देशभर की मेडिकल सीटों में ओबीसी आरक्षण पर फैसले के लिए समिति बनाने का निर्देश
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मद्रास हाईकोर्ट ने मेडिकल दाखिले के लिए तमिलनाडु द्वारा सरेंडर की गई अखिल भारतीय सीटों (एआईक्यू) में ओबीसी आरक्षण देने के मुद्दे पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस समिति में केंद्र, राज्य और भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिए और इसका गठन तीन महीने में हो जाना चाहिए।
जस्टिस एपी साही और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की फर्स्ट बेंच ने यह भी साफ किया कि समिति द्वारा लिया जाने वाला कोई भी फैसला अगले शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगा। पीठ ने कहा कि एआईक्यू में ओबीसी आरक्षण देने में कोई भी कानूनी रुकावट नहीं है और यह बात भारतीय चिकित्सा परिषद ने भी स्वीकार की है।
Madras High Court directs Centre to form a panel comprising Tamil Nadu officers to formulate the method of implementation of OBC (Other Backward Class) reservation in All India Quota medical seats. pic.twitter.com/cSejnrDXIl
— ANI (@ANI) July 27, 2020
पीठ ने कहा कि वह आरक्षण देने के लिए कोई सकारात्मक आदेश पारित नहीं कर रहा है क्योंकि कोर्ट सरकार की नीतिगत मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है जब तक किसी का मौलिक अधिकार प्रभावित न हो। पीठ ने यह भी साफ किया कि आरक्षण कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है।
पीठ ने यह आदेश तमिलनाडु सरकार, डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके और अन्य राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर दिया। याचिकाओं में मेडिकल दाखिले के लिए एआईक्यू सीटों में ओबीसी आरक्षण न देने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।
याचिकाओं का निपटारा करते हुए पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को मेडिकल दाखिले के लिए एआईक्यू सीटों में ओबीसी आरक्षण देने के लिए कोई भी कानून बनाने का विकल्प खुला हुआ है।