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डॉ. महेश शर्मा के 40 रुपये में प्रसव कराने के दावे पर स्पीकर की टिप्पणी पर जमकर लगे ठहाके
Mon, 29 Jul 2019 08:29 PM IST
अमर शर्मा
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 29 Jul 2019 08:29 PM IST
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पूर्व केंद्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग बिल पर चर्चा के दौरान स्पीकर ओम बिरला की पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा को दी गई सलाह पर जम कर ठहाके लगे। दरअसल इस दौरान डॉ. शर्मा में महज 40 रुपये में एक महिला का प्रसव कराने का दावा किया। इस पर स्पीकर ने ऐसा न बोलने की हिदायत देते हुए कहा कि उनके अस्पताल में भीड़ संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसी दौरान सांसद गौरव गोगोई ने जब पूर्वोत्तर की महिलाओं को उनके ही अस्पताल में भेजने की बात कही तो डॉ. शर्मा ने कहा कि उन्होंने कोई चैरिटेबल अस्पताल नहीं खोल रखा।
दरअसल इस बिल पर चर्चा के दौरान डॉ. शर्मा ने डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर डाक्टरों में जबर्दस्त मानवीय भावना होती है। इसी दौरान उन्होंने अपने कैलाश अस्पताल का वाकया सुनाया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व उनके अस्पताल में एक दंपति और कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो रही थी। महिला गर्भवती थी और उसे प्रसव कराना था। मगर उनके पास जरूरी 2000 रुपये नहीं थे। डॉ. शर्मा के मुताबिक उस दंपति ने उन्हें बताया कि उनके पास महज 55 रुपये हैं। फिर महिला का वहीं प्रसव कराया गया और उन्होंने उक्त महिला को 55 में से 15 रुपये वापस कर दिये।
इस पर स्पीकर बिरला ने कहा यहां ऐसा मत बोलिये। ऐसा सुन कर लोग आपके अस्पताल पहुंचने लगेंगे। फिर भीड़ संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसी बीच कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनके गृह राज्य असम के कई लोग एम्स में इलाज कराने आते हैं। इनमें से कई को यहां दाखिला नहीं मिलता। अगर डॉ. शर्मा कहें तो वह ऐसे लोगों को उनके अस्पताल में भेजना शुरू कर देंगे। इस पर डॉ. शर्मा ने कहा कि उन्होंने चैरिटेबल अस्पताल नहीं खोल रखा। उनके कहने का आशय यह था कि डॉक्टरों को पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए।
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दरअसल इस बिल पर चर्चा के दौरान डॉ. शर्मा ने डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर डाक्टरों में जबर्दस्त मानवीय भावना होती है। इसी दौरान उन्होंने अपने कैलाश अस्पताल का वाकया सुनाया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व उनके अस्पताल में एक दंपति और कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो रही थी। महिला गर्भवती थी और उसे प्रसव कराना था। मगर उनके पास जरूरी 2000 रुपये नहीं थे। डॉ. शर्मा के मुताबिक उस दंपति ने उन्हें बताया कि उनके पास महज 55 रुपये हैं। फिर महिला का वहीं प्रसव कराया गया और उन्होंने उक्त महिला को 55 में से 15 रुपये वापस कर दिये।
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इस पर स्पीकर बिरला ने कहा यहां ऐसा मत बोलिये। ऐसा सुन कर लोग आपके अस्पताल पहुंचने लगेंगे। फिर भीड़ संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसी बीच कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनके गृह राज्य असम के कई लोग एम्स में इलाज कराने आते हैं। इनमें से कई को यहां दाखिला नहीं मिलता। अगर डॉ. शर्मा कहें तो वह ऐसे लोगों को उनके अस्पताल में भेजना शुरू कर देंगे। इस पर डॉ. शर्मा ने कहा कि उन्होंने चैरिटेबल अस्पताल नहीं खोल रखा। उनके कहने का आशय यह था कि डॉक्टरों को पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए।
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