फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2024 BJP lost factionalism and infighting in West Bengal

बंगाल: गुटबाजी और भितरघात से हारी भाजपा, विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी में बड़े बदलावों के आसार

Sun, 09 Jun 2024 05:41 AM IST
एन. अर्जुन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 09 Jun 2024 05:41 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 18 से 12 पर सिमट गई, जबकि 2026 में यहां विधानसभा चुनाव भी होने हैं। माना जा रहा है कि हार की समीक्षा के बाद सांगठनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे। इस बीच, अपनी हार के बाद मुखर रहे दिलीप घोष ने शनिवार को अपने एक्स हैंडल पर केवल तीन वाक्य ‘ओल्ड इज गोल्ड’ लिखकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।

विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2024 BJP lost factionalism and infighting in West Bengal
पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल से लोकसभा चुनाव में 30 से अधिक सीटों की जीत का दावा करने वाली भाजपा की हार की वजहें सामने आने लगी हैं। भाजपा के लोकसभा प्रत्याशियों की लिस्ट आने के साथ ही पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी व भितरघात की बात भी सामने आने लगी थी। मेदिनीपुर से सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की सीट बदले जाने पर सवाल उठे थे, लेकिन उस समय पार्टी अनुशासन के नाम पर इस बात को दबा दिया गया। हार के बाद अब यह बात साफ हो गई है कि पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी और भितरघात ही हार का कारण बनी, क्योंकि अब पार्टी के लोग ही यह आरोप लगा रहे हैं।

विज्ञापन


भाजपा पिछली बार के मुकाबले इस बार 18 से 12 पर सिमट गई, जबकि 2026 में बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। माना जा रहा है कि हार की समीक्षा के बाद सांगठनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे। इस बीच, अपनी हार के बाद मुखर रहे दिलीप घोष ने शनिवार को अपने एक्स हैंडल पर केवल तीन वाक्य ‘ओल्ड इज गोल्ड’ लिखकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि घोष ने इन तीन वाक्यों से बंगाल भाजपा की पूरी कहानी बयां कर दी।
विज्ञापन


घोष की सीट बदलना पड़ा महंगा
मेदिनीपुर से सांसद दिलीप घोष की सीट बदलना भाजपा के लिए काफी महंगा पड़ गया। घोष को वर्धमान-दुर्गपुर भेज दिया गया। उनकी जगह आसनसोल से भाजपा विधायक अग्रिमित्रा पॉल को मेदिनीपुर में उतारा गया। प्रत्याशी बदलाव को लेकर पार्टी के अंदर ही तमाम सवाल खड़े हुए थे। बड़ा सवाल यह भी था कि किसके इशारे पर सीट बदली गई। तब आशंका जताई गई थी कि जीते हुए प्रत्याशी की सीट बदलने से नुकसान हो सकता है, और यह बात सही साबित हुई। घोष दुर्गपुर सीट पर तृणमूल के कीर्ति आजाद से 1 लाख 35 हजार से अधिक वोटों से हार गए। उधर, भाजपा मेदिनीपुर की सीट भी हार गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


मेरी सीट क्यों बदली गई, पार्टी से जवाब नहीं मिला : घोष
हार के बाद से ही गुटबाजी के खिलाफ मुखर रहे घोष ने कहा, वे वर्धमान-दुर्गपुर सीट से नहीं उतरना चाहते थे, लेकिन पार्टी के कहने पर लड़े। उनकी सीट क्यों बदली गई, इसका जवाब पार्टी से अभी तक नहीं मिला है। बता दें िक दिलीप घोष के अध्यक्ष पद पर रहते हुए ही भाजपा बंगाल में मजबूत हुई। पार्टी का वोट प्रतिशत 40% तक पहुंचा था। 2014 में भाजपा के केवल दो सांसद थे, पर 2019 में यह संख्या 18 तक पहुंच गई। उनके नेतृत्व में ही बंगाल में विस चुनाव लड़ा और तीन से पार्टी 77 तक पहुंची।

राजमाता अमृता राय बोलीं-पार्टी नेताओं के कारण हुई हार
कृष्णानगर सीट से हारीं राजमाता अमृता राय ने भी हार का ठीकरा प्रदेश नेतृत्व पर फोड़ा है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी नेताओं की बात मानकर बड़ी गलती की। अगर मैं अपनी बुद्धि से काम करती, तो हार नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा, अगर मैं आगे राजनीति करूंगी, तो अपने विवेक से, दूसरों की बात नहीं सुनूंगी।


प. बंगाल भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी के बीच शनिवार को पार्टी नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु आधिकारी ने किसी का नाम लिए बिना कहा, जो लोग पोस्ट कर रहे हैं, जो ज्ञान दे रहे हैं, उन्हें अतीत का ज्ञान ही नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed