मेनका गांधी के एबीसीडी वाले बयान पर चुनाव आयोग की चेतावनी, दी हिदायत
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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है। मंत्री को लिखे पत्र में आयोग का कहना है कि मौजूद सबूत और तथ्यों के आधार हम उनके द्वारा दिए गए अभद्र बयानों की कड़ी निंदा करते हैं। उन्हें चेतावनी दी जाती है कि वह भविष्य में इस तरह के कदाचार को न दोहराएं। मेनका के 14 अप्रैल को सुल्तानपुर के सरकोड़ा गांव में दिए बयान पर आयोग ने उन्हें चेतावनी दी है।
EC in a letter to Union Min Maneka Gandhi: Based on the available evidence&material facts in the matter before EC, hereby, strongly condemns the impugned statements made by her (on 14 April in Sultanpur's Sarkoda village) & warns her not to repeat such misconduct in future. pic.twitter.com/BjKm91vinY
— ANI (@ANI) April 29, 2019विज्ञापन
मेनका गांधी ने एक जनसभा के दौरान कहा था कि हमलोग पीलीभीत से हमेशा से जीतते चले आए हैं, लेकिन पता है कि किसी गांव में अन्य गांवों की अपेक्षा ज्यादा विकास के मानदंड क्या हैं। इतना कह कर उन्होंने अपना एबीसीडी का फॉर्मूला बताया।
मेनका ने कहा कि अपने लोकसभा क्षेत्र के गांवों को उन्होंने चार कैटेगरी में बांटा है।
- 'ए' कैटेगरी- जिस गांव से भाजपा को 80 फीसदी वोट मिले
- 'बी' कैटेगरी- जिस गांव से भाजपा को 60 फीसदी वोट मिले
- 'सी' कैटेगरी- जिस गांव से भाजपा को 50 फीसदी वोट मिले
- 'डी' कैटेगरी- जिस गांव से भाजपा को 50 फीसदी से कम वोट मिले
उन्होंने आगे कहा था कि
- विकास कार्य पहले ए कैटेगरी वाले गांवों से शुरू होते हैं। सबसे पहले यहां पूरा विकास किया जाता है।
- ए कैटेगरी के गांवों का विकास पूरा होने के बाद बी कैटेगरी के गांवों का विकास कार्य शुरू होता है।
- बी कैटेगरी के गांवों का विकास पूरा हो जाता है, तब सी कैटेगरी के गांवों में विकास कार्य शुरू होता है।
- ..और सबसे अंत में डी ग्रेड। डी तो कोई होना नहीं चाहेगा, क्योंकि सभी को बेहतर होना है।
मेनका ने लोगों से कहा था कि यह आपलोगों पर निर्भर करता है कि आप ए, बी या सी किस कैटेगरी में शामिल होना चाहते हैं और कैसा विकास चाहते हैं! पिछले दिनों मेनका गांधी तब विवादों में आई थीं, जब सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र में उन्होंने यह कह डाला था कि वह मुस्लिमों के सपोर्ट के बिना भी उनकी जीत तय है और जब मुस्लिम अपना काम लेकर उनके पास आते हैं, तो काम करने की उनकी इच्छा नहीं होती।