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Air Pollution: दुनिया में पहली बार वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों में मिला कैंसर, अध्ययन में हुआ खुलासा

Fri, 07 Apr 2023 06:20 AM IST
वीरेंद्र शर्मा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Fri, 07 Apr 2023 06:20 AM IST
सार

कोरोना महामारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार रहे प्रो. के विजयराघवन ने कहा कि यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति तैयार करने में मार्गदर्शन करेगा। इस अध्ययन के जरिये वायु प्रदूषकों से फेफड़े के एडेनो कार्सिनोमा को बढ़ावा देने का गहराई से पता चला है।

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Lung cancer found for the first time in the world due to air pollution
कैंसर सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

दुनिया में पहली बार पीएम 2.5 और फेफड़ों के कैंसर के बीच संबंध पता चला है, जिसके अनुसार कभी धूम्रपान न करने वालों के फेफड़ों में कैंसर के म्यूटेशन पाए गए हैं। अमेरिका, यूरोप, ताइवान, कोरिया और भारत सहित अलग-अलग देशों में वायु प्रदूषण और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर यह अध्ययन हुआ है।
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कोरोना महामारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार रहे प्रो. के विजयराघवन ने कहा कि यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति तैयार करने में मार्गदर्शन करेगा। इस अध्ययन के जरिये वायु प्रदूषकों से फेफड़े के एडेनो कार्सिनोमा को बढ़ावा देने का गहराई से पता चला है। चूहों और इन्सानों पर अलग-अलग अध्ययन करने के बाद यह परिणाम सामने आए हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति पहल के लिए प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
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द नेचर जर्नल के कवर पेज पर दिल्ली के प्रदूषण की तस्वीर
द नेचर मेडिकल जर्नल में वैज्ञानिकों का यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है, जिसके कवर पेज पर दिल्ली के वायु प्रदूषण की तस्वीर प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन में फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूसीएल कैंसर रिसर्च यूके के मुख्य चिकित्सक प्रो.चार्ल्स स्वैंटन ने शोध में पाया कि हवा में पीएम 2.5 के संपर्क में आने से फेफड़ों में उन कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा मिलता है, जिनमें कैंसर पैदा करने वाले म्यूटेशन होते हैं। वायु प्रदूषित शहरों में रहने वाले चार लाख से भी ज्यादा लोगों पर हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पीएम 2.5 के उच्च स्तर वाले क्षेत्रों में अन्य प्रकार के कैंसर की उच्च दर भी पाई है।
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10 में से एक को प्रदूषण के चलते कैंसर
वैज्ञानिकों के अनुसार, धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर के लिए सबसे बड़ा कारण है, लेकिन ब्रिटेन में फेफड़ों का कैंसर उन 10 में से एक व्यक्ति में मिला है जो वायु प्रदूषण में सबसे अधिक रहते हैं। ब्रिटेन में हर साल फेफड़ों के कैंसर से करीब छह हजार लोगों की मौत हो रही है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। इससे पहले, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2019 में जारी एक रिपोर्ट में कहा था कि दुनियाभर में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली तीन लाख मौत के लिए पीएम 2.5 जिम्मेदार है।

यह जानकारी भी मिली
प्रो. विजयराघवन के मुताबिक, यह अध्ययन इसलिए भी अहम है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने महामारी विज्ञान और तीन प्री क्लीनिकल मॉडल के आधार पर तथ्यों का विश्लेषण किया है। प्रो. विजयराघवन ने बताया कि वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में फेफड़े के कैंसर की जांच की जिसे एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर (ईजीएफआर) म्यूटेंट लंग कैंसर कहा जाता है। जिन लोगों ने कभी धूम्रपान नहीं किया उनमें ईजीएफआर जीन में उत्परिवर्तन मिला जो आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर में पाया जाता है। 


इन्सानों के बाल से छोटे कण
वैज्ञानिकों ने कहा है कि पीएम2.5 के प्रदूषित कण इन्सानों के बाल की चौड़ाई से तीन फीसदी छोटे होते हैं। सांस के जरिये जब फेफड़ों में पहुंचते हैं तो कैंसर का रूप धारण कर लेता है।
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