Politics: '...जाहिर है, कुछ लोग नाखुश हैं'; विभाग आवंटन के बाद विधायकों की नाराजगी पर बोले अजित पवार
महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय अपने पास रखा है। जबकि शिवसेना प्रमुख और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को शहरी विकास विभाग का जिम्मा मिला है। वहीं एनसीपी अध्यक्ष और डिप्टी सीएम अजित पवार के खाते में फिर से वित्त मंत्रालय आया है।
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महाराष्ट्र की महायुति सरकार में मंत्रियों के शपथ ग्रहण के एक हफ्ते बाद शनिवार को विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। इस बीच, डिप्टी सीएम अजित पवार ने मंत्रियों की अधिक संख्या को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने बारामती में कहा कि चूंकि इस बार मंत्रियों की संख्या अधिक है, इसलिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रत्येक मंत्री को एक विभाग देना पड़ा है। जाहिर है, इससे कुछ लोग खुश हैं और कुछ खुश नहीं भी हैं।
अपने निर्वाचन क्षेत्र बारामती में एक रोड शो के दौरान राकांपा प्रमुख अजित पवार ने कहा कि अब जबकि विभागों की जिम्मेदारी बांट दी गई है ऐसे में लंबित परियोजनाओं पर काम जल्द ही शुरू होगा। उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल में केवल छह राज्य मंत्री शामिल हैं, जबकि बाकी 36 कैबिनेट मंत्री हैं। बीती सरकार में भी वित्त मंत्रालय संभालने वाले अजित पवार ने कहा कि वह सोमवार को कार्यालय का कार्यभार संभालेंगे।
इस दौरान अजित पवार ने यह भी कहा कि कई मंत्री विभाग आवंटित किए जाने के बाद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र तीन मार्च को मुंबई में शुरू होगा। डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि 20 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद कई परियोजनाओं पर काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। पवार ने आगे कहा कि हमें लंबित परियोजनाओं के संबंध में कई पत्र मिले थे। अब जल्द ही काम शुरू होगा।
बता दें कि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय अपने पास रखा है। जबकि शिवसेना प्रमुख और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को शहरी विकास विभाग का जिम्मा मिला है। वहीं एनसीपी अध्यक्ष और डिप्टी सीएम अजित पवार के खाते में फिर से वित्त मंत्रालय आया है।
किसे-कौन सा विभाग मिला?
- देवेंद्र फडणवीस - गृह मंत्रालय, कानून एवं न्यायपालिका मंत्रालय
- एकनाथ शिंदे - शहरी विकास एवं आवास और लोक निर्माण विभाग
- अजित पवार - वित्त मंत्रालय, योजना और आबकारी विभाग
- चंद्रशेखर बावनकुले - राजस्व विभाग
- राधाकृष्ण विखे पाटील - जल संसाधन (गोदावरी, कृष्णा घाटी विकास निगम)
- हसन मुश्रीफ - चिकित्सा शिक्षा विभाग
- चंद्रकांत बच्चू पाटील - उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, संसदीय मामले
- गिरीश महाजन- जल संसाधन (विदर्भ, तापी, कोंकण विकास निगम), आपदा प्रबंधन विभाग
- गणेश नाइक - वन विभाग
- गुलाबराव पाटील - जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग
- दादा भुसे - स्कूल शिक्षा विभाग
- संजय राठौड़ - मृदा एवं जल संरक्षण
- धनंजय मुंडे - खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण
- मंगल प्रभात लोढ़ा - कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार
- उदय सामंत - उद्योग, मराठी भाषा
- जयकुमार रावल - विपणन, प्रोटोकॉल
- पकंजा मुंडे - पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, पशुपालन
- अतुल सावे - ओबीसी कल्याण, डेयरी विकास और नवीकरणीय ऊर्जा
- अशोक उइके - जनजातीय विकास
- शंभूराज देसाई- पर्यटन, खनन, पूर्व सैनिक कल्याण
- आशीष शेलार - सूचना प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक मामले
- दत्तात्रेय भरणे - खेल एवं युवा कल्याण, अल्पसंख्यक विकास और औकाफ
- अदिति तटकरे - महिला एवं बाल विकास विभाग
- शिवेंद्रसिंह भोसले - सार्वजनिक कार्य (सार्वजनिक उद्यमों को छोड़कर)
ये विधायक बनाए गए हैं राज्यमंत्री
राज्यमंत्रियों में माधुरी मिसाल को शहर विकास, परिवहन, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक विकास और चिकित्सा शिक्षा विभाग, आशीष जायसवाल को वित्त, योजना. विधि व न्याय विभाग, मेघना बोर्डिकर को सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण और जलापूर्ति, इंद्रनील नाइक को उच्च व तकनीकी शिक्षा, पर्यटन और आदिवासी विभाग, योगेश कदम को गृह विभाग (शहर), पंकज भोयर को गृह विभाग (ग्रामीण), शिक्षा, आवास विभाग का प्रभार सौंपा गया।
15 दिसंबर को राज्य की कैबिनेट का विस्तार
महाराष्ट्र में इससे पहले 15 दिसंबर को राज्य की कैबिनेट का विस्तार किया गया था। इस दौरान महायुति के घटक दलों (भाजपा, शिवसेना, एनसीपी) के कुल 39 विधायकों ने मंत्री और राज्यमंत्री पद की शपथ ली थी। जिसमें भाजपा के 19 विधायक मंत्री बने थे, इसमें तीन महिलाएं शामिल थी। शिवसेना के कोटे से 11 विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। जबकि एनसीपी (अजित) कोटे के नौ विधायक मंत्री बने थे, इसमें एक महिला शामिल थी।