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लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में अपने जीतेंगे या अपनों की चुनौती ले डूबेगी

Sun, 05 May 2019 02:29 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 05 May 2019 02:29 AM IST
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Lok sabha Election 2019: Ram Vilas Paswan brother in Contest, RJD disturbs Lalu sons
राम विलास पासवान (फाइल फोटो)

हाजीपुर जितना केलों की खेती के लिए जाना जाता है, यह संसदीय क्षेत्र उतना ही रामविलास पासवान के लिए  भी जाना जाता है। पासवान के नाम यहां गिनीज वर्ल्ड बुक में सबसे अधिक अंतर से जीतने का रिकॉर्ड दर्ज है। 11 में से आठ बार यहां से जीतने वाले पासवान ने इस बार छोटे भाई व लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपाति पारस पर दांव खेला है। अलौली सीट से विधायक पारस को आरजेडी में अंदरूनी खींचतान से फायदे की उम्मीद है। पर, खुद उन्हें अपनों से मिल रही चुनौती से भी पार पाना है। 

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यहां के मतदाताओं ने रामविलास पासवान को 1977 से अब तक आठ बार जिताया। तीन बार वो चुनाव हारे भी लेकिन जब भी जीते बड़े अंतर से ही जीते। लोजपा से टिकट न मिलने पर वैशाली से वर्तमान सांसद रामा किशोर सिंह ने पशुपति पारस के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। दूसरी ओर आरजेडी उम्मीदवार शिवचंद्र राम के सामने भी यही मुसीबत है। टिकट बंटवारे से नाराज चल रहे लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव यहां से बालेंद्र दास का समर्थन कर रहे हैं। इसी सीट में राघोपुर विधानसभा क्षेत्र का दियारा है। अभी तेजस्वी यादव यहां के विधायक हैं। राकांपा ने यहां से पूर्व मंत्री दसई चौधरी और गठबंधन ने शिवचंद्र राम को उम्मीदवार बनाया है। इस क्षेत्र में यादव, राजपूत, भूमिहार, कुशवाहा, पासवान और रविदास की संख्या सर्वाधिक है। अति पिछड़ों की भी यहां अच्छी संख्या है।
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रामविलास पासवान की मजबूत सीटः कांग्रेस के राजेश्वर पटेल ने लगातार तीन बार 1952, 1957 और 1962 में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। 1967 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के वाल्मीकि चौधरी, 1971 में कांग्रेस के ही रामशेखर सिंह जीते थे। 1977 में रामविलास पासवान यहां से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। 2009 और 1991 में रामविलास पासवान को रामसुंदर दास से हार का सामना करना पड़ा था। 
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तो तेजस्वी के इलाके में लालू ही जीतेंगे

पटना की सीमा से महज पांच किलोमीटर दूर तेरसिया गांव में नागा मठ के बाहर बैठे किसान जोगेंद्र यादव को महागठबंधन के उम्मीदवार का नाम भी मालूम नहीं है, पर वह कहते हैं, लालू ही जीतेंगे। 

तब गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी में उड़ा था राजेश पायलट का विमान

यह बात वर्ष 1993 की है। बिहार के मधेपुरा लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा था। कांग्रेस के कद्दावर नेता और तत्कालीन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री राजेश पायलट मधेपुरा के मुरलीगंज में आमसभा के लिए आए थे। उन्हें सहरसा वापस जाने में काफी देर हो गई और घना अंधेरा छा गया। रात में राजेश पायलट बिहार के सहरसा हवाई अड्डे पर पहुंचे तो रोशनी नहीं होने से उनके पायलट ने विमान उड़ाने से मना कर दिया। इस पर राजेश पायलट ने कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को कुछ गाड़ियां लाने को कहा। इसके बाद कार्यकर्ता करीब 40 गाड़ियां लेकर हवाईअड्डे पहुंच गए। इन सभी गाड़ियों को रनवे पर कतारबद्ध खड़ा करवा दिया गया और हेडलाइट जला दी गई। इससे रनवे पर पर्याप्त रोशनी हो गई और राजेश पायलट के विमान का पायलट भी तैयार हो गया। वाहनों की रोशनी में ही राजेश पायलट के विमान ने टेक ऑफ किया।

बहादुर नहीं गिद्ध गिनते हैं लाशें 

लोग एयर स्ट्राइक को लेकर लाशें गिनने की बात करते हैं। बहादुर कभी लाशें नहीं गिनते, लाशें तो गिद्ध गिना करते हैं। 1971 में इंदिरा की जय जयकार हुई थी, तो इस बार मोदी की जय जयकार क्यों नहीं हो सकती।

- राजनाथ सिंह, गृहमंत्री

भाजपा कर रही हताशा भरे काम

राजनीतिक उपद्रव, गुंडागर्दी, बदला, दुर्भावना और विपक्षियों पर हमले, यह सब दर्शाता है कि भाजपा चुनाव हार चुकी है और हताशा में यह सब कर रही है। हम अरविंद केजरीवाल पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं, और उनके साथ हैं।
 -ममता बैनर्जी, प. बंगाल सीएम व तृणमूल अध्यक्ष

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