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महाराष्ट्र कैबिनेट: कुलपति चयन में राज्यपाल की शक्ति सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी, निकाय चुनाव पर लिया ये फैसला

Wed, 15 Dec 2021 09:57 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 15 Dec 2021 09:57 PM IST
सार

कई मौकों पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ हो चुकी तकरार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने विश्वविद्यालयों के कुलपति के चयन में राज्यपाल की शक्तियों को सीमित करने के लिए कदम उठाया है। इसके साथ ही केंद्र के तीन कृषि कानूनों के जवाब में लाए गए तीन कृषि विधेयकों की वापसी को भी मंजूरी दे दी गई है। वहीं, स्थानीय निकाय चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया गया है कि या तो ये चुनाव ओबीसी आरक्षण व्यवस्था के साथ हों या इन्हें फिलहाल स्थगित किया जाए।

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Maharashtra Cabinet approves proposal to curtail Governors power in Vice Chancellor selection and 3 farm bills to be withdrawn news in Hindi
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में राज्यपाल की शक्तियों को कम करने के लिए कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने यह फैसला राज्यपाल तो ऐसे विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद के लिए नामों की सिफारिश करने में राज्य सरकार की शक्तियां बढ़ाने के लिए लिया है।

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राज्यपाल राज्यों में विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है और एक समिति की सिफारिश पर कुलपति के लिए नियुक्तियां करता है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से इसे लेकर जारी एक बयान में कहा गया कि महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटी एक्ट 2016 को संशोधित किया जाएगा और कुलपति के पदों के लिए राज्यपाल को नामों की सिफारिश करने के लिए राज्य सरकार को शक्ति दी जाएगी।
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फिलहाल कुलपति की नियुक्ति के लिए नियम में है ये प्रावधान
इस अधिनियम के वर्तमान प्रावधान के अनुसार एक कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस समिति में कुलाधिपति के लिए नामित एक व्यक्ति जो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव और संसद के एक कानून द्वारा स्थापित राष्ट्रीय ख्याति के संस्थान के निदेशक या प्रमुख शामिल होते हैं।
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राज्यपाल कोश्यारी के साथ मधुर नहीं रहे हैं सरकार के संबंध
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के गठबंधन से बनी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ संबंध तल्ख ही रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सरकार और राज्यपाल कोश्यारी के बीच कई मौकों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। दोनों पक्षों के बीच में कई मौकों पर तकरार भी हुई है। 

ओबीसी आरक्षित सीटों पर निकाय चुनाव पर लिया ये फैसला
इसके अलावा कैबिनेट ने राज्य निर्वाचन आयोग से यह अनुरोध किया है कि स्थानीय निकायों के लिए ओबीसी आरक्षित सीटों पर चुनाव या तो ओबीसी कोटा के साथ आयोजित किए जाएं या फिर उन्हें तब तक के लिए स्थगित कर दिया जाए जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के आंकड़े नहीं एकत्र कर लेता।

कैबिनेट के इस फैसले से कुछ घंटे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षित 27 फीसदी सीटों को सामान्य के तौर पर अधिसूचित किया जाए और चुनावी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इसे लेकर कैबिनेट की बैठक के बाद राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि अगर निर्धारित समय पर स्थानीय निकाय चुनाव आयोजित करवाने हैं तो ये ओबीसी राजनीतिक आरक्षण व्यवस्था के साथ होने चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो इस स्थिति में ओबीसी डाटा एकत्र होने तक इन चुनावों को टाल देना चाहिए।

कृषि संबंधित तीन विधेयकों को भी वापस लेने की दी अनुमति
इसके साथ ही कैबिनेट ने केंद्र की ओर से लाए गए तीन कृषि नियमों के जवाब में लाए गए तीन विधेयकों को वापस लेने की अनुमति भी दे दी है। इन तीनों विधेयकों को इसी साल जुलाई में राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पेश किए गए थे। राज्य कैबिनेट से मंजूरी के बाद इस पर आगामी विधानसभा सत्र में फैसला लिया जाएगा, जो आगामी 22 दिसंबर से राजधानी मुंबई में शुरू होगा।


सुप्रिया सुले ने पूछा- क्या केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के गुमराह किया
एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने बुधवार को सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह बता कर गुमराह किया है कि 2011 सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) में एकत्र किया गया जनसंख्या डाटा गलत था। सुले ने कहा कि गृह मंत्रालयने संसदीय समिति को साल 2016 में बताया था कि एसईसीसी-2011 डाटा 98.87 फीसदी सही था। इससे एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें केंद्र को ओबीसी के एसईसीसी-2011 डाटा को सामने लाने का निर्देश देने की मांग की थी
 

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