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एनपीएस योजना में अर्धसैनिक बलों को ‘करोड़ों का नुकसान’

Mon, 04 Dec 2017 01:32 AM IST
एजेंसी / नई दिल्ली
एजेंसी / नई दिल्ली Updated Mon, 04 Dec 2017 01:32 AM IST
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'Loss of crores' to paramilitary forces in NPS scheme
प्रतीकात्मक तस्वीर
सीमा पर दुश्मनों और देश के अंदर नक्सलियों से मुकाबला करने वाले अर्धसैनिक बल के कर्मचारियों को 2004 के बाद से सेवानिवृत्ति कोष में पांच करोड़ रुपये से अधिक का ‘बड़ा’ नुकसान झेलना पड़ रहा है। अर्धसैनिक बल कर्मियों की आर्थिक स्थिति के बारे में हुए एक अध्ययन के आधार पर यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक, वर्ष 2004 में सरकार के नियमित पेंशन बंद कर उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत लाए जाने के बाद, ये नुकसान हुआ है।
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अर्धसैनिक बल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अध्ययन के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को एनपीएस प्रणाली के अंतर्गत लाए जाने से ‘उल्लेखनीय नुकसान’ हुआ है। ऐसा जवानों को दुर्गम इलाकों में चुनौतीपूर्ण काम करने के बावजूद आम नागरिकों के साथ इस योजना में जोड़े जाने के कारण हुआ है।
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(5,18,36,567 रुपये) से अधिक का नुकसान हुआ

'Loss of crores' to paramilitary forces in NPS scheme
अर्धसैनिक बल
बल और पूर्व सीएपीएफ जवानों के संघ पिछले कई साल से अपने कार्य की परिस्थितियों को लेकर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग करते रहे हैं। अध्ययन के अनुसार, पुरानी और नई पेंशन योजना की गणितीय गणना में यह बात निकलकर सामने आई कि ‘बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के एक कांस्टेबल को केंद्र सरकार के अन्य कर्मचारी या सीआईएसएफ या असम राइफल्स के कांस्टेबल के 60 साल के होने के बाद महज तीन वर्ष के अंतर में पांच करोड़ रुपये (5,18,36,567 रुपये) से अधिक का नुकसान हुआ।’

 बीएसएफ के सेकेंड इन कमांड रैंक के अधिकारी नीरज लखनपाल ने बल के ‘इंस्टीट्यूट फॉर बार्डर मैनेजमेंट एंड स्ट्रैटिजिक स्टडीज’ के अपने कार्यकाल के दौरान यह अध्ययन किया। इन बलों के जवान और कुछ अधिकारी 57 साल की आयु में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। केवल सीआईएसएफ और असम राइफल्स के जवान 60 की उम्र में रिटायर होते हैं। 
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