पीएम मोदी की नसीहत, मंत्री बनने का ऑफिशियल कॉल भी आए तो वैरिफाई करें...15 बड़ी बातें
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एनडीए बैठक में आज नरेंद्र मोदी को सर्वसम्मति से एनडीए संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। उनके नाम का प्रस्ताव बिहार के सीएम व जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने रखा। इसके बाद एनडीए नेताओं ने इसका अनुमोदन किया। पीएम मोदी ने अपने भाषण में सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास का नारा देते हुए नए सांसदों को कई नसीहतें दीं। भाषण से पहले उन्होंने संविधान की किताब को प्रणाम किया। आपको बता रहे हैं पीएम मोदी की बड़ी बातें।
-विजयोत्सव बेहद शानदार था। पूरी दुनिया में जीत का उत्सव मनाया गया। पूरी दुनिया भारत का चुनाव देख रही थी। नई ऊर्जा, नई उमंग के साथ आगे बढ़ना है। पूरे विश्व में फैले भारतीयों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया, यह भी अपने आप में हम सबके लिए गर्व का अवसर है। इस उत्सव मनाने वाले, सभी का अभिनंदन करता हूं।
-प्रचंड जनादेश जिम्मेदारियों को और बढ़ा देता है। नई नीतियों, उत्साह के साथ हमें आगे बढ़ना है। भारत के लोकतंत्र को हमें समझना होगा, भारत का लोकतंत्र, मतादाता, नागरिक उसका जो विवेक है, शायद किसी मानदंड से उसे मापा नहीं जा सकता है।
-बड़े से बड़े सत्ता सामर्थ्य को सेवाभाव से स्वीकार करता है। जनता ने हमें स्वीकार किया है सेवाभाव के कारण। सत्ता के गलियारों में रहने के बावजूद सत्ता भाव नहीं सेवा भाव करने के लिए हमें तैयार करना होगा। सत्ता भाव सिमटता जाएगा तो जनता का आशीर्वाद बढ़ता जाएगा।
-आज एनडीए के सभी वरिष्ठों ने मुझे नेता के रूप में चुना है, मैं इस व्यवस्था का हिस्सा मानता हूं। मैं भी आपमें से एक हूं, आपके बराबर हूं, हमें कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। एनडीए की यही विशेषता है। अगर एक कंधा कमजोर पड़ जाए तो दूसरा उसे संभाल ले।
-इस चुनाव में बहुत बड़ी विशेषता रही। आचार्य विनोभा भावे कहते थे, चुनाव बांध होता है, दूरियां पैदा करता है, खाई पैदा करता है। लेकिन 2019 चुनाव ने दीवारों को तोड़ने का काम किया, दिलों को जोड़ने का काम किया है।
-2014 में जनता ने भी कंधे पर भार उठाया, अन्यथा 2014 में एक नया प्रधानमंत्री कहता है गैस सब्सिडी छोड़ दो, और जनता ने ऐसा किया। यानी जनता ने भी देश को चलाया है। जनता ने नए युग की शुरुआत की है।
-सत्ता विरोधी रुझान स्वभाविक होता है। विश्वास की डोर जब मजबूत होती है तब प्रो इंकम्बेंसी वेब शुरू होती है। ये विश्वास की डोर से बंधा हुआ है।
-फिर से सरकार को लाना, फिर जिम्मेदारी देना, एक सकारात्मक सोच है, इतना बड़ा जनादेश दिया है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पंडित हैं उनका चित्र अभी साफ नहीं है, जब शांत मन से सोचेंगे तो पाएंगे कि इसका क्या अर्थ है।
-जनप्रतिनिधि के लिए कोई भेद रेखा नहीं हो सकती है, जो हमारे साथ थे हम उनके लिए जीते हैं, जो हमारे साथ होंगे उनके लिए जीते हैं, जिनका विश्वास जीता है उनके लिए जीते हैं। सबका साथ सबका विकास पूरे विश्व ने सीखा है। जनप्रतिनिधियों से मेरा आग्रह है कि अब हमारा कोई पराया नहीं हो सकता है। दिलों को जीतने की कोशिश करें।
-कोई वर्ग विशेष हमें नहीं जिताता है, मोदी हमें नहीं जिताता है। हमें सिर्फ देश की जनता जिताती है।
-इस देश में कई ऐसे नरेंद्र मोदी बैठ गए हैं जिन्होंने मंत्रिमंडल बना दिया है, ये सबसे बड़ा संकट है। मंत्री बनाने के नाम पर किसी के बहकावे में नहीं आइए। मीडिया वाले जो नाम चला रहे हैं भेद पैदा करने, अफवाह फैलाने के लिए, बदइरादे से कर रहे हैं। दायित्व बहुत कम लोगों को ही दे सकते हैं, कोई पहुंच जाए कि मेरा खास है, कर देता हूं। फोन करके कहते हैं कि मंत्री बना दिया है, आफिशियल कॉल भी आए जाए तो वैरिफाई करें।
#WATCH PM Narendra Modi says, "Desh mein bahot aise Narendra Modi paida ho gaye hain jinhone mantri mandal bana diya hai. Sabka total lagayenge to shayad 50 MP reh jayenge jo mantri ki list mein nahi ayenge." pic.twitter.com/fywCeDGEzi
— ANI (@ANI) May 25, 2019
-दुनिया में कुछ भी ऑफ द रिकॉर्ड नहीं होता, कुछ भी कहने से पहले अच्छी तरह सोच लें।
-लोग अब सेवा भाव से आएंगे। कहेंगे...अरे आप वहां से जीतकर आए हैं, आइए आइए, मेरी गाड़ी में बैठिए। जो सेवा भाव से आते हैं, उनकी सेवा से सावधान रहिए।
-दो चीजों से बचना चाहिए छपास और दिखास, अखबारों पर छपने और टीवी पर दिखने से बच सकते हैं तो बहुत कुछ कर सकते हैं।
-लाल बत्ती हटाना बहुत बड़ा कदम था। कोई कहता है चेंकिग क्यों कर रहे हो, मैं सांसद हूं, क्यों नहीं चेकिंग हो, हम भी सामान्य नागरिक हैं। युग बदल चुका है, जनता सचेत है, हमें अपने आप को बदलना होगा। सामान्य बर्ताव करना होगा, हमारे मनोहर पर्रिकर की पहचान ही उनकी सादगी थी। वीआईपी कल्चर से हमें बचना होगा।