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Maharashtra: आपातकाल के दौरान जेल गए व्यक्तियों को मिलने वाली मानदेय राशि हुई दोगुनी, फडणवीस कैबिनेट का फैसला
Tue, 17 Jun 2025 05:09 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 17 Jun 2025 05:09 PM IST
सार
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने 1975 के आपातकाल के दौरान जेल गए व्यक्तियों को मिलने वाली मानदेय राशि में बढ़ोतरी की है। बता दें कि, फडणवीस सरकार ने ये योजना साल 2014-19 वाले कार्यकाल में शुरू की थी, जिसके तहत पात्र व्यक्तियों को पांच हजार की मानदेय राशि मिलती है। अब सरकार ने इसे दोगुना कर दिया है।
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देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए आपातकाल के दौरान राज्य में जेल में बंद व्यक्तियों को दिए जाने वाले मानदेय की राशि को दोगुना करने को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही फडणवीस कैबिनेट ने लाभार्थी के रूप में जेल में बंद व्यक्ति के जीवनसाथी का नाम जोड़ने का भी फैसला किया।
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'गौरव योजना' में बदलावों को मंजूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में चल रही 'गौरव योजना' में इन बदलावों को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत वर्तमान में दिए जाने वाले लाभों के तहत, आपातकाल (1975-1977) के दौरान एक महीने तक जेल में रहने वालों को 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जबकि इससे अधिक अवधि तक जेल में रहने वालों को 10,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ये राशि दोगुनी हो जाएगी।
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क्या है महाराष्ट्र सरकार का नियम?
मौजूदा नियम के अनुसार, अगर जेल में बंद व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को 2,500 रुपये (एक महीने या उससे कम की जेल अवधि के लिए) और 5,000 रुपये (एक महीने से अधिक की जेल अवधि के लिए) मासिक पेंशन दी जाती है। इस योजना की शुरुआत फडणवीस ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल (2014 से 2019 तक) के दौरान की थी। इस योजना के तहत पात्र लोगों को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर जिला कलेक्टरेट में आवेदन करना होता था, जिसकी जांच कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति करती थी।
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2020 में बंद हुई योजना, 2022 में फिर हुई शुरू
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 से आपातकाल लगाया था और 21 मार्च, 1977 तक लागू रहा। 2020 में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने पेंशन योजना को बंद कर दिया था, लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे-फडणवीस सरकार के सत्ता में आने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया।
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'गौरव योजना' में बदलावों को मंजूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में चल रही 'गौरव योजना' में इन बदलावों को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत वर्तमान में दिए जाने वाले लाभों के तहत, आपातकाल (1975-1977) के दौरान एक महीने तक जेल में रहने वालों को 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जबकि इससे अधिक अवधि तक जेल में रहने वालों को 10,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ये राशि दोगुनी हो जाएगी।
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क्या है महाराष्ट्र सरकार का नियम?
मौजूदा नियम के अनुसार, अगर जेल में बंद व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को 2,500 रुपये (एक महीने या उससे कम की जेल अवधि के लिए) और 5,000 रुपये (एक महीने से अधिक की जेल अवधि के लिए) मासिक पेंशन दी जाती है। इस योजना की शुरुआत फडणवीस ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल (2014 से 2019 तक) के दौरान की थी। इस योजना के तहत पात्र लोगों को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर जिला कलेक्टरेट में आवेदन करना होता था, जिसकी जांच कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति करती थी।
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2020 में बंद हुई योजना, 2022 में फिर हुई शुरू
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 से आपातकाल लगाया था और 21 मार्च, 1977 तक लागू रहा। 2020 में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने पेंशन योजना को बंद कर दिया था, लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे-फडणवीस सरकार के सत्ता में आने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया।
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