मद्रास हाईकोर्ट : संस्था आधारित आरक्षण के लिए फिर से लिखना पड़ेगा संविधान
कुछ याचिकाओं में निजी और अल्पसंख्यक संस्थाओं को भी आरक्षण के दायरे में शामिल करने की मांग की गई।
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मद्रास हाईकोर्ट की प्रथम पीठ ने बृहस्पतिवार को हैरानी जताते हुए पूछा, क्यों न सिर्फ सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को मेडिकल कोर्स में 7.5 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान को फिर से लिखा जाए। पीठ ने कहा, शिक्षण संस्था आधारित आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए संविधान को पुन: लिखने की जरूरत पड़ेगी। अब इस मामले में 17 मार्च को सुनवाई होगी।
सरकारी स्कूल के छात्रों को आरक्षण देने संबंधी पूर्व की एआईएडीएमके सरकार के एक कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती की पीठ ने मौखिक रूप से यह टिप्पणी की।
कुछ याचिकाओं में इस प्रावधान की वैधता पर सवाल उठाया गया तो कुछ याचिकाओं में छात्रों को इसका फायदा देने की बात कही गई। कुछ याचिकाओं में निजी और अल्पसंख्यक संस्थाओं को भी आरक्षण के दायरे में शामिल करने की मांग की गई।
कार्ति को 10 साल के लिए पासपोर्ट जारी करने का हाईकोर्ट का निर्देश
मद्रास हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय पासपोर्ट प्राधिकरण (आरपीए) को निर्देश दिया है कि सिवागंगा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे कार्ति चिदंबरम को 10 वर्ष की वैधता के साथ पासपोर्ट जारी किया जाए। जस्टिस एम गोविंदाराजा ने कार्ति की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिए हैं। याचिका में आरपीए के आठ अप्रैल, 2021 और 24 अगस्त, 2021 के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है। अदालत ने अतिरिक्त पृष्ठों के साथ 10 साल के लिए पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।