{"_id":"659fe25b359e95c80c0ecd99","slug":"madras-high-court-aiadmk-symbol-flag-o-paneerselvam-plea-dismissed-2024-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"AIADMK: मद्रास हाईकोर्ट में पन्नीरसेल्वम की याचिका खारिज; अन्नाद्रमुक के चुनाव चिह्न और झंडे पर दावे का मामला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
AIADMK: मद्रास हाईकोर्ट में पन्नीरसेल्वम की याचिका खारिज; अन्नाद्रमुक के चुनाव चिह्न और झंडे पर दावे का मामला
Thu, 11 Jan 2024 06:13 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 11 Jan 2024 06:13 PM IST
सार
अन्नाद्रमुक (AIADMK) नेता ओ पन्नीरसेल्वम को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पन्नीरसेल्वम ने मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि पन्नीरसेल्वम एआईएडीएमके के चुनाव चिह्न और झंडे का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
विज्ञापन
मद्रास हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमिलनाडु के बड़े राजनीतिक दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) के चुनाव चिह्न और पार्टी के झंडे का इस्तेमाल करने के मामले में पार्टी के निष्कासित नेता ओ पनीरसेल्वम को मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील करने वाले पन्नीरसेल्वम को अदालत ने पहले भी उन्हें आधिकारिक लेटरहेड और ध्वज का उपयोग करने से रोक दिया था। हाईकोर्ट ने उन्हें AIADMK के चुनाव चिह्न- 'दो पत्तियों' के इस्तेमाल की इजाजत भी नहीं दी थी।
मद्रास उच्च न्यायालय में गुरुवार को न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने पनीरसेल्वम की तरफ से दायर तीन अपीलों को खारिज कर दिया। हालांकि, पीठ ने पनीरसेल्वम को एकल पीठ में दोबारा अपील करने की स्वतंत्रता भी दी। दो जजों की खंडपीठ ने साफ किया कि दोबारा आवेदन दाखिल करने पर एकल न्यायाधीश गुण-दोष और कानून के अनुसार विचार कर उचित आदेश पारित कर सकते हैं। बता दें कि पन्नीरसेल्वम ने 7 नवंबर, 2023 को पारित एकल पीठ आदेश के खिलाफ अपील की थी।
हाईकोर्ट की एकल पीठ का आदेश एआईएडीएमके महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी की तरफ से दायर याचिका पर आया था। न्यायमूर्ति एन सतीशकुमार ने नवंबर, 2023 में अंतरिम आदेश पारित किया था। पनीरसेल्वम ने इस आदेश के खिलाफ दो जजों की पीठ में अपील की। इस पर खंडपीठ ने कहा, 'हम अपीलकर्ता पन्नीरसेल्वम के साथ-साथ प्रतिवादी (पलानीस्वामी) के तर्कों के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं करेंगे। एकल पीठ के न्यायाधीश ने 30 नवंबर, 2023 तक अंतरिम रोक लगाई थी।'
विज्ञापन
खंडपीठ ने गुरुवार को पारित आदेश में कहा, सामान्य प्रक्रिया में याचिकाकर्ता के आवेदनों पर 30 नवंबर 2023 को फिर से सूचीबद्ध किया जाना था। हालांकि, इसके बावजूद अंतरिम आदेश के खिलाफ एकल पीठ में दोबारा अपील करने का विकल्प खुला रहेगा। माना जाता है कि मौजूदा मामले में एकल पीठ के न्यायाधीश ने कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। सीमित अवधि के लिए केवल अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) लगाई गई है।
विज्ञापन
मद्रास उच्च न्यायालय में गुरुवार को न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने पनीरसेल्वम की तरफ से दायर तीन अपीलों को खारिज कर दिया। हालांकि, पीठ ने पनीरसेल्वम को एकल पीठ में दोबारा अपील करने की स्वतंत्रता भी दी। दो जजों की खंडपीठ ने साफ किया कि दोबारा आवेदन दाखिल करने पर एकल न्यायाधीश गुण-दोष और कानून के अनुसार विचार कर उचित आदेश पारित कर सकते हैं। बता दें कि पन्नीरसेल्वम ने 7 नवंबर, 2023 को पारित एकल पीठ आदेश के खिलाफ अपील की थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट की एकल पीठ का आदेश एआईएडीएमके महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी की तरफ से दायर याचिका पर आया था। न्यायमूर्ति एन सतीशकुमार ने नवंबर, 2023 में अंतरिम आदेश पारित किया था। पनीरसेल्वम ने इस आदेश के खिलाफ दो जजों की पीठ में अपील की। इस पर खंडपीठ ने कहा, 'हम अपीलकर्ता पन्नीरसेल्वम के साथ-साथ प्रतिवादी (पलानीस्वामी) के तर्कों के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं करेंगे। एकल पीठ के न्यायाधीश ने 30 नवंबर, 2023 तक अंतरिम रोक लगाई थी।'
विज्ञापन
खंडपीठ ने गुरुवार को पारित आदेश में कहा, सामान्य प्रक्रिया में याचिकाकर्ता के आवेदनों पर 30 नवंबर 2023 को फिर से सूचीबद्ध किया जाना था। हालांकि, इसके बावजूद अंतरिम आदेश के खिलाफ एकल पीठ में दोबारा अपील करने का विकल्प खुला रहेगा। माना जाता है कि मौजूदा मामले में एकल पीठ के न्यायाधीश ने कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। सीमित अवधि के लिए केवल अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) लगाई गई है।