मध्य प्रदेश में 8 सीटों पर कांटे की लड़ाई, किसान तय करेंगे जीत-हार
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मध्यप्रदेश की 8 लोकसभा सीटों इंदौर, देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, खंडवा, खरगोन और धार के लिए रविवार को वोट डाले जाएंगे। 2014 में ये आठों सीटें भाजपा के खाते में गईं, लेकिन इनमें से एक रतलाम-झाबुआ को कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने उपचुनाव में जीत लिया था। इस बार मालवा-निमाड़ क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की लड़ाई है। दोनों दलों ने पूरी ताकत लगाई है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियां और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो हुए हैं। वहीं कांग्रेस ने भी अध्यक्ष राहुल गांधी की कई सभाएं कराईं। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने भी मालवा के केंद्र इंदौर में रोड शो कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
राउंडअपः अभी सात सीटें भाजपा के पास
इंदौर : 30 साल से भाजपा, इस बार संघर्ष
30 साल से यह सीट भाजपा के पास है। संघ के इस गढ़ में पार्टी ने सुमित्रा महाजन का टिकट काटकर शंकर लालवानी को उतारा है। पार्टी काडर ने शंकर की उम्मीदवारी को सहज रूप में नहीं लिया। इसीलिए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल को इंदौर आना पड़ा। कांग्रेस के पंकज संघवी पिछली बार सुमित्रा महाजन से कांटे की टक्कर में करीब 50 हजार मतों से हार गए थे। इस बार उनके लिए यह चुनाव ‘अभी नहीं तो कभी नहीं है।’
धार : इस बार भील या भिलाला
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। आठ में से छह सीटें बड़े अंतर से जीती थीं। लेकिन यहां कांग्रेस उम्मीदवार दिनेश गिरवाल का भील जाति से होना दिक्कत दे रहा है। पार्टी कोई भी हो, अब तक यहां जीत भिलाला प्रत्याशी की ही हुई है। वहीं भाजपा उम्मीदवार छतर सिंह दरबार पहले भी धार से सांसद रहे हैं। वह मोदी के भरोसे हैं। जिन किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ, वे कांग्रेस से नाराज हैं।
रतलाम-झाबुआ : जिन्ना पर बोल वाले डामोर के सामने भूरिया
यूपीए सरकार में मंत्री रहे व मौजूदा कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया के सामने भाजपा के जीएस डामोर हैं। डामोर झाबुआ से विधायक हैं और विधानसभा चुनाव में भूरिया के बेटे को हरा चुके हैं। जिन्ना प्रधानमंत्री बनते तो देश के दो हिस्से नहीं होते, हाल ही यह बयान देकर डामोर देश में सुर्खियों में रहे। इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। आदिवासियों का पलायन, पेयजल की समस्या और खराब सड़कें मुद्दे हैं।
खरगोन : लाल मिर्च इस बार किसे रुलाएगी
लाल मिर्च की पैदावार के लिए पहचानी जाने वाली आदिवासी बाहुल्य सीट खरगोन पर भाजपा ने मौजूदा सांसद सुभाष पटेल का टिकट काटकर नए चेहरे गजेंद्र पटेल को उतारा है। वहीं कांग्रेस से डॉ. गोविंद सिंह मुजालदा मैदान में हैं। आठ विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक भाजपा के पास है। बेरोजगारी की वजह से लोग गुजरात व महाराष्ट्र पलायन करते हैं, रेल मार्ग की मांग है। कमलनाथ के तीन मंत्री इस इलाके से आते हैं।
खंडवा : किशोर की जन्मस्थली पर उलझे हैं सुर-ताल
मशहूर गायक किशोर कुमार की जन्मस्थली खंडवा में एक तरफ भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव। दोनों एक-दूसरे को पहले हरा चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों कलह से जूझ रही हैं। इस बार नतीजा क्या होगा, कहना मुश्किल है।
उज्जैन : इस बार महाकाल का आशीर्वाद किसे
महाकाल की नगरी उज्जैन में भाजपा-कांग्रेस दोनों के ही नए उम्मीदवार हैं और दोनों ही अपने लोगों से परेशान हैं। भाजपा ने चिंतामणि मालवीय का टिकट काटकर अनिल फिरोदिया और कांग्रेस ने बापूलाल मालवीय को उतारा है। फिरोदिया विधानसभा का चुनाव हार गए थे। मालवीय अभी तक कांग्रेसियों के ही उम्मीदवार नहीं बन पाए हैं।
मंदसौर : क्या इस बार मन बदलेंगे किसान
किसान आंदोलन की गवाह रही इस सीट पर भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता के सामने कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन हैं। मीनाक्षी एक बार जीती हैं। विधानसभा चुनाव से पहले यहां किसानों पर पुलिस फायरिंग और मौतों के बाद भी ग्रामीणों ने भाजपा को जमकर वोट दिए थे। कांग्रेस इस बार कर्जमाफी से उम्मीद लगाए है।
देवास-शाजापुर : कबीरपंथी और पूर्व जज में से कौन
इस बार कांग्रेस और भाजपा ने गैर राजनीतिक चेहरों पर दांव लगाया है। सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के प्रह्लाद टिपानिया की है। पद्मश्री से अलंकृत लोकगायक टिपानिया कबीर के भजन गाने के लिए विख्यात हैं। भाजपा ने भी पार्टी के पुराने चेहरों पर भरोसा करने के बजाय सिविल जज की नौकरी छोड़कर आए महेंद्र सोलंकी को मौका दिया है। संघ की पृष्ठभूमि उनके साथ है।