What Next: महाराष्ट्र में भाजपा चार साल में 80 विधायकों को NDA में ला चुकी, अगले दो चुनावों में क्या होगा?
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विस्तार
महाराष्ट्र की सियासत में रविवार को बड़ा फेरबदल देखने को मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में फूट पड़ गई जब उनके एक बड़े नेता अजित पवार, एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हो गए। उन्हें राजभवन में पांचवीं बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। इस दौरान उनके साथ उनके समर्थक भी मौजूद रहे। उनके साथ ही छगन भुजबल समेत नौ विधायकों को भी मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। अजित का दावा है कि उनके पास चालीस विधायकों का समर्थन हासिल है। वहीं, एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार ने इस बगावत को लेकर कहा कि वह जनता के बीच जाकर पार्टी को फिर से खड़ा करेंगे।
इससे पहले शिवसेना में भी इसी तरह की फूट देखने को मिली थी। एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उनके चालीस विधायकों ने एनडीए सरकार को समर्थन दिया। इसके बाद शिंदे को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। ठीक उसी तरह अजित पवार भी अपने पास चालीस विधायक होने का दावा कर रहे हैं और असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी होने का दावा कर रहे हैं। शिंदे गुट ने भी खुद के असली शिवसेना होने का दावा किया था, जिसके बाद शिवसेना के दो हिस्से हो गए थे। आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव से पहले इस उलटफेर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा के पास 105 सीटें थीं
राज्य की विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं, जिसमें 145 सीटें जीतने वाली पार्टी बहुमत का आंकड़ा छू लेती है। अजित पवार के एनडीए में शामिल होने से पहले स्थिति कुछ इस तरह थी- भाजपा के 105 विधायक, शिवसेना के 40, शिवसेना (यूबीटी) के 16, एनसीपी की 53, कांग्रेस की 45 और अन्य 29। उससे पहले 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 122 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि शिवसेना (अविभाजति) ने 63 और एनसीपी ने 41 सीटें हासिल की थी। उस चुनाव में भाजपा और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़े थे। हालांकि बाद में शिवसेना भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई थी।
2019 में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ दिया था। भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर थे। ऐसे में अजित पवार का उसे समर्थन मिला और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनाए गए थे और अजित पवार उपमुख्यमंत्री। इसके पांच दिन के भीतर ही एनसीपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया था और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। फिर एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस ने मिलकर महा विकास अघाड़ी सरकार बना ली। इसमें अजित पवार भी उपमुख्यमंत्री बनाए गए। लेकिन शिंदे की बगावत के बाद यह सरकार भी गिर गई और शिंदे नई सरकार में मुख्यमंत्री बन गए।
पहले शिंदे 40 विधायकों के साथ आए
जून 2022 में उस वक्त सियासी उथल-पुथल मची थी, जब सत्ताधारी शिवसेना दो गुटों में विभाजित हो गई थी। शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायक बागी हो गए और पहले वो सूरत और फिर बाद में गुवाहाटी जाकर शिफ्ट हो गए। इस दौरान शिवसेना ने काफी बयानबाजियां की। शिवसेना सांसद संजय राउत ने यहां तक कह दिया था कि उन चालीस विधायकों के शव वापस महाराष्ट्र में आएंगे। हालांकि, बाद में उद्धव ठाकरे ने विधायकों से वापस आने की भावुक अपील की थी। लेकिन, बाद एकनाथ शिंदे के साथ चालीस विधायकों ने भी पाला बदल दिया और महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई। शिवसेना आधिकारिक रूप से दो हिस्सों में बंटी। इसके साथ ही भाजपा को 40 और सीटों का समर्थन मिल गया।
अब अजित पवार के साथ 40 विधायकों के एनडीए में आने की खबर
शरद पवार और अजित पवार के बीच काफी दिनों से संबंध ठीक नहीं चल रहे थे। शरद पवार ने 2 मई को अचानक ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके चौबीस घंटे तक खूब गहमा-गहमी रही, बाद में नेताओं के कहने पर पवार ने अपना इस्तीफा वापस भी ले लिया। हालांकि, तभी ये तय हो गया था शरद पार्टी में कुछ बड़ा करने वाले हैं। पार्टी के 25वें स्थापना दिवस समारोह पर शरद पवार ने दो कार्यकारी अध्यक्ष के नामों का एलान किया। सुप्रिया सुले को पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो प्रफुल्ल पटेल को उपाध्यक्ष। अजित पवार भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मांग रहे थे लेकिन उन्हें शरद पवार ने नजरअंदाज कर दिया। माना जा रहा है कि अजित ने इसी बात से खफा होकर बगावत का फैसला किया।आखिरकार, रविवार को शिवसेना के बाद राकांपा में फूट पड़ गई। अजित पवार एनडीए में शामिल हो गए। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही पवार ने यह भी दावा किया कि उनके साथ चालीस विधायक हैं। ऐसे में राकांपा के पास 53 विधायकों में से कुल 13 विधायक बचते हैं। वहीं, कांग्रेस के विधायकों की संख्या 45 है। ऐसे में अब कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी।
288 सदस्यों वाली विधानसभा में NDA के पास अब 185 विधायक
अजीत पवार का साथ मिलने के बाद अब एनडीए का कुनबा और मजूबत हो गया। भाजपा के पास अपने पहले 105 विधायक थे। बाद में एकनाथ शिंदे के साथ चालीस विधायक आए तो संख्या 145 तक पहुंच गई थी और बहुमत का आंकड़ा पार हुआ। अब अगर अजित के दावे के मुताबिक चालीस विधायक उनके साथ एनडीए का दामन थामते हैं तो यह संख्या 185 हो जाएगी।
दांव पर होंगी लोकसभा की 48 सीटें
महाराष्ट्र सरकार में भले ही अब दो-दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन कमान भाजपा के हाथ में ही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 23 सीटों पर सफलता हासिल की थी। इस लिहाल से यह राज्य भी लोकसभा सीटों के लिए भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था। तब इसने एकतरफा 48 लोकसभा सीटों में 41 पर जीत दर्ज की थी। भाजपा 2024 में इसी प्रदर्शन को दोहराना चाहेगी। लेकिन, यह इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे पहले सीटों के बंटवारे को देखना होगा। इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी।
अक्तूबर 2024 में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होगा
दूसरा, आगामी वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा। लोकसभा चुनावों के बाद राज्य की 288 सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा हर हाल में रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में रखना चाहती है। ऐसे में वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना चाहेगी, क्योंकि वह पहले उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना से भी नुकसान झेल चुकी है। इसमें भी सीटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा कि भाजपा किस तरह से आगे बढ़ती है। इसी साल मार्च में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने दावा किया था कि भाजपा और शिवसेना राज के अन्य घटक दलों के साथ गठबंधन में 48 लोकसभा सीटों और 288 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा और शिवसेना ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और मुख्यमंत्री शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच समन्वय में 200 सीटें जीतने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है।