Maharashtra: BJP प्रमुख ने कहा- उद्धव ठाकरे को हमेशा छोटा भाई समझा, कांग्रेस शिवसेना के गढ़ पर रख चुकी हाथ
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष बावनकुले नागपुर दौरे पर थे। यहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही शिवसेना के गढ़ रामटेक पर अपने हाथ रख चुकी है। रामटेक क्षेत्र का नेतृत्व पहले एकनाथ शिंदे कर चुके हैं।
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महाराष्ट्र भाजपा ने एक बार फिर विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा राज्य प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने शनिवार को शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए कहा कि वह अब ऐसी स्थिति में हैं कि अगर कांग्रेस और एनसीपी अगर उन्हें सिर्फ लोकसभा की दो सीट भी दे तो उन्हें स्वीकार करना पड़ेगा।
कांग्रेस ने शिवसेना के गढ़ पर रखा हाथ
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष बावनकुले नागपुर दौरे पर थे। यहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही शिवसेना के गढ़ रामटेक पर अपने हाथ रख चुकी है। रामटेक क्षेत्र का नेतृत्व पहले एकनाथ शिंदे कर चुके हैं। उद्धव के पास कांग्रेस और एनसीपी के अलावा कोई विकल्प नहीं है, उसे अगर दो सीट भी मिलती है तो उसे स्वीकार करना पड़ेगा। यही शिवसेना जब भाजपा के साथ थी, तब हम उन्हें अपना छोटा भाई मानते थे। भाजपा ने हमेशा उद्धव ठाकरे का जितना मन होता था, उतनी सीट दिया करते थे।
जानिए, सीट बंटवारे पर क्या बोली थी कांग्रेस
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने कहा था कि महाविकास अघाड़ी की पार्टियां अगर एक-साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो हम राज्य की 48 में से 40 सीटों को जीत सकते हैं। जिन सीटों पर कांग्रेस ने पहले चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन जहां उसका बहुत अच्छा आधार था, उसे एमवीए में सीट बंटवारे के सौदे के तहत पार्टी को दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले का कहना है कि कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि हम अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़े। पटोले का दावा है कि मोदी सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है। मोदी सरकार को हराने और देश को बचाने के लिए विपक्षी दल एक साथ चुनाव लड़ेंगे। केंद्र सरकार को शिंदे सरकार से जनता नाराज है।
पिछले लोकसभा चुनावों का जानिए हाल
2019 लोकसभा चुनावों में भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। भाजपा ने 25 में से 23 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि, शिवसेना ने 23 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज किया था। इसके अलावा एनसीपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 19 सीटों पर लड़ने वाली एनसीपी चार ही सीट जीत पाई थी। जबकि, कांग्रेस 25 सीटों में सिर्फ एक ही सीट जीत सकी।