MP Polls: वोट प्रतिशत और महिलाओं की लंबी लाइनों से क्यों भाजपा-कांग्रेस खुश, सबके अपने-अपने दावे; जानें सब कुछ
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि 2018 में आए जनादेश के दौरान भी मध्य प्रदेश का मत प्रतिशत 75.5 के करीब था। ऐसे में शुक्रवार शाम 5 बजे तक 71 फीसदी से ज्यादा हुआ मतदान इस बात की तस्दीक करता है कि वोटरों ने 2018 में हुए चुनाव के परिणाम और उसके बाद बदले सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही मतदान किया है।
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मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत और महिलाओं की लगी हुई लंबी-लंबी कतारें क्या वास्तव में भारतीय जनता पार्टी के लिए तीन दिसंबर को बड़ी खुशखबरी लाने वाली हैं। कम से कम भारतीय जनता पार्टी के नेता तो इस प्रतिशत और महिलाओं की इन लाइनों से फिलहाल उत्साहित ही नजर आ रहे हैं। वहीं इस प्रतिशत के साथ महिलाओं की लाइनों को देखकर कांग्रेस के नेता भी लगातार इस बात की बयानबाजी कर रहे हैं कि यह लाइन और वोट प्रतिशत बदलाव के लिए ही लगी हैं। हालांकि सियासी विश्लेषकों का मानना है कि 2018 में आए जनादेश के दौरान भी मध्य प्रदेश का मत प्रतिशत 75.5 के करीब था। ऐसे में शुक्रवार शाम 5 बजे तक 71 फीसदी से ज्यादा हुआ मतदान इस बात की तस्दीक करता है कि वोटरों ने 2018 में हुए चुनाव के परिणाम और उसके बाद बदले सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही मतदान किया है।
मध्य प्रदेश में मतदान का प्रतिशत शाम 5 बजे तक 71 फीसदी से ज्यादा हो चुका था। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अमित सोनी कहते हैं कि मतदान के इस प्रतिशत के साथ दोनों पार्टियां बहुत खुश नजर आ रही हैं। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को लग रहा है कि महिलाओं की पोलिंग स्टेशंस के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइन लाडली बहना योजना और महिलाओं की अन्य योजनाओं की बदौलत लगी है। वह कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का यह सोचना बिल्कुल गलत भी नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने इस विधानसभा के चुनाव में जो रणनीति तैयारी की थी वह 2018 में आए स्पष्ट जनादेश को ध्यान में रखकर ही की थी। अमित स्पष्ट करते हैं कि 2018 में भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश में जनादेश नहीं मिला था। यह बात दीगर है कि सियासी उठा पटक के चलते भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई थी।
मध्य प्रदेश चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में 75.5 फ़ीसदी मतदान हुआ था। 2013 में 71 फ़ीसदी के करीब मतदान हुआ था। वरिष्ठ पत्रकार और सियासी जानकार देवेंद्र चौहान कहते हैं कि जब 2018 में ज्यादा मतदान हुआ तो भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश की जनता ने सत्ता से बेदखल होने का जनादेश दे दिया था। हालांकि बाद में सियासी तौर पर हुई उठा पटक में मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को फिर से सरकार बनी। वह कहते हैं कि अमूमन ऐसी सियासी परिस्थितियों में ठीक 5 साल बाद होने वाले विधानसभा के चुनावों में वोट प्रतिशत बहुत मायने रखता है। राजनीतिक विश्लेषक देवेंद्र कहते हैं कि 2013 में हुए मतदान प्रतिशत 2008 की तुलना में ज्यादा था। हालांकि तब भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार रिपीट हुई थी और ज्यादा मतदान सरकार बनाने के लिए ही हुआ था।
सियासी जानकारों का मानना है कि जिन परिस्थितियों में मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक हुई थी उसका असर भी आने वाले चुनावों के मतदान में दिखता है। क्योंकि इस बार शाम 5 बजे तक 71 फ़ीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। फाइनल मतदान का प्रतिशत तो अभी आना बाकी है लेकिन अनुमान यही लगाया जा रहा है कि इस बार भी वोट प्रतिशत 75 फ़ीसदी के आसपास ही होगा। यानी कि मध्य प्रदेश की जनता ने इस बार फिर से 2018 की तरह ही जमकर मतदान किया है।
सियासी जानकारों का कहना है कि अब इसी मतदान का भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपने-अपने लिहाज से आकलन कर रही है। राजनीतिक विश्लेषक रविशंकर रघुवंशी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने 2018 में मिले जनादेश के बाद सरकार तो बना ली लेकिन पार्टी ने जिस तरीके की योजनाओं को लेकर काम किया वह यह बताता है कि जनादेश के बाद सियासी उठा पटक में मिली कुर्सी को उन्होंने बेहतर तरीके का मौका मानकर सजाया संवारा है। रघुवंशी कहते हैं 2018 और 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की योजनाएं और भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पूरी तरीके से बदली हुई नजर आई।
हालांकि कांग्रेस ने भी हुए सत्ता परिवर्तन के बाद के दौर में मजबूती से सियासी फील्डिंग सजाई और 2018 के मिले जनादेश के बाद हुई सियासी उठा पटक को जनता के बीच में जमकर प्रचारित और प्रसारित भी किया। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी जहां अपनी योजनाओं के बलबूते महिलाओं की लाइन और बड़े प्रतिशत पर अपनी जीत की दावेदारी ठोंक रही है। वहीं कांग्रेस इसको बदलाव और 2018 के बाद हुई सियासी उठा पटक का बदला लेने के लिए निकली हुई जनता की आवाज बता रही है।
मध्य प्रदेश में हुए मतदान के बाद कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता ने शुक्रवार को यहां फैले कुशासन को समाप्त करने और जनहित की सरकार बनाने की स्थापना के लिए वोट किया है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को गिरे एक-एक वोट से नए मध्य प्रदेश का निर्माण होना तय है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया कहते हैं कि मध्य प्रदेश में महिलाओं की लाइन इस बात का इशारा कर रही थी कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज मामा की योजनाएं न सिर्फ महिलाओं को मजबूत कर रही है बल्कि उनको आत्मनिर्भर भी बना रही है। गौरव भाटिया कहते हैं कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। उनका तर्क है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने राज्य में प्रत्येक व्यक्ति के उत्थान के लिए काम किया है।