सरकार की बड़ी जीत, राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास, पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े
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करीब चार घंटे की बहस के बाद राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पास हो गया। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसे सदन में पेश किया था। इस दौरान गर्मागर्म बहस हुई और जेडीयू, अन्नाद्रमुक ने सदन से वाकआउट किया। क्या क्या हुआ आज राज्यसभा में पढ़ें-
LIVE UPDATE:
वोटिंग के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास। वोटिंग के दौरान विपक्ष के कई सांसद गायब रहे। बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। अब ये बिल कानून का रूप लेगा। अब तीन तलाक देने पर आरोपी को तीन साल की जेल होगी।
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विधेयक पर वोटिंग
तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने के मुद्दे पर वोटिंग। वोटिंग के लिए पर्ची बांटी गई क्योंकि नए सांसदों को सीट अलॉट नहीं हुई है। 100-84 से गिरा प्रस्ताव। राज्यसभा में बिल पास होने की उम्मीद बढ़ी। सेलेक्ट कमेटी न भेजे जाने के पक्ष में 100 वोट, भेजे जाने के पक्ष में 84 वोट पड़े। अब इस बिल के राज्यसभा में पास होने की उम्मीद बड़ी। वोटिंग के दौरान विपक्ष के कई सांसद नदारद रहे। जेडीयू, अन्नाद्रमुक के अलावा टीआरएस और बसपा भी सदन में मौजूद नहीं थी।
Voting on Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2019 is still underway in Rajya Sabha. pic.twitter.com/WQk94bvTYZ
— ANI (@ANI) July 30, 2019
रविशंकर का आजाद पर निशाना
सदन में रविशंकर प्रसाद ने कहा- गुलाम नबी साहब, आपने 1986 में 400 सीटें जीती थीं। उसके बाद देश में नौ चुनाव हुए, आपको कभी भी बहुमत नहीं मिली। सोचिए ऐसा क्यों नहीं हुआ? आप 2014 में 44 पर थे, आज 52 पर हैं।
Union Minister Ravi Shankar Prasad, in Rajya Sabha: You spoke a lot today Ghulam Nabi sa'ab. you won 400 seats in 1986. There has been 9 Lok Sabha elections after that, you did not get majority in any of them. Think why did that happen? You were 44 in 2014, 52 today. pic.twitter.com/43br3VLX3w
— ANI (@ANI) July 30, 2019
सपा सांसद का सवाल, मंत्री समूह का क्या हुआ?
सपा सदस्य जावेद अली खान ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि महिलाओं के यौन शोषण मुद्दे से निबटने के बारे में चार मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था, उसका क्या हुआ? क्या उस मंत्री समूह ने अपनी कोई रिपोर्ट दी है? उन्होंने कहा कि तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के मामले में सरकार जार्डन, सीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों की मिसाल दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारा देश क्या अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह इन देशों का अनुकरण करेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाह एक दिवानी करार है। उन्होंने कहा कि तलाक का मतलब इस करार को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत तलाक का अपराधीकरण किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से यह विधेयक लायी है और ऐसा करना उचित नहीं है।
अन्नाद्रमुक ने भी किया विरोध
अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनाने की संसद के पास विधायी सक्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया है जो संविधान की दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाह एक दिवानी समझौता है और इसे भंग करना अपराध नहीं हो सकता है। तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए अन्नाद्रमुक नेता ने कहा कि जब इस कृत्य को शीर्ष न्यायालय निष्प्रभावी बता चुका है तो उस निष्प्रभावी कृत्य पर संसद कानून कैसे बना सकती है? उन्होंने कहा कि यह विधेयक कानून बनने के बाद न्यायपालिका की समीक्षा में टिक नहीं पाएगा?
बीजू जनता दल ने किया समर्थन
बीजू जनता दल के प्रसन्न आचार्य ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला सशक्तिकरण के पक्ष में हमेशा से रही है। उन्होंने कहा कि बीजद ने लोकसभा चुनाव में जिन प्रत्याशियों को टिकट दिये थे उनमें एक तिहाई महिलाएं थीं और पार्टी की सात प्रत्याशियों ने चुनाव जीते। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने एक निर्णय में तीन तलाक की प्रथा को अवैध ठहराया था। आचार्य ने सरकार से जानना चाहा कि विधेयक में एक तरफ तो तीन तलाक की प्रथा को निरस्त माना गया है और वहीं दूसरी तरफ इसका संज्ञान लेते हुए इसे अपराध माना गया है। उन्होंने कहा कि दोनों बातें एक साथ कैसे चल सकती हैं?
