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कोर्ट की लताड़ के बावजूद क्या केंद्र की आंखों का तारा बना रहेगा 'चुनाव आयोग', क्या पूर्व सीईसी बन पाएंगे राज्यपाल!

Tue, 27 Apr 2021 06:37 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 27 Apr 2021 06:37 PM IST
सार

आरटीआई कंसलटेंट सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार को फौरन चुनाव आयुक्तों को उनके पद से हटा देना चाहिए। अदालत की कठोर टिप्पणी का मतलब यही निकलता है। साथ ही पूर्व चुनाव आयुक्त को पोस्ट रिटायरमेंट पद न दिया जाए...

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Madras High Court Chief Justice Sanjeev Banerjee said murder charges should be filed against the Election Commission officials. This institution is responsible for the second wave of Corona
चुनाव आयोग की प्रेसवार्ता - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर, जिसने देश में तबाही मचा रखी है, उसी दौरान मद्रास हाईकोर्ट का एक अहम फैसला आया है। सोमवार को हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को इस बात के लिए कड़ी लताड़ लगाई कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर उभरने के दौरान राजनीतिक दलों को चुनावी रैलियों की अनुमति दे दी गई। मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोपों पर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। यही संस्था कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है।

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आरटीआई कंसलटेंट सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि अब यह देखने वाली बात होगी कि अदालत की लताड़ लगने के बाद भी क्या 'चुनाव आयोग' केंद्र सरकार की आंखों का तारा बना रहेगा। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, जिन्हें गोवा का राज्यपाल बनाने की खबरें सुनाई पड़ रही हैं, क्या मद्रास हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद उनकी नियुक्ति ठंडे बस्ते में चली जाएगी। क्या केंद्र सरकार, सार्वजनिक तौर पर यह बयान जारी कर सकेगी कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पोस्ट रिटायरमेंट पद नहीं मिलेगा।
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सुभाष चंद्र अग्रवाल बताते हैं, मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी बहुत गंभीर है। अभी तक चुनाव आयोग क्या कर रहा था। क्या वह किसी के दबाव में था। देश में एक तरफ कोरोना संक्रमण की वजह से लाशों के ढेर लग रहे थे, तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में जमकर चुनावी रैलियां और रोड शो आयोजित होते रहे। केंद्र सरकार को फौरन चुनाव आयुक्तों को उनके पद से हटा देना चाहिए। अदालत की कठोर टिप्पणी का मतलब यही निकलता है। साथ ही पूर्व चुनाव आयुक्त को पोस्ट रिटायरमेंट पद न दिया जाए। हैरानी की बात है कि हाईकोर्ट को चेतावनी भरे लहजे में कहना पड़ा, अगर दो मई को चुनाव आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए उचित योजना नहीं बनाई तो मतगणना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी।
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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'लोगों का स्वास्थ्य सबसे अहम है। यह चिंताजनक है कि संवैधानिक अधिकारियों को ऐसी बातें याद दिलानी पड़ती हैं। जब कोई शख्स जीवित रहेगा तभी वह अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का लाभ उठा सकेगा। स्थिति अब अस्तित्व और सुरक्षा की है। इसके बाद सब कुछ आता है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने कहा था, क्या आप किसी अन्य ग्रह पर थे जब चुनावी रैलियां आयोजित की गई थीं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले में सोमवार को कहा था कि चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की 'संवैधानिक बाध्यता है जो उसे पूरा करना होता' है। एक संवाददाता सम्मेलन में नड्डा ने कहा, भाजपा ने निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों और स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकॉल का पालन किया है।

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