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लॉर्ड रामी रेंजर बोले: UNSC में भारत को दी जाए स्थायी सदस्यता; दुनिया में अधिक स्थिरता के लिए यह जरूरी
Thu, 24 Oct 2024 02:35 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 24 Oct 2024 02:35 AM IST
सार
लॉर्ड रामी रेंजर बोले: हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक भारतीय मूल के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने बुधवार कहा कि दुनिया में अधिक स्थिरता लाने के लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जगह की आवश्यकता है।
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लॉर्ड रामी रेंजर
- फोटो : एक्स@RamiRanger
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विस्तार
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक भारतीय मूल के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को शामिल करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में अधिक स्थिरता लाने के लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जगह की आवश्यकता है। उन्होंने ये भी कहा कि लड़ाई अतीत की बात हो गई है और अगर कोई प्रगति करना चाहता है तो उसे शांतिप्रिय होना चाहिए। बता दें कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पैनल चर्चा के दौरान उन्होंने कहा।
दुनिया में चल रहे संघर्षो का दिया हवाला
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रामी रेंजर ने दुनिया में चल रहे संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के एक कोने में लड़ाई होती है। इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ यूके-भारत, यूके-यूएसए, यूके-कनाडा, यूके-ऑस्ट्रेलिया, यूके-जर्मनी, यूके-जापान, सब कुछ नहीं है। भारत सबसे बड़े बाजारों में से एक की पेशकश कर रहा है जो प्रति वर्ष 6-7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो बहुत बड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे अधिक आबादी वाला देश और बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के नाते, "भारत शांति, स्थिरता के लिए उत्प्रेरक होगा और यदि आप प्रगति करना चाहते हैं, तो आपको शांतिप्रिय होना होगा।
यू.के. हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य ने कहा कि भारत के बारे में सुंबसे सुंदर बात यह है कि हम सभी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं, जो हमारे शासन के केंद्र में कानून का शासन है। उन्होंने कहा इसलिए लोगों को भारत के साथ व्यापार करते समय अपनी पीठ नहीं देखनी पड़ती। जैसा कि उन्हें चीन के साथ व्यापार करते समय अपनी पीठ देखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी दुनिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद का दावा
अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में नवीनतम घटनाक्रम को सकारात्मक घटनाक्रम बताया, लेकिन यथास्थिति बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा इसलिए हमने अभी पहला कदम उठाया है, लेकिन हमें थोड़ा और गहराई में जाकर सीमा मुद्दे को सुलझाना होगा और हम इसे एक बार में नहीं सुलझा सकते। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त और पीछे हटने के भारत-चीन समझौते का समर्थन किया और विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्रों को पुनर्जीवित करने के निर्देश जारी किए।
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दुनिया में चल रहे संघर्षो का दिया हवाला
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रामी रेंजर ने दुनिया में चल रहे संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के एक कोने में लड़ाई होती है। इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ यूके-भारत, यूके-यूएसए, यूके-कनाडा, यूके-ऑस्ट्रेलिया, यूके-जर्मनी, यूके-जापान, सब कुछ नहीं है। भारत सबसे बड़े बाजारों में से एक की पेशकश कर रहा है जो प्रति वर्ष 6-7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो बहुत बड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे अधिक आबादी वाला देश और बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के नाते, "भारत शांति, स्थिरता के लिए उत्प्रेरक होगा और यदि आप प्रगति करना चाहते हैं, तो आपको शांतिप्रिय होना होगा।
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यू.के. हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य ने कहा कि भारत के बारे में सुंबसे सुंदर बात यह है कि हम सभी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं, जो हमारे शासन के केंद्र में कानून का शासन है। उन्होंने कहा इसलिए लोगों को भारत के साथ व्यापार करते समय अपनी पीठ नहीं देखनी पड़ती। जैसा कि उन्हें चीन के साथ व्यापार करते समय अपनी पीठ देखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी दुनिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद का दावा
अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में नवीनतम घटनाक्रम को सकारात्मक घटनाक्रम बताया, लेकिन यथास्थिति बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा इसलिए हमने अभी पहला कदम उठाया है, लेकिन हमें थोड़ा और गहराई में जाकर सीमा मुद्दे को सुलझाना होगा और हम इसे एक बार में नहीं सुलझा सकते। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त और पीछे हटने के भारत-चीन समझौते का समर्थन किया और विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्रों को पुनर्जीवित करने के निर्देश जारी किए।