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उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस की खास रणनीति, इस तरह इस्तेमाल होगा प्रियंका-कार्ड

Thu, 14 Mar 2019 01:58 PM IST
Priyesh Mishra शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 14 Mar 2019 01:58 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019 Congress Plan Special Strategy for Priyanka Gandhi
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
कांग्रेस को बसपा प्रमुख मायावती की नाराजगी की कोई खास चिंता नहीं है। समाजवादी पार्टी को लेकर भी पेशानी पर कोई बल नहीं है। राहुल गांधी का कार्यालय काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की भूमिका काफी बढ़ी है। पार्टी को भरोसा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उसकी स्थिति काफी मजबूत रहेगी। यहां तक कि उत्तर प्रदेश को लेकर कांग्रेस का उत्साह काफी बढ़ गया है।
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सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की घोषणा से पहले तक हमारी चिंता थी। कांग्रेस अध्यक्ष चाह रहे थे कि सब साथ आ जाएं। बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में हर जगह कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ और एक दूसरे का सम्मान करके आगे बढ़ रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश में उन्होंने (सपा-बसपा) अपना निर्णय कर लिया तो अब हमें चिंता नहीं है। अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश में दमखम के साथ लोकसभा चुनाव 2019 में उतरने का निर्णय ले लिया है। 
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21-22 मार्च के बाद बदलेगी सूरत

पार्टी के वरिष्ठ नेता की मानें तो अभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने राजनीति के पत्ते ही नहीं खोले हैं। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया गए, तीन-चार दिन रहे और लौट आए हैं। लेकिन 21-22 मार्च के बाद ऐसा नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि फर्ज कीजिए प्रियंका गांधी लखनऊ में जाकर बैठ गईं और वहीं से पूर्वी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार का संचालन करना शुरू कर दिया तो? बताते हैं यह जल्द होने वाला है। लखनऊ में रुकने की सही जगह तैयार हो रही है। प्रियंका गांधी मध्य यूपी में भी खासा सक्रिय रहने वाली हैं। वह प्रयागराज में आनंद भवन से लेकर बनारस और गोरखपुर तक चुनावी गतिविधि पर लगातार नजर रखेंगी।  
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चंद्रशेखर से मिलने को समझिए?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : PTI

यह आप समझिए कि प्रियंका गांधी आतंकी हमले में शहीद सैनिक को श्रद्धांजलि देने मेरठ क्यों गई थी? या फिर भीम आर्मी के युवा नेता चंद्रशेखर से मिलने क्यों गई? चंद्रशेखर तो अभी भी इलाज के दौर से गुजर रहे हैं और प्रियंका गांधी ने खुद साफ कर दिया कि उन्हें इस पर कोई राजनीति नहीं करनी है। पार्टी के महासचिव का कहना है कि इतने भर से बसपा प्रमुख मायावती की परेशानी साफ झलक रही है। यूपी के नेता और यूपीए सरकार में मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि वह अभी बहुत कुछ नहीं कहना चाहते।

उन्होंने आगे जोड़ा, "यह केवल निजी चर्चा के लिए है, लेकिन मेरी सलाह है कि अन्य राजनीतिक दल राहुल गांधी की कांग्रेस को हल्के में न लें। वह इतना भी समझ लें चाहे रॉबर्ट वाड्रा को परेशान करने की मोदी सरकार की कोशिशें हों या राहुल-गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी को बदनाम करने की कोशिश, कांग्रेस ऐसी किसी कोशिश के आगे झुकने वाली नहीं है। हम 2019 में जोरदार चुनौती देने वाले हैं।"

तैयार हो रहा है प्रचार का प्लान

सूत्र का कहना है कि यूपी में चुनाव अभियान प्रचार की योजना तैयार हो रही है। पार्टी का राज्य में भरपूर फोकस रहेगा। कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का ग्वालियर चंबल संभाग में प्रभाव है। बुंदेलखंड , पश्चिमी यूपी को लेकर वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जल्द ही नतीजा दिखने लगेगा। बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक को लेकर पार्टी ने अपनी लाइन मोटे तौर पर तय कर ली है। टिकट बंटवारे का काम चल रहा है। पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में जल्द ही गतिविधियां तेज हो जाएंगी।  

'मोदी को हराएंगे, वह खुद लेते हैं भाषण मेंं 10 बार अपना नाम'

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रॉबर्ट वाड्रा के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : Facebook
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने खुद को देश, देश के संविधान, मर्यादा, परंपरा, संवैधानिक संस्थान, निकाय, संगठन सबसे ऊपर मान लिया है। वह अपने भाषणों में दस बार खुद अपना नाम लेने वाली राजनीति की अनोखी शख्सियत हैं। जबकि देश का किसान, मजदूर, गरीब, युवा, उद्योग, व्यापारी सब परेशान है। रोजगार का संकट है और विदेश नीति, रक्षा नीति गंभीर दौर से गुजर रही है।  कांग्रेस नेता के अनुसार प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष ने पिछले एक साल में एक के बाद एक कई मुद्दों को चुनाव को ध्यान में रखकर स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सबकी हवा निकल गई। 
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