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जल्द शुरू हो सकती है मशीन टू मशीन संवाद सेवा, ट्राई की सिफारिशों पर आज फैसला

Fri, 31 Aug 2018 05:25 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Updated Fri, 31 Aug 2018 05:25 AM IST
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Machine to machine communication service may start soon
प्रतीकात्मक तस्वीर

मशीन टू मशीन (एम2एम) संवाद को शुक्रवार को हरी झंडी मिल सकती है। टेलीकॉम आयोग इस तकनीक पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेगा, जिसमें स्मार्ट मीटर, ग्रिड, वाटर सिस्टम, यातायात और स्मार्ट स्वास्थ्य जैसी सेवाओं का रास्ता साफ हो जाएगा।

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दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक, एम2एम सिम कार्ड का इस्तेमाल ऑटोमेटेड मशीनों में दुनियाभर में किया जाता है। एमटूएम कार्ड का प्रयोग उन मशीनों में होता है, जो नेटवर्क कनेक्टिविटी पर चलती हैं। छोटे गैजेट्स से लेकर बड़ी मशीनों तक में इनका इस्तेमाल होता है। इन मशीनों को काम करने के लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। 
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क्या है मशीन टू मशीन संवाद सेवा 

उदाहरण के तौर पर अगर स्मार्ट फ्रिज होगा, तो निर्धारित मात्रा से दूध कम होने की स्थिति में वह स्वयं ही दुकानदार के मोबाइल पर संदेश भेज देगा। इसके अलावा, स्मार्ट मीटर बिल बताने के अलावा बहुत सी जानकारियां दे सकता है, जैसे आपके यहां बिजली की खपत का पैटर्न क्या है, यानी कब कितनी बिजली खर्च हो रही है और उसकी रियल टाइम कीमत क्या है। इसी तरह, स्मार्ट ग्रिड खामियों की स्वत: जानकारी देगी या दुर्घटना की आशंका से सचेत करेगी। इसके अलावा, स्मार्ट वाटर सिस्टम, यातायात सहित तमाम सुविधाएं होंगी, जिनका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा।  
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रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

ट्राई ने एम2एम को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों का एक समूह बनाने की सिफारिश की है। दरअसल, इस तकनीक से रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से कुशल लोगों की मांग बढ़ेगी। सरकार का मकसद इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) उद्योग को 2020 तक 15 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है। ऐसे में टेलीकॉम आयोग द्वारा ट्राई की सिफारिशों को मंजूर किया जाना लगभग तय है।

एम2एम को हरी झंडी मिलने पर उसके मानक तय किए जाएंगे। ट्राई ने सितंबर, 2017 में इस पर अपनी सिफारिशें जारी की थीं। इसके बाद दूरसंचार विभाग ने विभिन्न सेवा प्रदाताओं को 13 अंकों के एम2एम नंबर आवंटित कर दिए, जिनके सिम उत्पाद बनाने वालों और सामान्य ग्राहकों को अक्तूबर में मुहैया कराए जाएंगे। मंत्रालय ने कंपनियों को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पहले चरण में 50 लाख नंबर आवंटित किए हैं।


दुनियाभर में हो रहा इस्तेमाल 

अमेरिका, जापान, चीन, जर्मनी और इंग्लैंड में एम2एम का प्रयोग दुनिया में सर्वाधिक होता है। जबकि स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, अमेरिका और इटली इसके शोध में काफी आगे हैं। देश में भी इस तकनीक के तेजी से बढ़ने की उम्मीद सरकार को है। 

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