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इन 5 वजहों से भारत के चुनावों पर है पूरी दुनिया की नजर

Mon, 11 Mar 2019 03:56 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 11 Mar 2019 03:56 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: five reasons you can’t ignore india's elections
भारत में चुनाव

भारत में अप्रैल से लेकर मई के बीच 17वें लोकसभा चुनाव होंगे। दुनियाभर की नजर इन चुनावों पर है। इसके कई कारण हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भारत में चुनाव 11 अप्रैल से लेकर 19 मई के बीच होंगे। 23 मई को चुनाव नतीजे घोषित होंगे। सात चरणों में संपन्न होने वाले इन चुनावों के लिए 10 लाख पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। 18 से 19 साल की उम्र के डेढ़ करोड़ युवा पहली बार इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आइए जानते हैं क्या हैं वो पांच कारण जिस वजह से भारत में होने वाले चुनावों पर रहेगी दुनिया की नजर...

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दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। 
  • जनसंख्या के हिसाब से चीन के बाद भारत का स्थान दूसरा है। 
  • मतदाता 543 लोकसभा सीटों पर मतदान के जरिए शासन की दिशा तय करेंगे।
  • 2014 में चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के लिए 37 लाख पोलिंग स्टाफ नियुक्त किया था।
  • उस वक्त चुनाव के लिए 550,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
  • 56 हेलिकॉप्टर्स और 570 विशेष ट्रेनों का प्रयोग पांच हफ्ते के चुनाव के लिए किया गया था।

 
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सबसे ज्यादा राजनीतिक पार्टियां चुनाव में लेती हैं भाग

  • भारत के लोकसभा चुनावों में कई पार्टियां हिस्सा लेती हैं।
  • साल 2014 में भारत में 464 पार्टियों ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।
  • भारत ने पिछले लोकसभा चुनाव के लिए 38.70 बिलियन रूपए खर्च किए थे। 
  • इस लोकसभा चुनाव में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 83 करोड़ से ज्यादा थी।
  • 83.4 करोड़ मतदाताओं ने  8251 करोड़ उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला किया था।
  • इस बार के लोकसभा चुनाव में यह संख्या बढ़कर 90 करोड़ पहुंच गई है।

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राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह और कई विचारधाराएं

  • भारत में हर राजनीतिक पार्टी का चुनाव चिन्ह अलग-अलग है। 
  • चुनाव आयोग पार्टियों के लिए चुनाव चिन्ह तय करता है। 
  • विश्व के किसी भी देश में न तो इतनी पार्टियां हैं और न ही इतने चुनाव चिन्ह। 
  • भारत में हाथी से लेकर तीर, हाथ से लेकर कमल तक का निशान चुनाव चिन्ह के तौर पर प्रयोग किया जाता है। 
  • इन चुनाव चिन्हों की वजह से ही प्रत्याशी अपनी विचारधारा की पार्टी और उसके प्रत्याशी को वोट देते हैं। 
  • दूर दराज के पहाड़ी इलाकों से लेकर घने जंगलों के बीच बसने वाली आबादी के  बीच चुनाव आयोग, चुनाव कराता है।
  • चुनाव अधिकारियों के लिए खाना, सोने के लिए बिस्तर, टॉर्च, इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन और स्याही का इंतजाम किया जाता है।
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सबसे ज्यादा युवा वोटर्स

  • भारत में 18 से 19 साल के बीच डेढ़ करोड़ युवा मतदाता है।
  • ये युवा मतदाता इस साल पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
  • दुनिया के किसी भी देश में इतनी संख्या में युवा मतदाता मुश्किल से होंगे।


चुनाव में ऑनलाइन गतिविधि पर नजर

  • 43 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के पास स्मार्टफोन है।
  • 30 करोड़ भारतीय फेसबुक पर हैं।
  • 20 करोड़ से ज्यादा भारतीय व्हॉट्सएप के जरिए मैसेज भेजते हैं।
  • इसलिए, चुनाव में राजनीतिक पार्टियां और प्रत्याशी ऑनलाइन पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं।
  • परंपरागत पोस्टर, बैनर्स और कैंपेन स्लोगन भी ऑनलाइन के हिसाब से बदल गए हैं।
  • ये ही वजह है कि चुनाव आयोग इस बार प्रत्याशियों की ऑनलाइन गतिविधि पर भी नजर रख रहा है।
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