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तमिलनाडु: एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे वाले मामले पर विधानसभा अध्यक्ष का फैसला बरकरार, हाईकोर्ट ने क्या कहा?
Tue, 13 Oct 2026 12:11 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, चेन्नई, तमिलनाडु
एएनआई, चेन्नई, तमिलनाडु
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:11 PM IST
सार
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें एआईएडीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। ये विधायक टीवीके पार्टी में शामिल हो गए थे। विधायकों ने अपना पक्ष रखा है।
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मद्रास हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एआईएडीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे वाले मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उन्होंने एआईएडीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए थे। ये विधायक तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे। इनमें मरागथम कुमारवेल, सत्यभामा, इसाक्की सुब्बैया, जयकुमार, एमआर विजयभास्कर और सी विजयभास्कर शामिल हैं।
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मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने एआईएडीएमके के व्हिप एग्री एसएस कृष्णमूर्ति द्वारा स्पीकर के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। ये इस्तीफे 26 मई से 29 जून, 2026 के बीच स्वीकार किए गए थे।
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खंडपीठ ने क्या फैसला सुनाया?
पीठ ने माना कि स्वीकृति संवैधानिक रूप से वैध थी और व्यापक जांच की कोई आवश्यकता नहीं थी। पीठ ने यह भी फैसला सुनाया कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही जारी रह सकती है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने के बावजूद उचित जांच के बिना इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। अयोग्यता याचिका इस आरोप पर दायर की गई थी कि छह विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए तमिलगा वेट्ट्री कजगम (टीवीके) सरकार के समर्थन में मतदान किया था।
इससे पहले, विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने एआईएडीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसी को लेकर एआईएडीएमके के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और नेशनल पीपुल्स पावर पार्टी के नेता रवि ने स्पीकर के उनके इस्तीफे स्वीकार करने के आदेश को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुलमुरुगन की पीठ ने इन मामलों की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने कोई सार्थक जांच नहीं की और राज्यपाल से विधायकों की खरीद-फरोख्त के संबंध में की गई शिकायत का भी हवाला दिया।
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बागी विधायकों ने क्या तर्क दिया?
दूसरी ओर, इस्तीफा देने वाले विधायकों ने तर्क दिया कि इस्तीफा देना और किसी अन्य पार्टी में शामिल होना लोकतांत्रिक राजनीति है।विधानसभा सचिव के पक्ष ने यह तर्क दिया कि यदि विधायक स्वेच्छा से त्यागपत्र देते हैं, तो अध्यक्ष इसे स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते। इसी बीच, एआईएडीएमके के पूर्व विधायक मरागथम कुमारवेल (मदुरंथकम) और पी सत्यभामा (धरपुरम) के जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी में शामिल होने के लिए इस्तीफा देने के बाद मदुरंथकम और धरपुरम विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। चुनाव आयोग के अनुसार, टीवीके उम्मीदवार पी सत्यभामा ने धरपुरम विधानसभा उपचुनाव में 66,841 वोटों से जीत हासिल की, और मदुरंथकम में टीवीके उम्मीदवार के मरगथम कुमारवेल विजयी हुए। दोनों ने टीवीके के सीटी चिन्ह पर दोबारा चुनाव लड़ा और डीएमके और एआईएडीएमके के विपक्षी उम्मीदवारों पर भारी बहुमत से अपनी सीटें बरकरार रखीं।
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मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने एआईएडीएमके के व्हिप एग्री एसएस कृष्णमूर्ति द्वारा स्पीकर के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। ये इस्तीफे 26 मई से 29 जून, 2026 के बीच स्वीकार किए गए थे।
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खंडपीठ ने क्या फैसला सुनाया?
पीठ ने माना कि स्वीकृति संवैधानिक रूप से वैध थी और व्यापक जांच की कोई आवश्यकता नहीं थी। पीठ ने यह भी फैसला सुनाया कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही जारी रह सकती है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने के बावजूद उचित जांच के बिना इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। अयोग्यता याचिका इस आरोप पर दायर की गई थी कि छह विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए तमिलगा वेट्ट्री कजगम (टीवीके) सरकार के समर्थन में मतदान किया था।
इससे पहले, विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने एआईएडीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसी को लेकर एआईएडीएमके के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और नेशनल पीपुल्स पावर पार्टी के नेता रवि ने स्पीकर के उनके इस्तीफे स्वीकार करने के आदेश को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुलमुरुगन की पीठ ने इन मामलों की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने कोई सार्थक जांच नहीं की और राज्यपाल से विधायकों की खरीद-फरोख्त के संबंध में की गई शिकायत का भी हवाला दिया।
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बागी विधायकों ने क्या तर्क दिया?
दूसरी ओर, इस्तीफा देने वाले विधायकों ने तर्क दिया कि इस्तीफा देना और किसी अन्य पार्टी में शामिल होना लोकतांत्रिक राजनीति है।विधानसभा सचिव के पक्ष ने यह तर्क दिया कि यदि विधायक स्वेच्छा से त्यागपत्र देते हैं, तो अध्यक्ष इसे स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते। इसी बीच, एआईएडीएमके के पूर्व विधायक मरागथम कुमारवेल (मदुरंथकम) और पी सत्यभामा (धरपुरम) के जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी में शामिल होने के लिए इस्तीफा देने के बाद मदुरंथकम और धरपुरम विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। चुनाव आयोग के अनुसार, टीवीके उम्मीदवार पी सत्यभामा ने धरपुरम विधानसभा उपचुनाव में 66,841 वोटों से जीत हासिल की, और मदुरंथकम में टीवीके उम्मीदवार के मरगथम कुमारवेल विजयी हुए। दोनों ने टीवीके के सीटी चिन्ह पर दोबारा चुनाव लड़ा और डीएमके और एआईएडीएमके के विपक्षी उम्मीदवारों पर भारी बहुमत से अपनी सीटें बरकरार रखीं।