मद्रास हाईकोर्ट: स्टालिन सरकार की खिंचाई, चेस ओलंपियाड विज्ञापनों में राष्ट्रपति-पीएम फोटो न होने का मामला
चेन्नई में 44वें चेस ओलंपियाड की शुरुआत गुरुवार (28 जुलाई) को हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका आधिकारिक उद्घाटन किया। इस दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एके स्टालिन और दिग्गज अभिनेता रजनीकांत समारोह में मौजूद रहे।
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मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और जस्टिस एस अनंती की पीठ ने राष्ट्रपति और पीएम की तस्वीर न इस्तेमाल करने को लेकर प्रदेश सरकार के कारणों को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय हितों और सुप्रीम कोर्ट के सामान्य हितों के मामले में दिए निर्देशों पर विचार करते हुए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भले ही राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे गणमान्य व्यक्ति किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए आमंत्रण स्वीकार करें या नहीं, विज्ञापनों में उनकी तस्वीरें होनी चाहिए क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पीठ मदुरई के आर राजेश कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई रह कर रही है। याचिका में 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच मामल्लानपुरम में हो रहे 44वें चेस ओलंपियाड के विज्ञापनों और प्रमोशन गतिविधियों में केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की तस्वीरों के इस्तेमाल को गैरकानूनी, मनमाना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करार देने की मांग की थी। साथ प्रदेश सरकार को विज्ञापनों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की फोटो का इस्तेमाल करने का निर्देश देने की अपील की थी।
इससे पहले चेन्नई में 44वें चेस ओलंपियाड की शुरुआत गुरुवार (28 जुलाई) को हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका आधिकारिक उद्घाटन किया। इस दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एके स्टालिन और दिग्गज अभिनेता रजनीकांत समारोह में मौजूद रहे। स्टालिन ने प्रधानमंत्री का स्वागत प्रतीक चिन्ह्र देकर किया। दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने प्रधानमंत्री को चेस ओलंपियाड टॉर्च सौंपी।
भाजपा बहुत अनुशासित पार्टी
तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के अन्नामलाई ने कहा कि हम कभी भी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पोस्टर पर कुछ भी बोलने की सलाह नहीं देते क्योंकि हम बहुत अनुशासित पार्टी हैं। वहीं, कुछ नेता केंद्र सरकार के योगदान पर अपनी सही भावनाओं के साथ ऐसा करते हैं; शतरंज ओलंपियाड2022 को भारत लाने में पीएम मोदी की अहम भूमिका थी।
आगे उन्होंने कहा कि यह आज मदुरै पीठ के एचसी के फैसले से सही साबित हुआ, जिसने बहुत स्पष्ट आदेश भी दिया है। मुझे उम्मीद है कि तमिलनाडु सरकार अगली बार इसमें शामिल नहीं होगी और ऐसे मामलों का राजनीतिकरण नहीं करेगी।
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