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LS Polls: लोकसभा चुनाव से ऐन पहले दिग्विजय सिंह ने क्यों अलापा ईवीएम का राग? भाजपा को जमकर घेरा, कही यह बात
Thu, 14 Mar 2024 10:36 PM IST
आदर्श शर्मा
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 14 Mar 2024 10:36 PM IST
सार
राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम के खिलाफ एक गैर राजनीतिक मंच का गठन भी किया गया है। 'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' नाम से गठित इस कमेटी में विपक्षी नेताओं से लेकर विभिन्न नागरिक संगठनों के दिग्गज शामिल हैं।
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ईवीएम मुक्त भारत अभियान
- फोटो : अमर उजाल
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विस्तार
लोकसभा चुनावों की तारीखों का एलान आने वाले दिनों में हो सकता है। इसी बीच एक बार फिर ईवीएम चर्चा के केंद्र में आ गई है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने ईवीएम पर सवाल उठाए है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ियां करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मैं गारंटी से कहता हूं कि एक दिन यह चोरी पकड़ी जाएगी। जो लोग इसे करने वाले है उन्हें ऐसी सजा दी जाएगी, जो एक मिसाल बनेगी।
इसी क्रम में गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम के खिलाफ एक गैर राजनीतिक मंच का गठन भी किया गया है। 'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' नाम से गठित इस कमेटी में विपक्षी नेताओं से लेकर विभिन्न नागरिक संगठनों के दिग्गज शामिल हैं। गुरुवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में ईवीएम मुक्त भारत अभियान की शुरुआत हुई।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब हम ईवीएम पर सवाल उठाते है तो हमसे पूछा जाता है कि कांग्रेस पार्टी केरल, हिमाचल और तेलंगाना में फिर कैसे जीत जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में स्वीप करती है लेकिन लोकसभा के चुनाव पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच जाती है। उसे एक भी सीट नहीं मिलती है।
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दरअसल, ये लोग (भाजपा) बड़ी होशियारी से चिन्हित राज्यों में चिन्हित विधानसभा सीटों का पहले चयन करती है। इसके बाद ये खेल करते हैं। ये लोग इसलिए ऐसा करते हैं कि, तमिलनाडु में भाजपा को जीता दोगे तो वहां इनकी पोल नहीं खुल जाएगी । केरल में भी इन्हें जीता दोगे तो इनकी पोल नहीं खुल जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा ने चुनाव आयोग और चुनाव संबंधित दूसरे अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ईवीएम में धांधली करके जनता के वोटो के साथ विश्वासघात करने वाले को कड़ी सजा मिलेगी। कानून में ऐसी धाराएं है, जिससे इन लोगों की पूरी जिंदगी जेल में सड़ जाएगी।
इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग से सात माह से मांग रहा है समय
ईवीएम मुक्त भारत अभियान द्वारा जारी बयान में कहा गया कि देश में ईवीएम के खिलाफ कोने-कोने में आवाज उठ रही है। इंडिया गठबंधन की ओर से इस मामले में करीब सात महीने से चुनाव आयोग से समय मांगा जा रहा है, लेकिन कोई उत्तर अब तक नहीं मिला। इसके अलावा पूरे देश में जन आंदोलन की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच का बनाना आवश्यक हो गया है, जो 'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' के नाम से होगा। ईवीएम मुक्त भारत राजनैतिक, सामाजिक, नागरिक समाज सहित विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व है और यह गैर राजनीतिक होगा।
संगठन का कहना है कि दुनिया के बड़े और स्वस्थ जनतान्त्रिक देशों ने भी ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा नहीं। इसके अलावा ईवीएम और वीवीपैट के कारण संदेह और गहरा हो गया है। जब तक पेपर बैलेट से चुनाव होता था, तब काफी हद तक चुनाव आयोग के नियंत्रण में प्रक्रिया हुआ करती थी।
कमेटी ने कहा कि, ईवीएम के प्रवेश से भारत सरकार की तमाम एजेंसियां जैसे भारत एलेक्ट्रॉनिक्कस लिमिटेड, इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया और निजी क्षेत्र से टेक्निकल लोग शामिल हो गए हैं, ऐसे में तो निष्पक्षता का होना लगभग असंभव है। एक आम दलील यह दी जाती है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराना खर्चीली प्रक्रिया है। जो एक बहुत बड़ा भ्रम है। बैलेट पेपर से चुनाव कराने में 2 सप्ताह की तैयारी चाहिए। अगर यह नहीं संभव है तो वीवीपैट की पर्ची वोटर के हाथ में दी जाए और वह एक डिब्बे के अंदर स्वयं डाल दे। वीवीपैट की पर्ची की गिनती कर ली जाए, जिससे कि सारे संदेह समाप्त हो जाएं।
ये नेता शामिल है ईवीएम मुक्त भारत अभियान कमेटी में
