अध्ययन: कीमतों के कारण LPG से दूर हो रहे कम आय वाले परिवार, 41% गरीब अब भी लकड़ी-कोयला जलाकर पका रहे भोजन
यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवेलपमेंट (यूएसएड) समर्थित क्लीनर एयर एंड बेटर हेल्थ के अध्ययन में बताया गया है कि देश में निम्न आय वर्ग के 41 फीसदी लोग अब भी खाना पकाने में कोयला व लकड़ी जैसे ज्यादा प्रदूषण करने वाले ईंधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का सिलेंडर जैसे-जैसे महंगा हो रहा है, निम्न आय वर्ग के लोग इससे दूरी बनाने लगे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवेलपमेंट (यूएसएड) समर्थित क्लीनर एयर एंड बेटर हेल्थ के अध्ययन में बताया गया है कि देश में निम्न आय वर्ग के 41 फीसदी लोग अब भी खाना पकाने में कोयला व लकड़ी जैसे ज्यादा प्रदूषण करने वाले ईंधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह हालात तब है, जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 9.59 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन सिलेंडर को फिर से भरवाने की बढ़ती कीमत के चलते ज्यादातर घरों में ये सिलिंडर खाली पड़े हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस) के आंकड़ों के मुताबिक निम्न आय वर्ग के लिए एलपीजी की कीमत बड़ा मुद्दा है। अध्ययन में सामने आया कि देश में सबसे ज्यादा झारखंड में 67.8 फीसदी परिवार ठोस ईंधन का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में सबसे कम 0.8 फीसदी लोग ही ठोस ईंधन इस्तेमाल करते हैं।
छोटे सिलिंडरों की उपलब्धता बढ़े
सर्वे के मुताबिक इस वर्ग के ज्यादातर लोग घरेलू प्रदूषण के बारे में भी नहीं जानते हैं। यदि जानते तो वे ठोस ईंधन से बचने के लिए और ज्यादा प्रयास करते। कई लोग सिलेंडर की आसान उपलब्धता भी चाहते हैं। अध्ययन के मुताबिक निम्न आय वर्ग के परिवारों में एलपीजी के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए स्थानीय आपूर्ति व शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही 5 किलो के सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए।