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बीफ खाना अपराध नहीं : मद्रास हाईकोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 26 Mar 2016 09:44 PM IST
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बीफ को लेकर मचे बवाल केबीच मद्रास हाईकोर्ट ने यह साफ किया है कि बीफ खाना अपराध नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई कानून वजूद में नहीं है जिसने विभिन्न धर्मों के खाने-पीने की आदत(फूड हैबिट) मसले को छूआ हो।
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न्यायमूर्ति एस मणिकुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है।
साथ ही खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की उस दलील को भी खारिज कर दिया है जिसमें तमिलनाडु के डिंडिगुल स्थित पलानी मंदिर केआसपास मुस्लिम और अन्य समुदाय केलोगों की दुकानों को हटाने की गुहार की गई थी। याचिकाकर्ता के. गोपीनाथ का कहना था कि इन दुकानों में बीफ परोसी जाती है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और इससे सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
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पेशे से वकील याचिकाकर्ता की दलील थी कि कई दिनों तक उपवास रखने केबाद श्रद्धालू पलानी मंदिर पहाड़ी के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को बहुत परेशानी होती है जब वे मंदिर की संपत्तियों पर बने उन दुकानों से होकर गुजरते हैं, जहां बीफ परोसी जाती है। याचिका में यह भी कहा गया था कि लोग पलानी हिल्स की सीढ़ियों पर बैठकर बीफ या अन्य मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं। इससे हिन्दुओं की भावनाएं आहत होती हैं। अगर इस पर रोक न लगाई गई तो वह सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसा करना भारतीय दंड संहिता केतहत अपराध है। लेकिन खंडपीठ ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई प्रमाण नहीं दिया जो यह साबित करता हो कि मंदिर की संपत्तियों को इस्लाम और दूसरे धर्मों के लोगों ने कब्जा जमा रखा है।