Lok Sabha Elections 2024: जल्दी हुए लोकसभा चुनाव तो फायदा किसे? जानें नीतीश कुमार को क्यों है इस बात का अंदेशा
Lok Sabha Election 2024: राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं। वे भाजपा की रीति-नीति और नीयत को सबसे बेहतर ढंग से समझते हैं। वे कभी हल्के अंदाज में कोई बात नहीं कहते और उनकी बातों के हमेशा गंभीर मायने होते हैं...
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव इसी साल के अंत में कराए जाने की आशंका जताई है। इसके बाद से ही राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। भाजपा नेता जहां नीतीश कुमार के इस बयान पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार की लोकप्रियता में लगातार कमी आ रही है और वह हड़बड़ी में समय से पहले चुनाव करा सकती है।
केंद्र सरकार लगातार अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है। माना जा रहा है कि वह जल्द से जल्द जनता के पास सही संदेश बनाकर एक माहौल बनाकर चुनाव में उतरने की कोशिश कर सकती है। पार्टी के केंद्रीय इकाई के नेता जिस तरह लगातार बैठकें कर रहे हैं, उससे भी पार्टी की बड़े स्तर की तैयारी का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सरकार समय से पहले चुनाव करा सकती है।
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क्यों उठी ये बात
नीतीश कुमार ने अपने अधिकारियों के साथ एक मीटिंग के दौरान बुधवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि वे योजनाओं को जल्द पूरा करें और सभी योजनाओं पर राज्य सरकार के द्वारा कराए जाने की पूरी जानकारी लिखें, जिससे जनता में इसका सही संदेश दिया जा सके। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव समय से पहले भी कराए जा सकते हैं।
आशंका सही नहीं
हालांकि, इन आशंकाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह राजनीतिक शिगूफा है और सरकार अभी इस तरह की कोई तैयारी नहीं कर रही है। विशेषकर यह देखते हुए कि जब पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार कम समय में भी कई बार पूरा नैरेटिव बदलने की हैसियत रखती है, वह समय से पहले चुनाव कराने की गलती नहीं करेगी।
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि अब तक के कई सर्वे यह बता रहे हैं कि सरकार लगातार लोकप्रिय बनी हुई है। आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर दी है। कई सर्वे भी इस बात को प्रमाणित करते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कोई गिरावट नहीं हुई है, उलटे वह लगातार लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में सरकार समय से पहले चुनाव कराने की कोई गलती नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि एक पल के लिए यह मान लिया जाए कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट आ रही तो भी चुनाव कराने की आशंका सही साबित नहीं होती है। ऐसी स्थिति में सरकार अच्छे कार्य कर अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने की कोशिश करेगी। केंद्र सरकार के पास नई योजनाओं के जरिए अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय है। ऐसे में इस बात की आशंका कम है कि सरकार समयपूर्व चुनाव कराए।
गंभीर बयान देते हैं नीतीश
राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं। वे भाजपा की रीति-नीति और नीयत को सबसे बेहतर ढंग से समझते हैं। वे कभी हल्के अंदाज में कोई बात नहीं कहते और उनकी बातों का हमेशा गंभीर मायना होता है। इसे देखते हुए माना जाना चाहिए कि उन्हें कुछ संकेत मिले हैं तभी वे इस तरह के बयान दे रहे हैं।
सरकार की विदाई तय
आरजेडी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार कई मोर्चों पर घिरी हुई है। आर्थिक मामलों में स्थिति लगातार खराब हो रही है और महंगाई-बेरोजगारी से जनता त्रस्त है। भाजपा यह देख रही है कि उसका दांव काम नहीं कर रहा है और उसकी लोकप्रियता में लगातार कमी आ रही है। ऐसे में वह अपना ज्यादा नुकसान होने से रोकने के लिए समय से पहले चुनाव करा सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार समय से पहले चुनाव कराए या अगले वर्ष अप्रैल-मई महीने में, उसकी विदाई तय है।
नीतीश समझते हैं भाजपा की नब्ज
नीतीश विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक और जनता दल यूनाइटेड के नेता सत्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री उस अटल सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जिसने समय से पहले चुनाव कराया था। वे भाजपा नेताओं की हर चाल और बयान को ज्यादा बेहतर ढंग से समझते हैं। यही कारण है कि चुनाव को लेकर दिए गए उनके बयान को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। 2004 में इसी तरह समय से पहले चुनाव करा चुकी भाजपा यदि इस बार भी समय से पहले चुनाव कराती है, तो इस पर किसी को कोई आश्चर्य नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस तरह का निर्णय हमेशा हड़बड़ी में लिए जाते हैं। यदि सरकार इस तरह का काम करती है तो उसे इसका भी नुकसान झेलना पड़ सकता है। हालांकि, सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि जितना समय बीतेगा, सरकार उतना ही परेशानी में फंसती हुई दिखाई पड़ रही है।