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नई भाजपा, नया भारत और संकल्प पत्र का दिखा नया मिजाज
Mon, 08 Apr 2019 06:46 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक, अमर उजाला,नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला,नई दिल्ली
Published by: शशिधर पाठक
Updated Mon, 08 Apr 2019 06:46 PM IST
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भाजपा का घोषणापत्र जारी
- फोटो : ANI
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सोमवार को भाजपा ने अपना संकल्प पत्र -2019 पेश किया। यह मोदी सरकार का पहला संकल्प पत्र है। संकल्प पत्र की थीम ही नया भारत है और इसमें पहले पेज से अंतिम पेज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र की तस्वीर है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संकल्प पत्र समिति के अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी लेख के साथ हैं। लेकिन पार्टी के संस्थापक और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी स्थान नहीं पा सके हैं।
आडवाणी-जोशी के कार्यालय का कहना है कि उन्हें संकल्प पत्र जारी करने या फिर 6 अप्रैल को भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में आमंत्रित भी नहीं किया गया था। जानकारी के अनुसार संकल्प पत्र जारी होने से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का दोनों नेताओं (आडवाणी-जोशी) से मिलने का कार्यक्रम था।
घोषणापत्र अच्छा लेकिन चौंकाता नहीं
भाजपा का घोषणापत्र 2014 की तरह चौंकाने वाला नहीं है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़े-बड़े वादे नहीं किए हैं। छोटे दुकानदारों, किसानों को पेंशन जरूर एक नई बात है। नए भारत का सपना दिखाया है, लेकिन कालाधन वापस लाने, युवाओं के लिए हर साल रोजगार के अवसर का जिक्र नहीं है।
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किसानों और छोटे दुकानदारों को पेंशन देने का वादा करके भाजपा ने नोटबंदी, जीएसटी के बाद से निराश चल रहे वर्ग को अपने से जोड़ने की कोशिश की है। संकल्प पत्र में किसान के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये तक का कर्ज लेने पर उससे पांच साल तक कोई ब्याज न लेने और देश के गांव क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपये निवेश का वादा किया गया है।
2022 तक सभी कच्चे मकान वालों को पक्का मकान, सालाना किसानों छह हजार रुपये किसान सम्मान निधि के रूप में देने और 2022 तक उसकी आय दो-गुनी करने, अर्थव्यवस्था को धार देने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का वादा भी है। प्रधानमंत्री के भाषण और भाजपा के संकल्प पत्र में कांग्रेस के घोषणा पत्र की छाया भी साफ दिखाई दे रही है।
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आडवाणी-जोशी के कार्यालय का कहना है कि उन्हें संकल्प पत्र जारी करने या फिर 6 अप्रैल को भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में आमंत्रित भी नहीं किया गया था। जानकारी के अनुसार संकल्प पत्र जारी होने से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का दोनों नेताओं (आडवाणी-जोशी) से मिलने का कार्यक्रम था।
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घोषणापत्र अच्छा लेकिन चौंकाता नहीं
भाजपा का घोषणापत्र 2014 की तरह चौंकाने वाला नहीं है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़े-बड़े वादे नहीं किए हैं। छोटे दुकानदारों, किसानों को पेंशन जरूर एक नई बात है। नए भारत का सपना दिखाया है, लेकिन कालाधन वापस लाने, युवाओं के लिए हर साल रोजगार के अवसर का जिक्र नहीं है।
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किसानों और छोटे दुकानदारों को पेंशन देने का वादा करके भाजपा ने नोटबंदी, जीएसटी के बाद से निराश चल रहे वर्ग को अपने से जोड़ने की कोशिश की है। संकल्प पत्र में किसान के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये तक का कर्ज लेने पर उससे पांच साल तक कोई ब्याज न लेने और देश के गांव क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपये निवेश का वादा किया गया है।
2022 तक सभी कच्चे मकान वालों को पक्का मकान, सालाना किसानों छह हजार रुपये किसान सम्मान निधि के रूप में देने और 2022 तक उसकी आय दो-गुनी करने, अर्थव्यवस्था को धार देने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का वादा भी है। प्रधानमंत्री के भाषण और भाजपा के संकल्प पत्र में कांग्रेस के घोषणा पत्र की छाया भी साफ दिखाई दे रही है।
