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तीन तलाक बिल पर मचा हंगामा, सुमित्रा महाजन-मीरा कुमार की परंपरा को कैसे आगे बढ़ाएंगे स्पीकर ओम बिड़ला

Fri, 21 Jun 2019 04:27 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Fri, 21 Jun 2019 04:27 PM IST
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Lok Sabha Speaker Om Birla have to enhance tradition of Sumitra Mahajan, Meira Kumar
लोकसभा अध्यक्ष, ओम बिड़ला - फोटो : PTI

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश कर दिया। अपेक्षा के अनुरूप बिल के सदन में पेश होने के समय लोकसभा में खूब हंगामा हुआ। ऐसे में नव नियुक्त लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला बार-बार स्थिति को कंट्रोल करते नजर आये। सदस्यों के द्वारा टोका-टाकी न रुकने के बाद भी वे सांसदों को संयमित करते ही दिखे। हालांकि, इसके बाद भी सदन में सदस्यों के द्वारा बातचीत जारी रहने पर वे कुछ नाखुश नजर आये। अंततः वे खड़े होकर सांसदों को सदन को नियमों के मुताबिक चलाने की बात कहने लगे। यानी उन्होंने स्पीकर के रूप में दिखाने की कोशिश की कि वे सदन को नियमों के अनुरूप ही चलाएंगे।

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इस शुरुआती अनुभव के बाद देखना होगा कि अपने से पहले स्पीकर रही सुमित्रा महाजन और मीरा कुमार की परंपरा को वे कैसे आगे बढ़ाते हैं क्योंकि इन दोनों महिला स्पीकरों ने अपने कामकाज से इस पद को बड़ी गरिमा प्रदान की है और कुशलता से सदन को संचालित किया है। जाहिर है कि ऐसे में उनके कामकाज की तुलना उनसे जरूर होगी और बिड़ला पहले बिल के समय ही इस चुनौती से निबटते दिखाई पड़े। 

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पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन अपना पद संभालने के समय आठवीं बार सदन के सदस्य के रूप में चुनी जा चुकीं थीं। यानी एक लोकसभा सांसद के रूप में काम करने का उनके पास बड़ा अनुभव था। सदन को संचालित करते समय वे जिस शांत भाव से सदस्यों से बातचीत करती थीं, वह उनके शांत व्यवहार और सादगी का प्रमाण था। यही कारण था कि वे सदन को काफी बेहतर ढंग से संचालित कर पाती थीं। उनके सौम्य व्यवहार का ही प्रभाव था कि एक-दो अवसरों पर जब वे कुछ कठोर हुईं, तब भी सांसद उनकी बात को अन्यथा नहीं लेते थे। तीन तलाक जैसे विषयों पर विपक्ष के द्वारा मचाये गये हंगामों के दौरान भी वे बहुत संयत रहती थी और आपा नहीं खोती थीं। 

‘बैठ जाइये’ बन चुका था मीरा कुमार की पहचान


कांग्रेस नेता मीरा कुमार को देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है। स्पीकर के रूप में उनकी नियुक्ति होने के पहले वे चार बार लोकसभा सांसद बन (कुल पांच बार) चुकी थीं। यानी संसद का उन्हें अच्छा अनुभव प्राप्त हो चुका था। वे मनमोहन सिंह सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री भी रह चुकी थीं। इस तरह उनके पास सरकार में रहकर एक मंत्री के रूप में काम करने का भी अच्छा अनुभव था। 

उनके सौम्य व्यवहार की विपक्ष भी तारीफ करता था। किसी सदस्य के द्वारा सदन में कोई अवरोध उत्पन्न करने पर वे उसे बैठने की सलाह जिस ‘बैठ जाइये, बैठ जाइये’ के अंदाज में देती थीं, वह उनकी पहचान बन गया था। तमाम हंगामों के बीच भी वे अहम बिल पास करवा लेती थीं और यह उनकी काम करने की क्षमता का ही प्रमाण था। नव निर्वाचित लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के सामने इन दो बड़ी नेताओं के द्वारा स्थापित की जा चुकी परंपरा को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। 

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