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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha election 2019: Mulayam Singh Yadav profile political career, mainpuri seat

मैनपुरी से चुनावी ताल ठोकेंगे मुलायम, 3 बार यूपी के सीएम और रक्षामंत्री तक ऐसा रहा सफर

Fri, 08 Mar 2019 12:59 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Fri, 08 Mar 2019 12:59 PM IST
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Lok Sabha election 2019: Mulayam Singh Yadav profile political career, mainpuri seat
मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमाल संभालने वाले मुलायम सिंह यादव आने वाले लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए जिन छह उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है उसमें मुलायम सिंह यादव का नाम भी शामिल है। ऐसे वक्त में जब मुलायम सिंह यादव को तकरीबन मुख्यधारा की सियासत से दूर समझा जा रहा था वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति की तरफ लौट रहे हैं। बेटे अखिलेश यादव के हाथ में पार्टी की कमान सौंपने के बाद मुलायम सिंह यादव पार्टी में संरक्षक की भूमिका में हैं। उनके अलावा समाजवादी पार्टी ने पांच अन्य उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इनमें बदायूं से धर्मेंद्र यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव चुनावी मैदान में होंगे। इटावा से कमलेश कठेरिया, राबर्ट्सगंज से भाईलाल कोल व बहराइच से शब्बीर बाल्मीकि लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। आइए मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक सफर से रूबरू होते हैं... 

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घुमावदार रहा मुलायम सिंह यादव का सफर

मुलायम गांव से निकले। इटावा से ग्रेजुएशन किया और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आगरा पहुंचे। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और पहली बार उस वक्त लोहिया का सानिध्य उन्हें मिला जब 1966 में लोहिया इटावा पहुंचे थे। 1967 में लोहिया की पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत का ताज पहना। लोहिया की मौत के बाद मुलायम ने चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल का दामन लिया। आपातकाल में मीसा में गिरफ्तार हुए और जेल हो गई। 1979 में चौधरी चरणसिंह ने जब लोकदल की स्थापना की तो मुलायम उधर हो लिए। 1989 का दौर आया तो जनता पार्टी ज्वॉइन कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
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कारसेवकों पर गोली और 'राष्ट्रीय नेता' बन गए मुलायम...!

4 अक्तूबर 1992 को मुलायम ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की। तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने। कांग्रेस विरोध के दौर में 1977 में मंत्री बने और इसके बाद अयोध्या मुद्दे ने मुलायम को राजनीति के शिखर पर पहुंचाया दिया। यह 1990 का दौर था और भारत की राजनीतिक लड़ाई मंदिर-मस्जिद के फेर में आ गई थी। मुलायम उस वक्त सूबे के मुख्यमंत्री थे और बाबरी मस्जिद के लिए कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। यही वह दौर था जब भाजपा के हिंदू शिखर पुरुष आडवाणी, रथ लेकर निकले थे। सोमनाथ से अयोध्या तक माहौल को हिंदुत्वादी करने का दौर था। सत्ता में वीपी सिंह बैठे थे और आडवाणी की रथ यात्रा उनके माथे पर बल खींच रही थी। आडवाणी को रोकने का भारी दबाव था। 


जब 23 अक्टूबर को बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हुई उसके सात दिन बाद ही 30 अक्टूबर को मुलायम ने कार सेवकों पर गोल चलाने का आदेश दे दिया। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 30 कार सेवकों की जान गई, लेकिन आंकड़ों की सच्चाई संदिग्ध ही रही।

बेटे के साथ खींचतान ने बटोरी काफी सुर्खियां

साल 2016 में मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश के हाथों में समाजवादी पार्टी की कमान सौंपी। इसके बाद से कई मौकों पर मुलायम और अखिलेश के बीच मतभेद साफ दिखे।चार साल पहले मैनपुरी में ही मुलायम ने अखिलेश को उस वक्त डांटा, जब अखिलेश के कंधों पर सूबे की जिम्मेदारी थी। इसके बाद लखनऊ में भी डांट लगाई। यह वह वक्त था जब मुलायम बेमौसम बारिश को लेकर बेटे की सरकार की तरफ से पहुंचाई मदद का जिक्र कर रहे थे। मुलायम भाषण दे रहे थे और अखिलेश मंच पर बैठकर  लोगों से बातचीत कर रहे थे। मुलायम ने सरेआम मंच से अखिलेश को डांटा। उन्होंने पहले कहा मुख्यमंत्री जी बात करने में लगे हैं और फिर अखिलेश को जोरों की डांट लगाते हुए कह डाला- आ गया है बात करने....एक दौर वह भी था जब पिता-पुत्र के बीच बहस और चाचा के साथ धक्का मुक्की का वीडियो मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रहा था। 2016 में मुलायम ने कह डाला-हम खड़े हो जाएंगे तो सरकार की ऐसी तैसी हो जाएगी।
 

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