'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' कमेटी में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता दीपक बाबरिया, उदित राज, एम. जे. देवासहायम (सिटीजन इलेक्शन कमीशन), वामन मेश्राम (बामसेफ), दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआईएमएल), गुरनाम सिंह चढूनी ( एसकेएम नेता), स्मिता कमले (इंडिया अगेंस्ट ईवीएम), एडवोकेट महमूद प्राचा, राजेन्द्र पाल गौतम (एमएलए), अशोक शर्मा (पूर्व राजदूत), गौतम लहरी (प्रेसीडेंट, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया) शामिल हैं। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि, अभियान शुरू होने के बाद लोग जुड़ते जाएंगे और आवश्यकतानुसार सांगठनिक ढांचे में भी परिवर्तन होता रहेगा।
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इसी क्रम में गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम के खिलाफ एक गैर राजनीतिक मंच का गठन भी किया गया है। 'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' नाम से गठित इस कमेटी में विपक्षी नेताओं से लेकर विभिन्न नागरिक संगठनों के दिग्गज शामिल हैं। गुरुवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में ईवीएम मुक्त भारत अभियान की शुरुआत हुई।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब हम ईवीएम पर सवाल उठाते है तो हमसे पूछा जाता है कि कांग्रेस पार्टी केरल, हिमाचल और तेलंगाना में फिर कैसे जीत जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में स्वीप करती है लेकिन लोकसभा के चुनाव पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच जाती है। उसे एक भी सीट नहीं मिलती है।
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दरअसल, ये लोग (भाजपा) बड़ी होशियारी से चिन्हित राज्यों में चिन्हित विधानसभा सीटों का पहले चयन करती है। इसके बाद ये खेल करते हैं। ये लोग इसलिए ऐसा करते हैं कि, तमिलनाडु में भाजपा को जीता दोगे तो वहां इनकी पोल नहीं खुल जाएगी । केरल में भी इन्हें जीता दोगे तो इनकी पोल नहीं खुल जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा ने चुनाव आयोग और चुनाव संबंधित दूसरे अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ईवीएम में धांधली करके जनता के वोटो के साथ विश्वासघात करने वाले को कड़ी सजा मिलेगी। कानून में ऐसी धाराएं है, जिससे इन लोगों की पूरी जिंदगी जेल में सड़ जाएगी।
इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग से सात माह से मांग रहा है समय
ईवीएम मुक्त भारत अभियान द्वारा जारी बयान में कहा गया कि देश में ईवीएम के खिलाफ कोने-कोने में आवाज उठ रही है। इंडिया गठबंधन की ओर से इस मामले में करीब सात महीने से चुनाव आयोग से समय मांगा जा रहा है, लेकिन कोई उत्तर अब तक नहीं मिला। इसके अलावा पूरे देश में जन आंदोलन की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच का बनाना आवश्यक हो गया है, जो 'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' के नाम से होगा। ईवीएम मुक्त भारत राजनैतिक, सामाजिक, नागरिक समाज सहित विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व है और यह गैर राजनीतिक होगा।
संगठन का कहना है कि दुनिया के बड़े और स्वस्थ जनतान्त्रिक देशों ने भी ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा नहीं। इसके अलावा ईवीएम और वीवीपैट के कारण संदेह और गहरा हो गया है। जब तक पेपर बैलेट से चुनाव होता था, तब काफी हद तक चुनाव आयोग के नियंत्रण में प्रक्रिया हुआ करती थी।
कमेटी ने कहा कि, ईवीएम के प्रवेश से भारत सरकार की तमाम एजेंसियां जैसे भारत एलेक्ट्रॉनिक्कस लिमिटेड, इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया और निजी क्षेत्र से टेक्निकल लोग शामिल हो गए हैं, ऐसे में तो निष्पक्षता का होना लगभग असंभव है। एक आम दलील यह दी जाती है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराना खर्चीली प्रक्रिया है। जो एक बहुत बड़ा भ्रम है। बैलेट पेपर से चुनाव कराने में 2 सप्ताह की तैयारी चाहिए। अगर यह नहीं संभव है तो वीवीपैट की पर्ची वोटर के हाथ में दी जाए और वह एक डिब्बे के अंदर स्वयं डाल दे। वीवीपैट की पर्ची की गिनती कर ली जाए, जिससे कि सारे संदेह समाप्त हो जाएं।
ये नेता शामिल है ईवीएम मुक्त भारत अभियान कमेटी में
'ईवीएम मुक्त भारत अभियान' कमेटी में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता दीपक बाबरिया, उदित राज, एम. जे. देवासहायम (सिटीजन इलेक्शन कमीशन), वामन मेश्राम (बामसेफ), दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआईएमएल), गुरनाम सिंह चढूनी ( एसकेएम नेता), स्मिता कमले (इंडिया अगेंस्ट ईवीएम), एडवोकेट महमूद प्राचा, राजेन्द्र पाल गौतम (एमएलए), अशोक शर्मा (पूर्व राजदूत), गौतम लहरी (प्रेसीडेंट, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया) शामिल हैं। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि, अभियान शुरू होने के बाद लोग जुड़ते जाएंगे और आवश्यकतानुसार सांगठनिक ढांचे में भी परिवर्तन होता रहेगा।