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Maharashtra: नासिक में कोर्ट का अनोखा फैसला, मारपीट के दोषी को दिन में पांच बार नमाज पढ़ने की सजा दी

Wed, 01 Mar 2023 03:02 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Wed, 01 Mar 2023 03:02 PM IST
सार

30 साल के रऊफ खान पर 2010 के एक मामले में एक व्यक्ति पर कथित तौर पर हमला करने और सड़क दुर्घटना के विवाद में उसे चोट पहुंचाने के आरोप लगा था। इस मामले में अदालत ने उसे दोषी ठहराया।

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Maha: Court orders brawl case convict to plant trees, offer Namaz 5 times daily instead of imprisonment
अदालत का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

महाराष्ट्र के नासिक जिले की अदालत का एक अनोखा फैसला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मारपीट के एक दोषी को कोर्ट ने जेल भेजने की बजाय ऐसी सजा दी, जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो गया। कोर्ट ने दोषी को 21 दिनों तक हर रोज दो पेड़ लगाने और दिन में पांच बार नमाज अदा करने का आदेश दिया है। मारपीट के आरोप में दोषी पाया गया युवक मुस्लिम है। यही कारण है कि उसे दिन में पांच बार नमाज अदा करने को भी कहा गया है। 
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मजिस्ट्रेट तेजवंत सिंह संधू ने 27 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों में एक मजिस्ट्रेट को यह अधिकार दिया है कि वह किसी दोषी को चेतावनी या उचित चेतावनी देकर रिहा कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह अपराध नहीं दोहराता है। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में केवल चेतावनी ही काफी नहीं होगी और यह महत्वपूर्ण है कि दोषी अपनी दोषसिद्धि को याद रखे ताकि वह इसे न दोहराए।
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कोर्ट ने आदेश में और क्या कहा? 
कोर्ट के आदेश में कहा गया है, 'मेरे अनुसार, उचित चेतावनी देने का मतलब यह समझना है कि अपराध किया गया था। आरोपी को दोषी साबित कर दिया गया है और वह इसे याद रखे ताकि वह फिर से अपराध न दोहराए।'
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क्या था मामला? 
30 साल के रऊफ खान पर 2010 के एक मामले में एक व्यक्ति पर कथित तौर पर हमला करने और सड़क दुर्घटना के विवाद में उसे चोट पहुंचाने के आरोप लगा था। इस मामले में अदालत ने उसे दोषी ठहराया। सुनवाई के दौरान खान ने कहा था कि वह नियमित नमाज नहीं पढ़ते हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 28 फरवरी से शुरू होकर 21 दिनों तक दिन में पांच बार नमाज अदा करने, सोनापुरा मस्जिद परिसर में दो पेड़ लगाने और पेड़ों की देखभाल करने का आदेश दिया। 


खान पर आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 325 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने खान को आईपीसी की धारा 323 के तहत दोषी ठहराया और उन्हें अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
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