Lok Sabha Polls: कौन कर सकेगा सरकारी हेलीपैड-विश्राम गृह का इस्तेमाल, चुनाव आयोग ने जारी किए हैं ये निर्देश
Lok Sabha Polls: चुनाव आयोग ने कहा कि केंद्र या राज्य के नियंत्रण में विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्य सरकारी आवास हैं तो वह उन राजनीतिक पदाधिकारियों को दिया जा सकता है, जिनके पास केंद्र एवं राज्य द्वारा प्रदान की गई 'जेड' श्रेणी या उससे ऊपर के ग्रेड वाली सुरक्षा है।
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लोकसभा और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की गई है। इसके साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं। लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को और आखिरी चरण का मतदान एक जून को होगा। चार जून को वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव आयोग ने केंद्र एवं राज्यों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे सख्ती से आचार संहिता का पालन कराना सुनिश्चित करें। अगर किसी राज्य में सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत हेलीपैड हैं तो उनका इस्तेमाल केवल सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोग ही नहीं, बल्कि विपक्षी उम्मीदवार और उनके नेता भी कर सकेंगे। किसी राज्य में विश्राम गृह/डाक बंगला/सरकारी आवास है तो उसकी अलॉटमेंट के लिए भी नियम तय किए गए हैं।
इस बाबत चुनाव आयोग ने 16 मार्च को कैबिनेट सचिव, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और सभी राज्यों के मुख्य निर्चाचन अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि देश में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं। किसी पार्टी की सरकार, चाहे केंद्र में हो राज्य की सत्ता में हो, उसे लेकर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की कोई शिकायत मिलती है तो उसके लिए कोई कारण न बताया जाए। संबंधित प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि आचार संहिता का उल्लंघन न हो। अगर किसी ने अपने आधिकारिक पद का उपयोग चुनाव अभियान के उद्देश्य से किया है तो उसके लिए कोई बहाना नहीं चलेगा। यानी उस बाबत कोई तर्क नहीं सुना जाएगा।
केंद्र या राज्य के नियंत्रण में विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्य सरकारी आवास हैं तो वह उन राजनीतिक पदाधिकारियों को दिया जा सकता है, जिनके पास केंद्र एवं राज्य द्वारा प्रदान की गई 'जेड' श्रेणी या उससे ऊपर के ग्रेड वाली सुरक्षा है। चुनावी बैठकें आयोजित करने के लिए मैदान आदि जैसे सार्वजनिक स्थान और चुनाव के सिलसिले में हवाई उड़ानों के लिए हेलीपैड का उपयोग, इन सब पर मौजूद पार्टी का एकाधिकार नहीं होगा। अन्य दलों/उम्मीदवारों को ऐसे स्थानों व सुविधाओं का उपयोग, उन्हीं नियमों और शर्तों के आधार पर करने की अनुमति दी जाएगी, जिस तरह से सत्ताधारी पार्टी द्वारा उनका उपयोग किया जाता है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक, विश्राम गृह, डाक बंगला या अन्य सरकारी आवास देने से पहले यह देखा जाएगा कि वह आवास पहले से ही चुनाव से संबंधित अधिकारियों या आयोग के पर्यवेक्षकों के लिए आवंटित तो नहीं किया गया है। ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी, सरकारी गेस्ट हाउस/विश्राम गृह या अन्य सरकारी आवास आदि में रहते हुए कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगे। समाचार पत्रों और अन्य मीडिया में सरकारी खजाने की कीमत पर विज्ञापन जारी नहीं होगा। चुनावों की घोषणा होने के बाद से मंत्री और अन्य प्राधिकारी, विवेकाधीन निधि से अनुदान/भुगतान स्वीकृत नहीं करेंगे। वे अपनी आधिकारिक यात्रा को चुनाव प्रचार कार्य के साथ नहीं जोड़ेंगे। चुनाव में आधिकारिक मशीनरी का उपयोग भी नहीं करेंगे।