केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के सामने ये है बड़ी चुनौती, आसान नहीं होगी नोएडा से लोकसभा की राह
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दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गौतमबुद्धनगर (नोएडा) लोकसभा सीट काफी महत्त्वपूर्ण सीट मानी जाती है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के सबसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो जाने के कारण लगभग बीस लाख आबादी वाला नोएडा हर राजनीतिक दल की प्राथमिकता में रहता है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा यहां से मौजूदा सांसद हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में उन्हें लगभग छह लाख वोट मिले थे और अपने नजदीकी सपा उम्मीदवार नरेंद्र भाटी को उन्होंने दो लाख अस्सी हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। एक बार फिर वे अपनी किस्मत आजमाने के लिए 2019 लोकसभा चुनाव में नोएडा से मैदान में हैं। उनका मुकाबला सपा-बसपा के साझे उम्मीदवार सतबीर नागर और कांग्रेस के अरविंद कुमार सिंह से है। इस बार नोएडा की लड़ाई त्रिकोणीय मानी जा रही है।
महेश शर्माः छवि में मजबूत, क्षेत्र में पीछे
भाजपा नेता महेश शर्मा पेशे से एक डॉक्टर हैं और इसी क्षेत्र में उनका अस्पताल काफी अच्छी सुविधाओं के साथ लोगों की सेवा कर रहा है। इस अस्पताल पर डॉं. महेश शर्मा मरीजों के साथ-साथ स्थानीय लोगों से भी हमेशा मिलते हैं और उनकी सहज उपलब्धता, मिलनसारिता और सादगीपूर्ण व्यवहार उनकी सबसे बड़ी ताकत है। नोएडा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा किये गए कामकाज, इस क्षेत्र में आई मेट्रो सुविधा, कई बड़ी फैक्ट्रियों की शुरुआत उनकी बड़ी ताकत है।
नोएडा शहरी क्षेत्र की ज्यादातर आबादी प्रवासी पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स की है और उनके बीच महेश शर्मा की साख बेहतर है। शहरी क्षेत्र ज्यादा होने के कारण राष्ट्रीय मुद्दा यहां लोगों की प्राथमिकता में बताया जाता है जिसका सीधा लाभ महेश शर्मा को मिल सकता है। इसके अलावा एक ब्राह्मण चेहरे के रूप में भी वे ग्रामीण ब्राह्मण मतदाताओं की पसंद बन सकते हैं जो यहां ठीक-ठाक संख्या में रहते हैं। भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल के मुताबिक हमारी सबसे बड़ी चुनौती पॉश-शहरी मतदाता को उनके घरों से निकालकर मतदान केंद्रों तक ले जाना है।
सतबीर नागरः गूजर-जाट वोटों के बड़े दावेदार
नोएडा की लगभग पचास फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र की है। दादरी, खुर्जा और जेवर पूरी तरह ग्रामीणों की बहुलता वाला क्षेत्र है। बताया जाता है कि गूजर और जाट बहुलता वाला यह क्षेत्र सतबीर नागर का प्रमुख गढ़ है। वे स्वयं अढ़ता गुजरां के हैं और इसलिए स्थानीय नेता होने के नाते इन वोटों के प्रबल दावेदार हैं।
वर्ष 2009 में नोएडा से जीत दर्ज कर लोकसभा पहुंच चुके सतबीर नागर के करीबी सुरेंद्र सिंह नागर के अपने पुराने किए हुए काम और स्थानीय संबंध सतबीर नागर की बड़ी मजबूती बताई जाती है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे भाजपा नेता महेश शर्मा को वे कड़ी टक्कर दे सकते हैं।
अरविंद कुमार सिंह को ठाकुर वोटों का भरोसा
कांग्रेस के उम्मीदवार डॉं अरविंद कुमार सिंह यहां से अकेले ठाकुर उम्मीदवार हैं और क्षेत्र की कुछ ठाकुर आबादी उनके पक्ष में वोट कर सकती है। इसके अलावा क्षेत्र की मुस्लिम आबादी के वोट पर भी उनका अच्छा अधिकार बताया जा रहा है।
हालांकि, अरविंद कुमार सिंह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा 72000 रुपयों न्यूनतम आय की घोषणा का जमकर प्रचार कर रहे हैं और वे पश्चिम के गरीब मतदाताओं में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन भाजपा और सपा-गठबंधन के मजबूत समीकरणों के बीच अपनी उपस्थिति कितनी मजबूत कर पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।