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भाजपा के बागियों से कीर्ति-सुबोध को राहत तो जयंत को आजसू ने दी ताकत

Sat, 04 May 2019 10:57 PM IST
Gaurav Pandey विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Sat, 04 May 2019 10:57 PM IST
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Lok Sabha Election : Revels of BJP can give relief to Kirti and Subodh

झारखंड की तीन लोकसभा सीटों धनबाद, हजारीबाग और रांची में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला होने के साथ साथ यहां दोनों दलों तीन प्रमुख नेताओं की राजनीतिक किस्मत का फैसला होना है। हजारीबाग में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा अपनी परिवारिक विरासत के बावजूद कांग्रेस के गोपाल साहू के साथ कड़े मुकाबले में हैं।

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वहीं धनबाद में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद यहां से तीसरी बार मैदान में डटे भाजपा के पशुपति नाथ  सिंह को चुनौती दे रहे हैं। जबकि राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष संजय सेठ भाजपा के टिकट पर कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय को टक्कर दे रहे हैं। धनबाद और रांची में भाजपा के बागी उम्मीदवार पार्टी का सिरदर्द बढ़ा रहे हैं।
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पहले बात धनबाद की। कोयले की खदानों के लिए मशहूर धनबाद में एक समय कोयला माफिया की दबंगई और जुझारू मजदूर नेता एके राय के बीच राजनीतिक मुकाबले का इतिहास था। तब एके राय आदिवासियों और मजदूरों की ताकत के बल पर निर्दलीय चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचते थे। लेकिन वक्त बदला और मजदूर आंदोलन खत्म हुआ और मजदूर भी जातियों और संप्रदायों में बंट गए। कांग्रेस भी कमजोर हुई और उसकी जगह भाजपा ने ली।
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भाजपा के मौजूदा सांसद पशुपति नाथ सिंह यहां से लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और तीसरी बार फिर मैदान में हैं। सिंह की छवि एक भले और शरीफ राजनेता की है और आम लोगों को उनसे कोई शिकायत नहीं है। स्थानीय जातीय समीकरण भी उनके मुफीद हैं। लेकिन कांग्रेस ने यहां उन कीर्ति आजाद को उतारा है जो न सिर्फ भाजपा के बागी हैं, बल्कि बिहार के दिग्गज राजनेता रहे भागवत झा आजाद के बेटे हैं।

धनबाद की भूली बस्ती जिसे एशिया की सबसे बड़ी मजदूर बस्ती कहा जाता है, वहां रामबली से मुलाकात होती है। रामबली के मुताबिक भाजपा के पीएन सिंह की राह आसान है और कीर्ति आजाद बाहरी हैं और देर से चुनाव में उतरे हैं। भाजपा ओबीसी मोर्चे की जिला इकाई के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता का भी यही कहना है। 

लेकिन तस्वीर का एक दूसरा रुख यह भी है कि कीर्ति आजाद को अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और पूर्व क्रिकेटर के साथ साथ लंबे समय तक भाजपा में रहने का फायदा मिल रहा है। धनबाद में ब्राह्मणों की खासी तादाद है और लंबे समय बाद एक सजातीय उम्मीदवार मैदान में है। धनबाद के ही रहने वाले रवि झा कहते हैं कि कीर्ति की तरफ ब्राह्मणों का झुकाव बढ़ रहा है। साथ ही उनके साथ मुस्लिम, आदिवासी और ईसाई मतदाता भी हैं। इसलिए मुकाबला कांटे का है। 

साथ ही धनबाद के प्रभावशाली परिवार सिंह मेशंस के मनीष सिंह उर्फ सिद्धार्थ गौतम निर्दलीय मैदान में हैं। मनीष के भाई संजीव सिंह झरिया से भाजपा विधायक हैं और इन दोनों का ताल्लुक एक जमाने में कोयले की सियासत के सबसे दबंग नाम सूरजदेव सिंह के परिवार से है। कीर्ति और उनके समर्थक इसे अपने लिए एक अवसर मान रहे हैं।कुल मिलाकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

कुछ यही तस्वीर रांची की दिखती है जहां भाजपा के बागी पूर्व सांसद रामटहल चौधरी के निर्दलीय मैदान में होने से भाजपा के संजय सेठ की मुश्किल बढ़ गई है। सेठ का मुकबला कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय से है जो पहले यहां सांसद रह चुके हैं और पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। जबकि संजय सेठ पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। सेठ के साथ भाजपा की ताकत और पूरे एनडीए का समर्थन है। 

कुछ इसी तरह सहाय के साथ भी कांग्रेस के अलावा महागठबंधन के दलों की ताकत है।सेठ को भाजपा के परंपरागत जनाधार के साथ पंजाबी और वैश्य समुदाय के समर्थन का पूरा भरोसा है तो सुबोध को सजातीय कायस्थ बिरादरी के अलावा ईसाई, मुस्लिम,दलित और आदिवासियों से समर्थन मिलने की उम्मीद है। 

भाजपा के बागी रामटहल चौधरी लगातार तीन बार यहां से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। क्षेत्र की कुर्मी बिरादरी उनके पीछे एकजुट होने का दावा उनके समर्थक करते हैं। उम्र सीमा के चलते उनका टिकट काट दिया गया, लेकिन चौधरी के निर्दलीय मैदान में आने से मुकाबला तिकोना हो गया है।

हजारीबाग में जयंत सिन्हा के सामने किसी बागी उम्मीदवार की चुनौती नहीं है। जयंत 2014 में यहां से जीते थे, उसके पहले उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा सांसद रहे हैं। यशवंत सिन्हा भाजपा से बगावत कर चुके हैं और लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। जयंत के मुकाबले कांग्रेस के गोपाल साहू हैं जिनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी साहू बिरादरी की तादाद सबसे ज्यादा होना है। साथ ही मुस्लिम और ईसाई समुदाय के समर्थन का भी उन्हें पूरा भरोसा है। 

लेकिन जयंत सिन्हा को झारखंड के इलाकाई दल आजसू का पूरा समर्थन है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की चुनावी सभा में भाजपा की टोपी और स्कार्फ पहने विभन सिंह, अनुज तिवारी, बबलू मोदी और पिंटू चौधरी से बात होती है। चारों ही भाजपा के नहीं आजसू के कार्यकर्ता हैं। 

विभन सिंह कहते हैं कि हालाकि जयंत सिन्हां ने क्षेत्र को उतना समय नहीं दिया जितना एक सांसद को देना चाहिए, लेकिन हम सब आजसू के कार्यकर्ता और समर्थक उनका पुरजोर समर्थन कर रहे हैं क्योंकि आजसू का भाजपा से गठबंधन है और हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है।

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