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रात दो बजे तक चलने वाली बैठक में कांग्रेसियों के पास नहीं होता प्रियंका के इन सवालों का जवाब

Fri, 15 Mar 2019 10:24 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Fri, 15 Mar 2019 10:24 PM IST
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Lok Sabha elections: Congress workers do not have answers to Priyanka Gandhi questions in meeting
प्रियंका गांधी वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

उत्तरप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को दोबारा से खड़े करने की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया रात दो बजे तक कार्यकर्ताओं के साथ मैराथन बैठक कर रहे हैं। दिल्ली के सफदरजंग स्थित 27 नंबर आवास, जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया रहते हैं, वहां प्रियंका गांधी रोजाना दोपहर डेढ़ बजे पहुंच जाती हैं। इसके बाद दोनों नेताओं के सामने 55-70 कार्यकर्ताओं की क्लास शुरू होती है। सबसे पहले कार्यकर्ताओं से उनका हालचाल पूछा जाता है।

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कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति के बारे में लोगों की क्या राय है, आदि सवाल-जवाब होते हैं। एक लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की क्लास करीब तीन घंटे चलती है।
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चुनावी मौसम है तो जाहिर सी बात है कि पार्टी मुख्यालय पर टिकट लेने वालों का जमावड़ा लगता है। 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में नेताओं का आवागमन शुरू हो गया है, लेकिन भीड़ को देखें तो ज्योतिरादित्य के आवास पर ही ज्यादा दिखाई पड़ रही है। 
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27-सफदरजंग पर सुबह दस बजे ही नेता पहुंचने शुरू हो जाते हैं। वहां पर केवल यूपी से जुड़े नेता ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंच रहे हैं। यूपी के बाहर से आए नेताओं को जब यह पता चलता है कि यहां कार्यकर्ताओं की बैठक चल रही है तो वे 24-अकबर रोड का रुख करते हैं। प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया दिन में एक-डेढ़ बजे बैठक शुरू करते हैं। बैठकों का यह सिलसिला रात दो बजे तक चलता रहता है। कई बार बैठक खत्म होने में इससे ज्यादा वक्त भी लग जाता है।

 

तीन घंटे की क्लास में कार्यकर्ताओं के पास नहीं होता प्रियंका के सवालों का जवाब

प्रियंका गांधी तीन घंटे की क्लास में कार्यकर्ताओं को बोलने का भरपूर मौका देती हैं, लेकिन वे उनकी बात खत्म होने पर एक सवाल जरूर करती हैं। यह ऐसा सवाल होता है कि जिसका कार्यकर्ताओं के पास कोई जवाब नहीं होता। मसलन, पार्टी यदि सत्ता में नहीं है तो आप भी सक्रिय नहीं हैं। इसकी क्या वजह है। एक कार्यकर्ता ने बताया, प्रियंका गांधी हर तरह सवाल का बहुत शालीनता से पूछती हैं, मगर सवाल इतना गंभीर होता है कि सामने वाले से उसका कोई जवाब बन ही नहीं पाता। आप अपने को दूसरी पार्टियों से अलग कैसे देखते हैं, वोटरों के बीच में अगर आपको ऐसा सुनने को मिल रहा है कि दूसरी पार्टी जीत में है तो आपकी प्रतिक्रिया क्या रहती है। 

चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती-बाड़ी, अपराध और जाति-धर्म जैसे दूसरे मुद्दों का कितना प्रभाव है। अगर कांग्रेस पार्टी को दोबारा से सत्ता में लाने या लोगों के बीच ले जाने का मौका आपको मिलता है तो आप उसे किस तरह लेंगे। कार्यकर्ता इस सवाल का जवाब अलग-अलग तरह से देते हैं। कोई जाति कार्ड के आधार पर तो विकास के मुद्दों पर पार्टी को आगे ले जाने की बात कहता है।

प्रियंका गांधी इन सभी कार्यकर्ताओं की बात सुनकर अंत में उन्हें पार्टी की लाइन बताती हैं। ज्योतिरादित्य और प्रियंका गांधी कुछ प्रिंट सामग्री भी कार्यकर्ताओं को देते हैं, लेकिन ज्यादातर बातें उन्हें लिखनी ही पड़ती हैं। डायग्राम और ग्राफ के जरिए भी कार्यकर्ताओं को समझाया जाता है।

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