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West Bengal: भाजपा का संदेशखाली कार्ड बेअसर, 31 सीटें जीतकर ममता ने साबित किया BJP अब भी बाहरी पार्टी
Wed, 05 Jun 2024 06:30 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
विजय त्रिपाठी
विजय त्रिपाठी
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 05 Jun 2024 06:30 AM IST
सार
कुछ राजनीतिक विश्लेषक पश्चिम बंगाल में भाजपा की छह-सात सीटें बढ़ने का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन मतगणना में भाजपा 10 सीटों पर सिमट गई। 31 सीटों पर झंडे गाड़ कर ममता ने साबित कर दिया कि भाजपा अब भी यहां के लिए बाहरी पार्टी ही है। भाजपा इस बार कई सीट भी हार गई। इस बार ममता को एकतरफा मुस्लिम वोट मिला।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- फोटो : ANI
विस्तार
मशहूर अमेरिकी पत्रिका टाइम ने 12 साल पहले ममता बनर्जी को विश्व की सौ असरदार हस्तियों में शुमार किया था, लेकिन उनका जलवा आज भी कायम है। सारे एग्जिट पोल को धता बताते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पिछले लोकसभा चुनाव में मजबूत ताकत बनकर उभरी भाजपा की चुनौती इस बार ध्वस्त कर दी। टीएमसी बंगाल में इंडिया गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने के बावजूद एनडीए पर भारी रही।
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कुछ राजनीतिक विश्लेषक भाजपा की छह-सात सीटें बढ़ने का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन मतगणना में भाजपा 10 सीटों पर सिमट गई। 31 सीटों पर झंडे गाड़ कर ममता ने साबित कर दिया कि भाजपा अब भी यहां के लिए बाहरी पार्टी ही है। भाजपा इस बार कई सीट भी हार गई। इस बार ममता को एकतरफा मुस्लिम वोट मिला। ममता ने भाजपा के जवाब में साफ्ट हिंदू कार्ड चला और अपने हिंदू वोट बैंक को खिसकने नहीं दिया। नतीजों से ममता ने अपनी बंगाली पहचान और पुख्ता कर ली है। लक्ष्मी भंडार योजना, हर महीने खाते में एक हजार रुपये देने की घोषणा ने जोरदार असर किया।
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भाजपा का सीएए दांव भी पड़ा फीका
भाजपा के इस राज्य में सबसे बड़े दो कार्ड थे-संदेशखाली और नागरिकता कानून। दोनों उसे फायदा न पहुंचा सके। टीएमसी के मुस्लिम नेता शाहजहां शेख के अत्याचार को उसने मुद्दा बनाकर पीड़िता रेखा पात्रा को चुनाव मैदान में उतारा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी काउंसिलिंग की लेकिन पात्रा यहां तृणमूल के नुरुल इस्लाम से भाजपा हार गई। संदेशखाली प्रकरण के जरिये भाजपा की मुस्लिम तुष्टीकरण को हथियार बनाने की कोशिश बेकार गई।
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करीब 65 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं वाली बेहरामपुर सीट पर आजादी के बाद से पहली बार कोई मुस्लिम प्रत्याशी जीता। लगातार पांच बार से सांसद रहे कांग्रेस के धुरंधर नेता अधीर रंजन चौधरी को पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने यहां से आउट कर दिया। सुरजीत सिंह अहलूवालिया का बार-बार सीट बदलना शत्रुघ्न सिन्हा को फायदा कर गया और आसनसोल से वह जीत गए।