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Breach Of Privilege: निशिकांत दुबे की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने MHA से रिपोर्ट की तलब, जानें क्या है मामला
Thu, 14 Aug 2025 10:40 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 14 Aug 2025 10:40 PM IST
सार
Breach Of Privilege: लोकसभा सचिवालय ने झारखंड के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर गृह मंत्रालय से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। दुबे ने देवघर प्रशासन पर उनके और सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पर संज्ञान लिया है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
लोकसभा सचिवालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) से कहा कि वह झारखंड सरकार से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर एक 'तथ्यात्मक रिपोर्ट' मंगवाए। यह मामला दुबे की ओर से राज्य के शीर्ष अधिकारियों (मुख्य सचिव और डीजीपी) के खिलाफ 'विशेषाधिकार हनन' की शिकायत से जुड़ा है, जिसका लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संज्ञान लिया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि लोकसभा सचिवालय ने बुधवार को गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर यह जानकारी तुरंत मांगी है, ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा जा सके। पत्र में कहा गया, गृह मंत्रालय से अनुरोध है कि इस मामले में झारखंड सरकार से एक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त कर इसे 15 दिनों के भीतर लोकसभा सचिवालय को भेजा जाए, ताकि इसे माननीय अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। फिलहाल लोकसभा में विशेषाधिकार समिति नहीं है, ऐसे में ओम बिरला ही गृह मंत्रालय से जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
ये भी पढ़ें: 'ग्राहकों को नहीं होगा भ्रम', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 'लंदन प्राइड' व्हिस्की ट्रेडमार्क के खिलाफ याचिका
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निशिकांत दुबे ने आठ अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत दी थी कि झारखंड के देवघर जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उनके और सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला देवघर में स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम मंदिर परिसर में 'हंगामा करने' के आरोप से जुड़ा है, जो दुबे के संसदीय क्षेत्र गोड्डा में आता है।
दुबे ने बताया था कि उनके साथ मौजूद अन्य लोगों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जिनमें उनके रिश्तेदार भी शामिल थे। दुबे का कहना है कि वे 'श्रावण मेला' के दौरान मंदिर में श्रद्धा के भाव से दर्शन करने गए थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उनके खिलाफ 'झूठे और गढ़े हुए' आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने यह भी कहा कि वह मंदिर बोर्ड के न्यासी हैं, ऐसे में उनके खिलाफ प्राथमिकी राजनीतिक द्वेष का परिणाम है। चार बार के सांसद दुबे का झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा से लंबे समय से टकराव रहा है।
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि लोकसभा सचिवालय ने बुधवार को गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर यह जानकारी तुरंत मांगी है, ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा जा सके। पत्र में कहा गया, गृह मंत्रालय से अनुरोध है कि इस मामले में झारखंड सरकार से एक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त कर इसे 15 दिनों के भीतर लोकसभा सचिवालय को भेजा जाए, ताकि इसे माननीय अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। फिलहाल लोकसभा में विशेषाधिकार समिति नहीं है, ऐसे में ओम बिरला ही गृह मंत्रालय से जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
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निशिकांत दुबे ने आठ अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत दी थी कि झारखंड के देवघर जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उनके और सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला देवघर में स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम मंदिर परिसर में 'हंगामा करने' के आरोप से जुड़ा है, जो दुबे के संसदीय क्षेत्र गोड्डा में आता है।
दुबे ने बताया था कि उनके साथ मौजूद अन्य लोगों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जिनमें उनके रिश्तेदार भी शामिल थे। दुबे का कहना है कि वे 'श्रावण मेला' के दौरान मंदिर में श्रद्धा के भाव से दर्शन करने गए थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उनके खिलाफ 'झूठे और गढ़े हुए' आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने यह भी कहा कि वह मंदिर बोर्ड के न्यासी हैं, ऐसे में उनके खिलाफ प्राथमिकी राजनीतिक द्वेष का परिणाम है। चार बार के सांसद दुबे का झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा से लंबे समय से टकराव रहा है।
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