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Maharashtra: जयकवाड़ी बांध टूटने से गांव की तरफ बहने लगी गोदावरी की धारा, लोगों को आवाजाही में हो रही परेशानी
Tue, 29 Aug 2023 01:42 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 29 Aug 2023 01:42 PM IST
सार
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर एक ने बताया कि जयकवाड़ी बांध के टूटने के बाद से इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से इसके बारे में कई बार बात की गई, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।
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Bhiw Dhanora village
- फोटो : Social Media
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विस्तार
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में जयकवाड़ी बांध टूटने के कारण भीव धनोरा गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बांध टूटने के कारण गोदावरी नदी की धारा भीम धनोरा गांव की तरफ बहने लगी, जिससे गांववालों को आवाजाही में मुसीबत बन गई। रोजाना 200-300 लोग नदी को पार कर अपने काम पर जाते हैं।
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर एक ने बताया कि जयकवाड़ी बांध के टूटने के बाद से इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने सरकार से इसके बारे में बहुत बार कहा, लेकिन उनके तरफ से कोई जवाब नहीं आया। बांध टूटने के कारण अब गांव दो भागों में बंट चुकी है, जिसका एक हिस्सा मुश्किलों का सामना कर रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं सरकार से फिर से अपील करता हूं कि वह हमें कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराएं। यहां करीब 50 से 60 बस्ती है जिसमें से रोजाना 200-300 लोग नदी पार कर यातायात करते हैं। प्रशासन इस मामले में कोई मदद नहीं कर रहा है।'
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गांव के जिला परिषद प्राथमिक शाला के हेडमास्टर ने मीडिया को बताया, 'किसान परिवार के छह बच्चे बस्ती से यहं पढ़ने आते हैं। स्कूल आने के लिए उन्हें रोज गोदावरी की धारा पार करना पड़ता है। बच्चे थर्माकॉल की कश्ती बनाकर रोजाना नदीं पर कर स्कूल जा रहे हैं।'
बच्चों के नदी पार कर स्कूल तक पहुंचने पर तहसीलदार सतीश सोनी ने कहा, 'जब गोदावरी नदीं जयकवाड़ी बांध का निर्माण हुआ था, तो बैकवाटर भिव धनोरा गांव में बहता था, इसलिए पूरे गांव को एक नए स्थान पर स्थानांतरित किया गया था। नए गांव में लोगों को नए घर भी दिए गए थे।'
उन्होंने बताया कि गांव वालों में सात-आठ परिवार ऐसे भी हैं जो गांव में न रहकर खेतों में रहते हैं क्योंकि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्त्रोत है। इन्हीं के बच्चे स्कूल जाने के लिए रोजाना थर्माकॉल की कश्ती के जरिए नदी को पार करते हैं।
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स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर एक ने बताया कि जयकवाड़ी बांध के टूटने के बाद से इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने सरकार से इसके बारे में बहुत बार कहा, लेकिन उनके तरफ से कोई जवाब नहीं आया। बांध टूटने के कारण अब गांव दो भागों में बंट चुकी है, जिसका एक हिस्सा मुश्किलों का सामना कर रहा है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'मैं सरकार से फिर से अपील करता हूं कि वह हमें कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराएं। यहां करीब 50 से 60 बस्ती है जिसमें से रोजाना 200-300 लोग नदी पार कर यातायात करते हैं। प्रशासन इस मामले में कोई मदद नहीं कर रहा है।'
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गांव के जिला परिषद प्राथमिक शाला के हेडमास्टर ने मीडिया को बताया, 'किसान परिवार के छह बच्चे बस्ती से यहं पढ़ने आते हैं। स्कूल आने के लिए उन्हें रोज गोदावरी की धारा पार करना पड़ता है। बच्चे थर्माकॉल की कश्ती बनाकर रोजाना नदीं पर कर स्कूल जा रहे हैं।'
#WATCH | Maharashtra: The government school students of Bhiw Dhanora village of Aurangabad district, cross the river by rowing thermocol raft every day to reach school. pic.twitter.com/gB79EZQVdw
— ANI (@ANI) August 29, 2023
बच्चों के नदी पार कर स्कूल तक पहुंचने पर तहसीलदार सतीश सोनी ने कहा, 'जब गोदावरी नदीं जयकवाड़ी बांध का निर्माण हुआ था, तो बैकवाटर भिव धनोरा गांव में बहता था, इसलिए पूरे गांव को एक नए स्थान पर स्थानांतरित किया गया था। नए गांव में लोगों को नए घर भी दिए गए थे।'
उन्होंने बताया कि गांव वालों में सात-आठ परिवार ऐसे भी हैं जो गांव में न रहकर खेतों में रहते हैं क्योंकि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्त्रोत है। इन्हीं के बच्चे स्कूल जाने के लिए रोजाना थर्माकॉल की कश्ती के जरिए नदी को पार करते हैं।