लोकसभा स्पीकर का फैसला, सांसदों ने सदन के वेल में किया प्रदर्शन तो होंगे निलंबित
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लोकसभा और राज्यसभा में समय-समय पर सांसदों के द्वारा अपना विरोध प्रदर्शित करने के लिए सदन के वेल में आने की लंबी परंपरा रही है। लेकिन इस अधिकार का कई बार इस तरह से इस्तेमाल किया जाता है कि उससे सदन की कार्यवाही कभी आंशिक तो कभी पूरी तरह बाधित हो जाती है।
लेकिन शायद आगे से संसद में ऐसा दृश्य दिखाई न पड़े। इसका कारण है कि लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन के वेल में आने वाले सांसदों को निलंबित करने का फैसला लिया है। इसके अलावा जो सांसद अपनी सीट पर खड़े होकर विरोध दर्ज कराएंगे उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बार शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष के द्वारा राफेल विमान समझौते पर और सत्ता पक्ष के द्वारा राहुल गांधी से कथित गलतबयानी के लिए माफी मांगने की बात पर हंगामा हो रहा है। दोनों ही सदनों में बहुत कम काम हो सका है। इससे नाराज स्पीकर सुमित्रा महाजन ने यह फैसला लेने का निर्णय किया है।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पीकर के समक्ष अपील की थी कि इस नियम को लाने का अधिकार अगली लोकसभा के लिए सुरक्षित रख दिया जाए, लेकिन कमेटी ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
भाजपा ने किया स्वागत, विपक्ष ने कहा- न हो भेदभाव
लोकसभा की कार्यवाही सुधारने के लिए स्पीकर द्वारा बनाए गए इस नियम का भाजपा ने स्वागत किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व सांसद बिजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि सांसदों को वेल में आकर विरोध करने का अधिकार दिया गया था। लेकिन कई बार इस अधिकार का दुरुपयोग किया जा रहा था। लेकिन इस नियम से सदन की उत्पादकता बढ़ेगी और जनहित के मुद्दे पर ज्यादा बहस होगी।
वहीं विपक्ष ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस पार्टी की सांसद रंजीता रंजन ने कहा कि संसद की गरिमा बढ़ाने के लिए जो भी कदम उठाए जाएं वे उसका स्वागत करती हैं। लेकिन यह नियम ऐसे समय में बनाया गया है जब हम सरकार के खिलाफ राफेल मामले पर जेपीसी गठित करने की मांग कर रहे हैं। भाजपा को यह बात भी ध्यान में रखना चाहिए कि विपक्ष में रहते हुए उसने सदन की गरिमा गिराने का सबसे ज्यादा काम किया है।
उन्होंने कहा कि वे स्पीकर या उनके फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं हैं लेकिन वे यह उम्मीद भी अवश्य करती हैं कि इन नियमों को सत्ता पक्ष और विपक्ष के ऊपर एक समान रुप से लागू किया जाएगा और इनमें कभी कोई भेदभाव नहीं होगा।
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