संसद की समीक्षा के विरुद्ध लाया गया बिल: टीएमसी
तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने कहा कि उनकी पार्टी तीन तलाक के बारे में लाए गए अध्यादेश का इसलिए विरोध कर रही है क्योंकि यह अध्यादेश बिना संसदीय समीक्षा के लाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में न तो राष्ट्रपति शासन लगा है और न ही तानाशाही है, इसलिए संसद की समीक्षा के बिना कोई भी कानून लाना संविधान की भावना के विरूद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा महिला सशक्तिकरण के बारे में केवल बात ही करती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसके लिए वाकई गंभीर है तो उसे महिला आरक्षण संबंधित विधेयक संसद में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए यदि वर्तमान सत्र का एक और दिन बढ़ाना पड़े तो हमारी पार्टी उसके लिए भी तैयार है।
बिल का मकसद परिवारों का बर्बाद करना: आजाद
सदन में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने तीन तलाक बिल कहा कि ये बिल मुस्लिम महिलाओं की शादी के अधिकार की सुरक्षा पर है, लेकिन असल में इसका मकसद परिवारों का बर्बाद करना है।
Ghulam Nabi Azad, Leader of Opposition in Rajya Sabha, on Triple Talaq Bill: The Bill is for protection of rights on marriage but the real motive is destruction of families. pic.twitter.com/GWQTtdTEYn
— ANI (@ANI) July 30, 2019
धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं
राज्यसभा में तीन तलाक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है क्योंकि 33 साल बाद सदन सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए चर्चा कर रही है। इससे पहले सदन ने शाहबानों पर अदालत के दिए फैसले को निष्प्रभावी करने को लेकर चर्चा की थी। नकवी ने कहा कि आज इस कुरीति को खत्म करने के फैसले पर चर्चा हो रही है। इस कुरीति का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। कई इस्लामिक देश इसे गैर कानूनी और गैर इस्लामी बताकर खत्म कर चुके हैं। धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश ने जब पहले कई कुरीतियो को खत्म किया तब कोई हंगामा नहीं हुआ। आज देस कांग्रेस का व्यवहार देख रही है। लोकसभा से राज्यसभा में आते-आते विधेयक पर कांग्रेस के पैर लड़खड़ा रहे हैं। नकवी ने एक शेर पढ़ते हुए अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि तू दरिया में तूफान क्या देखता है, खुदा है निगेहबान क्या देखता है। तू हाकिम बना है तो इंसाफ देकर, तू हिन्दू-मुसलमान क्या देखता है।
जदयू ने किया वॉकआउट
विधेयक के विरोध में जनता दल यूनाइटेड सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी इस बिल के साथ नहीं है। पार्टी की एक विचारधारा है जिसका पालन करने के लिए वह स्वतंत्र है। विचार की यात्रा चलती रहती है और उसकी धाराएं बंटती रहती हैं लेकिन खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि विधेयक पर बड़े पैमाने पर जागदरूकता फैलाने की जरूरत है। विधे.क के विरोध में हमारी पार्टी वाकआउट करती है।
सभी वर्ग और धर्मों की महिलाओं में ऐसी शिकायतें हैं
कांग्रेस सांसद अमी याज्ञिक ने सवाल करते हुए कहा कि सरकार देश की सभी महिलाओं के लिए चिंतित क्यों नहीं है। उन्होंने कहा गुजरात की एक मां मेरे पास आई और कहा कि मेरी एमबीए लड़की को पति ने निकाल दिया है, क्योंकि रोटी काली हो गई थी। इस तरह की चीजें केवल तबके की महिलाओं को नहीं झेलनी पड़ती है। सभी वर्ग और धर्मों की महिलाओं में ऐसी शिकायतें हैं। याज्ञिक ने कहा कि वह महिला सशक्तिकरण और बिल के खिलाफ नहीं है लेकिन बाकी महिलाओं के बारे में सरकार क्यों नहीं सोच रही है। हर महिला को जीवन में ऐसा कुछ न कुछ झेलना पड़ता है। उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक को खत्म कर दिया है। अदालत ने जिसे गैर-कानूनी ठहरा दिया आप कैसे उस पर कानून ला सकते हैं।
तीन तलाक पीड़िताओं को फुटपाथ पर नहीं छोड़ सकते
बिल को राज्यसभा में पेश करते हुए रविशंकर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी और छोटी-छोटी बातों पर तीन तलाक दिया जा रहा था। जिसके कारण हम कानून लेकर आए हैं। लोगों की शिकायतों के बाद विधेयक में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब इसमें जमानत और समझौते के प्रावधान को भी शामिल किया गया है। इसे वोट बैंक के तराजू पर न तौला जाए। यह नारी न्याय, नारी गरिमा और नारी उत्थान का सवाल है। एक तरफ बेटियां लड़ाकू विमान चला रही हैं वहीं दूसरी ओर तीन तलाक पीड़ित बेटियों को फुटपाथ पर नहीं छोड़ा जा सकता है। सभी सासंदों से विनती करता हूं कि इसे पास करें।