Lok Sabha Election: क्या यूपी में सपा-कांग्रेस का खेल बिगाड़ेगी BSP? मजबूत माना जा रहा था 'तीन का गठबंधन'
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विस्तार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर एलान किया कि वह बगैर गठबंधन के ही सियासी मैदान में उतरने जा रहीं हैं। दरअसल बीते कुछ दिनों से सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही थीं कि मायावती समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन समूह I.N.D.I गठबंधन का हिस्सा हो जाएंगी। क्योंकि कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं के माध्यम से संपर्क कर गठबंधन में आने की बात की थी। अब जब मायावती ने एक बार फिर खुलकर किसी भी राजनीतिक दल से गठबंधन न करने की बात की है, तो माना जा रहा है कि क्या मायावती गठबंधन समूह I.N.D.I का खेल बिगाड़ने वाली हैं। क्योंकि सपा बसपा और कांग्रेस के सियासी गठबंधन को चुनावी नजरिए से बेहद मजबूत माना जा रहा था। फिलहाल अब इस फैसले के बाद मायावती जल्द ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। इसके लिए बाकायदा पार्टी आकाश आनंद की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को टक्कर देने के लिए I.N.D.I गठबंधन समूह में बहुजन समाज पार्टी के भी शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे। चर्चा इस बात की थी कि अगर बहुजन समाज पार्टी इस समूह में शामिल हो जाती है, तो मुस्लिम और दलितों के बड़े बिखराव को रोका जा सकता है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि सपा, बसपा और कांग्रेस का गठबंधन होता तो निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश में सियासत की एक दूसरी तस्वीर सामने आ सकती है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि दरअसल यह कयास इसलिए भी लगाए जा रहे थे कि बहुजन समाज पार्टी के 2014 और 2019 के वोट प्रतिशत क्रमशः शून्य और दस सीटों पर तकरीबन बराबर रहे थे। ऐसे में अगर सपा बसपा और कांग्रेस मिलकर सियासी मैदान में उतरती, तो बसपा के 19 फीसदी वोटों से कई सियासी समीकरण साधे जा सकते थे।
सियासी जानकारों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी जिस तरह मुस्लिम और दलित प्रत्याशियों पर दांव लगा रही है, उससे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सियासी गणित बिगड़ सकती है। राजनीतिक विश्लेषक नसरुद्दीन सिद्दीकी का मानना है कि बसपा ने मुस्लिम और दलित समुदाय समेत पिछड़ों पर पूरा फोकस करते हुए टिकट बंटवारे की तैयारी की है। पिछले कुछ चुनाव में भी इसी जातिगत समीकरण को साधते हुए बसपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। ऐसे में इस लोकसभा चुनाव में भी अगर बसपा इस तरह प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मतदाताओं में सेंधमारी हो सकती है। जो कि सियासी नजरिए से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस इन परिस्थितियों को भांपते हुए बसपा के साथ कदमताल करने को तैयार थी।
हालांकि सूत्रों के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी से समझौते को लेकर समाजवादी पार्टी पक्षधर नहीं थी। समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं ने इस बात का जिक्र भी किया कि बहुजन समाज पार्टी के साथ समझौते में उसका वोट ट्रांसफर नहीं हो सकता। पार्टी के नेताओं ने 2019 के चुनाव में इसका उदाहरण बताते हुए अंदरूनी विरोध भी किया था। समाजवादी पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सपा और बसपा का गठबंधन हुआ, तो समाजवादी पार्टी का वोट बहुजन समाज पार्टी को गया। नतीजतन 2014 की तुलना में 2019 में कम सीटों पर लड़ने के बाद भी बसपा शून्य से 10 सीटों पर आ गई। जबकि समाजवादी पार्टी को उसका कोई फायदा नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक ऐसी तमाम दलीलों के बाद भी कांग्रेस पार्टी के नेता बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर लगातार प्रयासरत थे। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि दरअसल पार्टी मुस्लिम वोटों के बिखराव को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। यही वजह थी कि वह बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के लिए संपर्क में थी।
सियासी जानकारों का मानना है कि भले ही बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में शामिल होने की बात की जा रही हो, लेकिन मायावती ने अमरोहा से प्रत्याशी उतार कर स्पष्ट कर दिया था कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला। दरअसल अमरोहा से बहुजन समाज पार्टी ने गुरुवार को ही डॉक्टर मुजाहिद हुसैन उर्फ बाबू भाई को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। क्योंकि अमरोहा से बहुजन समाज पार्टी के निलंबित सांसद दानिश अली I.N.D.I गठबंधन से सीट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। ऐसे में यह कयास पहले ही लगाए जा रहे थे कि ऐसी कई अन्य सीटों पर सियासी तालमेल कैसे बनेगा। अब मायावती ने एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि वह गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ने जा रही हैं। मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि बीएसपी देश में लोकसभा का आम चुनाव अकेले अपने बलबूते पर पूरी तैयारी व दमदारी के साथ लड़ रही है। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी गठबंधन या तीसरा मोर्चा बनाने की मीडिया अफवाह फैला रहा है।
बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मायावती जल्द ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। इसके लिए अगले कुछ दिनों मायावती आकाश आनंद के साथ कुछ जोनल कोऑर्डिनेटर की महत्वपूर्ण बैठक करने वाली हैं। पहले चरण में मायावती उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ दक्षिण के कुछ प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक मायावती पिछले सप्ताह ही प्रत्याशियों की घोषणा करने की तैयारी में थीं। लेकिन इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया था। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि प्रत्याशियों की घोषणा न होने के चलते ही बसपा के समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से गठबंधन की चर्चा होने लगी। इस चर्चा में बहुजन समाज पार्टी को अपने वोटर के बीच में पहुंच रहे संदेश से नुकसान होता हुआ नजर आ रहा था। यही वजह है कि बसपा ने फिलहाल स्थिति को स्पष्ट करते हुए गठबंधन में न जाने की बात कही है।