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Lok Sabha Election 2024: बड़ा चुनावी मुद्दा बना महिला उत्पीड़न, कई दलों पर लगा यह 'दाग'
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Lok Sabha Election 2024
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
इस चुनावी महाभारत को जीतने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं पर बड़ा दांव लगाया है। हर दल ने सत्ता पाने पर महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शुरू करने का दावा किया है। लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि यह चुनाव बेटियों की इज्जत पर भारी पड़ा है। इसी चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, जनता दल सेक्युलर और तृणमूल कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों के नेताओं पर महिला उत्पीड़न करने के आरोप लगे। रेवन्ना कांड और संदेशखाली कांड ने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया। लेकिन लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने नेताओं पर लगे आरोपों को दूसरे दलों की साजिश करार दिया, तो दूसरे दलों को महिलाओं के सम्मान-सुरक्षा की उपेक्षा करने वाला बताया।
भाजपा पर आरोप
इस चुनाव में सबसे चर्चित मामला प्रज्ज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल का रहा। जनता दल (सेक्युलर) के हासन लोकसभा सीट से प्रत्याशी प्रज्ज्वल रेवन्ना के सेक्स टेप ने कर्नाटक की राजनीति में भूचाल ला दिया। भाजपा के साथ गठबंधन होने के कारण वह भी इस मामले में विपक्ष के निशाने पर आ गई। कांग्रेस ने भाजपा पर सेक्स स्कैंडल के आरोपी का साथ देने का आरोप लगाया। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने तुरंत अपनी पार्टी के महिला शक्ति के साथ खड़े होने की बात कही। भाजपा ने रेवन्ना का मामला अब तक दबाए रखने और हजारों महिलाओं के अपराधी रेवन्ना को विदेश भाग जाने के लिए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी हमला बोला। रेवन्ना कांड का कर्नाटक में चुनाव पर क्या असर हुआ, यह देखने वाली बात होगी।
कांग्रेस भी घिरी
कांग्रेस ने मणिपुर में महिलाओं के साथ हिंसा होने और बृजभूषण शरण सिंह के द्वारा महिला खिलाड़ियों का उत्पीड़न करने के मामले में भी भाजपा को घेरा है। भाजपा को इसके कारण भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन कांग्रेस भी महिला उत्पीड़न के मामले में बराबर घिरी हुई है। कांग्रेस की पूर्व नेता राधिका खेड़ा ने अपनी ही पार्टी के छत्तीसगढ़ के नेताओं पर पार्टी के ही रायपुर कार्यालय में उनका उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न की जानकारी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश सहित कई बड़े नेताओं को इसकी जानकारी दी, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी और उन्हें न्याय नहीं दिलाया। अंत में राधिका खेड़ा ने भाजपा ज्वाइन कर लिया।
ममता बनर्जी पर भारी संदेशखाली
ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अभी भी सबसे मजबूत खिलाड़ी बनी हुई हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेता शाहजहां शेख के ऊपर संदेशखाली की अनेक महिलाओं से जबरदस्ती शारीरिक संबंध स्थापित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। भाजपा ने इस मामले को बेहद मजबूती के साथ उठाया और ममता बनर्जी के राज में उन्हीं की पार्टी के नेताओं के द्वारा महिलाओं का उत्पीड़न होने का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया है। लेकिन माना जा रहा है कि ममता बनर्जी को संदेशखाली कांड के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्वाति मालीवाल विवाद में घिरे केजरीवाल
आम आदमी पार्टी भी महिला उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिर गई है। पार्टी की ही राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित तौर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में मुख्यमंत्री के पीए बिभव कुमार के द्वारा मारपीट की गई है। स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के इशारे पर उनसे हिंसा किए जाने का आरोप लगाया है। लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया है। वहीं, भाजपा ने कहा है कि यह आम आदमी पार्टी का आंतरिक मामला है। भाजपा का कहना है कि जो केजरीवाल अपनी ही पार्टी की महिला सांसद को न्याय नहीं दे सकते, वे दिल्ली की महिलाओं के साथ क्या न्याय करेंगे।
क्यों हो रहा उत्पीड़न?
राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि सच्चाई यह है कि महिला सशक्तीकरण के मामले में कागजी कार्रवाई ज्यादा हो रही है, जबकि असलियत में कोई काम नहीं हो रहा है। पुरुष आज भी महिलाओं को अपने बराबर मानने को तैयार नहीं हो रहे। राजनीतिक दलों के अंदर भी महिला उत्पीड़न की सेल नहीं बन रही। जहां महिला उत्पीड़न सेल बने हैं, वे प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे। इसका बड़ा असर यह है कि आज भी हर मंच पर महिलाओं का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी दलों को एक साथ आकर इस समस्या का हल निकालना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि हर घर में बेटी है और यदि सही सिस्टम नहीं बनेगा तो हर बेटी महिला उत्पीड़न के दायरे में रहेगी।
महिला उत्पीड़न पर साथ आएं सभी दल
सामाजिक महिला अधिकार कार्यकर्ता अंबर जैदी ने अमर उजाला से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल भी इस समस्या को सुलझाने के प्रति गंभीर नहीं हैं। अपनी पार्टी का मामला आते ही महिला नेता भी पीड़ित की बजाय अपनी पार्टी लाइन के अनुसार बयान देती हैं। उन्हें लगता है कि महिला उत्पीड़न के मामले में सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए, इसके बाद ही महिलाओं को उत्पीड़न से बचाया जा सकता है।