राष्ट्रवाद और देशभक्ति से बनेगा नया भारत
भाजपा के संकल्प पत्र में राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, सामुद्रिक सुरक्षा शीर्ष पर है। इसे मोदी सरकार के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन बालाकोट-2019 के बाद जनता के बीच में मोदी सरकार के उभरे प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा एक बार फिर गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बने संकल्प पत्र में पुलिस आधुनिकीकरण, तटरक्षक बलों के आधुनिकीकरण, सैन्य क्षमता बढ़ाने, तीनों, सेनाओं को मजबूत करने और किसी भी कीमत पर आतंकवाद को सहन न करने को प्रमुखता दी है। संकल्प पत्र में राष्ट्र प्रथम को ही मूल मंत्र के रूप में अपनाया गया है।
राम मंदिर से बताया लगाव
भाजपा ने अपने मुख्य मुद्दों को भी छोड़ा नहीं है। राम मंदिर आम सहमति या संवैधानिक दायरे में रहकर संभव तरीके से इसे बनवाने का विकल्प अपनाया है। भाजपा की पांच साल तक केंद्र, उत्तर प्रदेश समेत देश के दर्जन भर राज्यों में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी अब पार्टी अपने मंदिर वहीं बनाएंगे के पुराने नारे से थोड़ा समझौतावादी होती दिखाई दे रही है। नागरिकता संशोधन विधेयक को कानून का दर्जा देना, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और धारा 35-ए को खत्म करने के प्रति एक बार फिर संकल्प दिखाया है।
भाजपा एक बार फिर गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बने संकल्प पत्र में पुलिस आधुनिकीकरण, तटरक्षक बलों के आधुनिकीकरण, सैन्य क्षमता बढ़ाने, तीनों, सेनाओं को मजबूत करने और किसी भी कीमत पर आतंकवाद को सहन न करने को प्रमुखता दी है। संकल्प पत्र में राष्ट्र प्रथम को ही मूल मंत्र के रूप में अपनाया गया है।
राम मंदिर से बताया लगाव
भाजपा ने अपने मुख्य मुद्दों को भी छोड़ा नहीं है। राम मंदिर आम सहमति या संवैधानिक दायरे में रहकर संभव तरीके से इसे बनवाने का विकल्प अपनाया है। भाजपा की पांच साल तक केंद्र, उत्तर प्रदेश समेत देश के दर्जन भर राज्यों में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी अब पार्टी अपने मंदिर वहीं बनाएंगे के पुराने नारे से थोड़ा समझौतावादी होती दिखाई दे रही है। नागरिकता संशोधन विधेयक को कानून का दर्जा देना, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और धारा 35-ए को खत्म करने के प्रति एक बार फिर संकल्प दिखाया है।
जन आकांक्षाओं की सरकार चलाएंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य के लिए नरेटिव भी बदला है। उन्होंने कहा कि 2014-2019 तक की सरकार उन्होंने मानवीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर चलाई थी। इस सरकार ने इन्हीं पहलुओं को केन्द्र में रखकर काम किया है। उन्होंने कहा कि यह संकल्प पत्र, सुशासन पत्र, राष्ट्र की सुरक्षा पत्र, राष्ट्र का समृद्धि पत्र भी है। यह जन आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार हुआ है। उनकी सरकार देश से भ्रष्टाचार को खत्म करेगी और 2019-2024 तक जन आकांक्षाओं को पूरा करने का काम करेगी।
गरीबी का नारा...
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक नारा भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है। संकल्प पत्र जारी करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस पार्टी पर तंज कसना नहीं भूले। उनके इस तंज में राहुल गांधी का नारा-गरीबी पर वार, 72 हजार का असर नजर आ रहा था। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि एसी (वातानुकूलित) कमरों में बैठने वाले देश के गरीबों की गरीबी नहीं दूर कर सकते। गरीबों की गरीबी कोई गरीब ही दूर कर सकता है। ये हमारा मंत्र है और इसलिए हमने राष्ट्र के सशक्तीकरण पर बल दिया है।
गरीबी का नारा...
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक नारा भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है। संकल्प पत्र जारी करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस पार्टी पर तंज कसना नहीं भूले। उनके इस तंज में राहुल गांधी का नारा-गरीबी पर वार, 72 हजार का असर नजर आ रहा था। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि एसी (वातानुकूलित) कमरों में बैठने वाले देश के गरीबों की गरीबी नहीं दूर कर सकते। गरीबों की गरीबी कोई गरीब ही दूर कर सकता है। ये हमारा मंत्र है और इसलिए हमने राष्ट्र के सशक्तीकरण पर बल दिया है।