इस अध्यादेश से उन छात्रों को राहत मिलेगी जो मराठा आरक्षण के तहत दाखिला ले चुके हें लेकिन अदालत द्वारा प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद प्रभावित हुए हैं। अब प्रवेश की तीसरा चरण शुरू होगा।"
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मंत्री ने कहा कि सामान्य वर्ग के जो छात्र प्रभावित होंगे वे निजी कॉलेजों में दाखिला की कोशिश कर सकते हैं और सरकार उनकी फीस का पुनर्भुगतान करेगी। पाटिल ने कहा कि सामान्य श्रेणी के छात्र प्रबंधन कोटा के तहत दाखिला लेने की कोशिश कर सकते हैं और सरकार उनकी मदद करेगी।
पाटिल के मुताबिक, राज्य सरकार दाखिले की समय सीमा 25 से 31 मई तक बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा, "हम मेडिकल पाठ्यक्रमों में अतिरिक्त 213 सीटें बढ़ाए जाने की मांग करेंगे," ।
मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर 21 मई को एक बैठक निर्धारित की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से आई मांगों को भी संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम अतिरिक्त सीटों पर भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।"
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बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में मराठा समुदाय के लिये 16 फीसदी आरक्षण इस आधार पर नामंजूर कर दिया था कि प्रवेश प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।
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कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अध्यादेश का मसौदा राज्यपाल को भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा, "इस अध्यादेश से उन छात्रों को राहत मिलेगी जो मराठा आरक्षण के तहत दाखिला ले चुके हें लेकिन अदालत द्वारा प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद प्रभावित हुए हैं। अब प्रवेश की तीसरा चरण शुरू होगा।"
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मंत्री ने कहा कि सामान्य वर्ग के जो छात्र प्रभावित होंगे वे निजी कॉलेजों में दाखिला की कोशिश कर सकते हैं और सरकार उनकी फीस का पुनर्भुगतान करेगी। पाटिल ने कहा कि सामान्य श्रेणी के छात्र प्रबंधन कोटा के तहत दाखिला लेने की कोशिश कर सकते हैं और सरकार उनकी मदद करेगी।
पाटिल के मुताबिक, राज्य सरकार दाखिले की समय सीमा 25 से 31 मई तक बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा, "हम मेडिकल पाठ्यक्रमों में अतिरिक्त 213 सीटें बढ़ाए जाने की मांग करेंगे," ।
मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर 21 मई को एक बैठक निर्धारित की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से आई मांगों को भी संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम अतिरिक्त सीटों पर भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।"