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विडंबना: बेटियों को जिस्मफरोशी से बचाने के लिए 7-12 साल में सगाई, गुजरात के वडिया की कड़वी हकीकत

Mon, 21 Sep 2026 05:03 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, अहमदाबाद।
एजेंसी, अहमदाबाद। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 21 Sep 2026 05:03 AM IST
सार

गुजरात के बनासकांठा जिले के वडिया गांव में सारणिया समुदाय की बेटियों को जिस्मफरोशी के धंधे से बचाने के लिए कम उम्र में सगाई या शादी तय करने की परंपरा जारी है। समुदाय में यह कुप्रथा पीढ़ियों से चली आ रही है। हालांकि, 2012 से सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर सामूहिक विवाह और रोजगार के विकल्प बढ़ाने के प्रयास हुए हैं। इससे कई परिवारों ने इस धंधे को छोड़ना शुरू किया है।
 

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vadia village child engagement to save girls from prostitution social change in Gujarat
बाल विवाह रोकने को हर स्तर पर सख्ती

विस्तार

गुजरात के अहमदाबाद से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर बनासकांठा जिले में बसा वडिया गांव आज भी ऐसी दर्दनाक और कड़वी सच्चाई से जूझ रहा है, जहां की लड़कियों के सामने केवल दो ही विकल्प बचे हैं-या तो बचपन की सगाई या फिर जिस्मफरोशी का दलदल।
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यह कोई पुरानी बात नहीं, बल्कि यहां की मौजूदा और दुखद वास्तविकता है, जहां मां-दादी की तरह अपनी बेटियों को इस धंधे में जाने से बचाने के लिए 7 से 12 साल की उम्र में ही उनकी शादियां या सगाई तय कर दी जाती हैं। यह कुप्रथा लगातार बढ़ रही है। 
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पीढ़ियों से चली आ रही कुप्रथा सारणिया समुदाय घुमंतू जनजाति है जो कभी मेवाड़ के महाराणा प्रताप की सेना के साथ यात्रा करती थी। जहां पुरुष ढाल और तलवार जैसे हथियार तेज करते थे, वहीं महिलाएं सैनिकों का मनोरंजन करती थीं। स्वतंत्रता के बाद आजीविका के लिए यह समुदाय वापस इस धंधे में उतर गया।
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पुरुषों की भूमिका
लगभग 750 की आबादी वाले इस गांव में आज भी हर सुबह पुरुष (पिता, भाई या पति) पालनपुर-थराद राजमार्ग पर कतार में खड़े होकर ट्रक चालकों और राहगीरों को अपनी ही घर की महिलाओं के लिए ग्राहक के रूप में तलाशते हैं, जबकि देह व्यापार में लिप्त महिलाएं घरों के अंदर ही रहती हैं।


2012 से शुरू हुई सामूहिक विवाह की पहल
वर्ष 2012 में विचर्टा समुदाय समर्थन मंच संस्था की संस्थापक मित्तल पटेल और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों से गांव में पहला सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। तब से लेकर अब तक कई परिवारों ने इस धंधे को छोड़ दिया है। बोरवेल और झीलों को पुनर्जीवित करने, कृषि भूमि को उपजाऊ बनाने और परिवारों को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों से लोगों को आय के नए साधन मिले हैं।
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