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Lok Sabha: 'सुप्रीम' आदेश के बाद बहाल हुई बसपा नेता अफजाल अंसारी की सांसदी; लेकिन सदन में नहीं रख सकेंगे कदम
Thu, 11 Jan 2024 10:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 11 Jan 2024 10:43 PM IST
सार
75 पेज के फैसले में अदालत ने कहा था कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर क्षेत्र से पूर्व सांसद अंसारी लोकसभा में मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते और न ही सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। साथ ही वह सदन की कार्यवाही में भी भाग नहीं ले सकते हैं।
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अफजाल अंसारी
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
बसपा नेता अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त राहत के बाद लोकसभा सचिवालय ने भी उनकी अयोग्यता रद्द कर दी है। हालांकि सदन से अयोग्यता रद्द होने के बाद भी वे सदन में उपस्थित नहीं हो पाएंगे। बीते साल दिसंबर माह में सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गुरुवार को 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में अफजाल की दोषसिद्धि सशर्त निलंबित कर दिया था।
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शीर्ष कोर्ट ने दिया था ये फैसला
75 पेज के फैसले में अदालत ने कहा था कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर क्षेत्र से पूर्व सांसद अंसारी लोकसभा में मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते और न ही सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। साथ ही वह सदन की कार्यवाही में भी भाग नहीं ले सकते हैं। इसके अलावा, पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ की गई अफजाल अंसारी की आपराधिक अपील का 30 जून 2024 तक निपटारा करने का निर्देश दिया था। पीठ कहा था कि गाजीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र उपचुनाव की अधिसूचना तब तक जारी नहीं होगी, जब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला नहीं आ जाता।
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पीठ ने यह निर्देश भी दिए थे
इस मामले में पीठ ने यह भी कहा था कि क्षेत्र में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपीएलएडी) योजनाओं को जारी रखा जाए। स्थानीय संसदीय प्रतिनिधि की गैरमौजूदगी में भी योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट में आपराधिक अपील लंबित रहने के दौरान अंसारी को भविष्य में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा और निर्वाचित होने पर ऐसा चुनाव अपील के नतीजे के अधीन होगा।
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लोकसभा सचिवालय ने बहाल की सांसदी
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद अफजाल की सांसदी बहाल होने का रास्ता साफ हो गया था। अब उसी के परिणामस्वरूप एक विधायक के रूप में अंसारी का दर्जा बहाल कर दिया गया है। हालांकि वह संसद के आगामी बजट सत्र में शामिल नहीं हो सकेंगे। लोकसभा सचिवालय ने इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है।
29 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाई थी चार साल की सजा
गाजीपुर की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने इस साल 29 अप्रैल को अफजाल अंसारी और उनके भाई मुख्तार अंसारी को 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में दोषी ठहराया था। मामले में अफजाल अंसारी को चार साल जेल की सजा सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद गाजीपुर से सांसद रहे अंसारी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इसके बाद, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। जहां 24 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली थी। लेकिन, सजा पर रोक नहीं लगाई थी, जिसके चलते अफजाल अंसारी की सांसदी बहाल नहीं हुई।
दोनों भाइयों पर 29 नवंबर, 2005 को गाजीपुर के तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या और 1997 में वाराणसी के व्यापारी नंद किशोर रूंगटा के अपहरण-हत्या के सिलसिले में यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।