लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह बोले: युद्धक इंजीनियर बड़े पैमाने पर बना रहे सुरंगें, गोला-बारूद भंडारण में मिलेगी मदद
भारतीय सेना के इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह को रविवार को इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स की ओर से एक प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने सेना में युद्धक इंजीनियरों के कार्यों का उल्लेख किया और बताया कि हमारी इंजीनियरिंग क्षमताओं में लगातार इजाफा हो रहा है।
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अग्रिम इलाकों में रक्षा बलों के लिए परमाणु शक्तियों से लैस सुविधाएं उपलब्ध कराने और गोला-बारूद के भंडारण के लिए सुरंगों का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सेना के युद्धक इंजीनियरों को आधुनिक उपकरण और नई प्रौद्योगिकियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह जानकारी सेना के इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने रविवार को दी। वह इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के एक समारोह में बोल रहे थे। यहां उन्हें रक्षा बलों और सीमा सड़क संगठन में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए 'एमिनेंट इंजीनियरिंग पर्सनैलिटी अवार्ड' से सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि युद्धक इंजीनियर सड़क संपर्क को अग्रिम इलाकों तक पहुंचा रहे हैं। स्थानीय समुदायों और गावों को भी इससे जोड़ा जा रहा है, जिन्हें प्रधानमंत्री के 'गति शक्ति' प्रयासों के साथ हमारी योजना में वेपॉइंट के रूप में शामिल किया गया है। माइक्रो टनलिंग (छोटी सुरंगें बनाना) समय की मांग है। सेना और वायु सेना के लिए गोला-बारूद भंडारण के लिए सुरंगों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सेना की जमीनी क्षमताओं को और बेहतर करने के लिए अग्रिम इलाकों में परमाणु शक्तियों से लैस केंद्रों का निर्माण भी किया जा रहा है।
बीआरओ से मिल रही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मदद
कार्यक्रम के दौरान इंजीनियर इन चीफ ने इन कार्यों के दौरान सामने आईं विभिन्न समस्याओं और कैसे उनका समाधान ढूंढा गया, आदि बातें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि हमारी रणनीतिक पहुंच के हिस्से के रूप में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) न केवल सीमाओं पर बल्कि पड़ोसी देशों में भी रणनीतिक सड़क निर्माण में मदद कर रहा है। सड़कों, सुरंगों और पुलों का दोहरे उपयोग वाला बीआरओ की ओर से तैयार किया गया इन्फ्रास्ट्रक्चर न केवल हमारी रणनीतिक जरूरतों के लिए अहम है बल्कि सुदूर सीमावर्ती स्थानों के साथ-साथ समुदायों के विकास की दिशा में ताकत बढ़ाने वाला है।
युवा प्रतिभाओं और इंजीनियरों के लिए इंटर्नशिप का मौका
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत हम युवाओं प्रतिभाओं और इंजीनियरों को हमारे पुणे स्थित कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इनोवेटिव रिसर्च इंटर्नशिप करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। एक छोटे समय काल में ही इसने देश का पहला नैनो मैटीरियल, सिलिकन नैनो ट्यूब और ग्राफीन आधारित कंक्रीट रहित सीमेंत तैयार की है और नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया है। उन्होंने कहा कि हमारी इंजीनियरिंग क्षमताओं में लगातार इजाफा हो रहा है और यह देश की सीमाओं व आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।